शशिकला को बंगलुरु से चेन्नई जेल लाने की कवायद में लगे वकील, पर ये फंसा पेंच
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बंगलुरु की जेल में बंद एआईएडीएमके की जनरल सेक्रेटरी शशिकला नटराजन को कर्नाटक से चेन्नई जेल में ट्रांसफर किया जा सकता है। शशिकला के वकीलों ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। हालांकि यह सब इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि आय से अधिक संपति रखने के मामले में दोषी शशिकला को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेल भेजा गया है। ऐसे में बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के शशिकला को बंगलुरु की जेल से कहीं ओर शिफ्ट नहीं किया जा सकता।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार शशिकला के वकीलों ने उन्हें बंगुलरु की पाराप्पना अग्ररहारा जेल से चेन्नई की सेंट्रल जेल में शिफ्ट करवाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि एआईएडीएमके के वरिष्ठ पदाधिकारी इस संबंध में कुछ बोलने से बच रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि फिलहाल हम इस स्थिति में नहीं हैं कि इस खबर को नकार सके या स्वीकार कर सकें। हां, इतना जरूर कहा जा सकता है कि हम सब शशिकला को बंगलुरु से चेन्नई शिफ्ट करवाना चाहते हैं।
पार्टी प्रवक्ता अवदी कुमार ने कहा यह एक जायज मामला है और उम्मीद है वकील आसानी से उनका ट्रांसफर चेन्नई करा लेंगे। हम कानून के दायरे में रहकर ही पूरी प्रक्रिया का पालन करना चाहते हैं।
बता दें कि बीते 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला और उनके संबंधियों जे इलावरसी और वीएन सुधाकरण को दोषी मानते हुए चार साल कैद की सजा सुनाई थी।
ऐसे में शशिकला को बंगलुरु से दूसरी जेल ट्रांसफर करवाने के लिए पहले उस जेल के अधीक्षक और कर्नाटक के कानून मंत्री के समक्ष आवेदन करना होगा। शशिकला के वकील एनडीएस कुलाशेखरन ने बताया कि यह दो राज्यों के बीच का मामला है, इसलिए हम अपनी याचिका पहले कर्नाटक सरकार के समक्ष पेश करेंगे।
हालांकि हम अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं जिसमें शशिकला की ओर से सीधे कर्नाटक सरकार के समक्ष भी आवेदन किया जा सकता है और इसके लिए कोर्ट का रुख भी किया जा सकता है।
वहीं इस पूरे मामले में सरकारी वकील रहे बीवी आचार्य ने बताया कि जेल नियमों के अनुसार कैदियों की अदला बदली का मामला दोनों जेलों के वरिष्ठ अधिकारियों की आपसी सहमति से जुड़ा है। लेकिन शशिकला का मामला अलग है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद चेन्नई जेल भेजा गया है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बगैर उनका ट्रांसफर दूसरी जेल के लिए संभव नहीं लगता। अगर कोई ऐसा करता है तो इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।