Sanjay Singh: संजय की गिरफ्तारी से कम हो सकती है I.N.D.I.A गठबंधन में दबाव और शर्तों की राजनीति! ये है वजह
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आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की गिरफ्तारी के साथ कयास सबसे ज्यादा इसी बात के लगाए जा रहे हैं कि I.N.D.I.A गठबंधन की मजबूती और ज्यादा हो जाएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि ईडी की ओर से की गई इस गिरफ्तारी के बाद गठबंधन में किसी भी तरह की शर्तों का फॉर्मूला भी दबाव बनाने के लिए नहीं लगाया जा सकेगा। पहले चर्चा इसी बात की हो रही थी कि गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर दबाव बन रही है। ठीक इसी तरह कुछ अन्य राज्यों में भी सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव की राजनीति बनाई जा रही थी। दरअसल सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरह से सरकारी एजेंसियों का शिकंजा विपक्षी पार्टियों पर लगातार कस रहा है, उससे इन दलों के बीच में आपसी मजबूती भी बढ़ रही है।
राजनीति विश्लेषण हरिओम तंवर कहते हैं कि संजय सिंह का गिरफ्तार होना सियासी तौर पर तो आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। लेकिन राजनीतिक रूप से गठबंधन को मजबूती देने के लिहाज यह घटनाक्रम बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तंवर कहते हैं कि जिस तरीके से जांच एजेंसियों के निशाने पर विपक्षी नेता लगातार बने हुए हैं, उससे गठबंधन में मजबूती से लड़ने की ताकत भी बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरीके से आने वाले लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच में अंदरूनी तौर पर और खुले तौर पर भी तनातनी का माहौल बना है। उसमें बहुत हद तक अब सब कुछ सामान्य हो सकता है। इसमें पंजाब में आने वाली लोकसभा की सीटें और दिल्ली में लोकसभा सीटों के बीच में सबसे ज्यादा पेंच फंसा हुआ है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में लेफ्ट और तृणमूल कांग्रेस के बीच में सीटों का पेंच फंसा हुआ है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच में सीटों को लेकर के सियासी खींचतान मची हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों की ओर से विपक्षी दलों को दिए जा रहे नोटिस और हो रही गिरफ्तारी पर अब सभी सियासी दल एकजुट हो रहे हैं। इसी एकजुटता में गठबंधन में ज्यादातर राजनीतिक दलों की कोशिश यही है की सीटों के फॉर्मूले पर बेवजह उलझने से ज्यादा बेहतर है कि वह एक समझौते के तहत गठबंधन का एक प्रत्याशी ही सियासी मैदान में उतारा जाए। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद और विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A कमेटी के सदस्य जावेद अली कहते हैं कि सीटों के बंटवारे को लेकर किसी भी तरीके का कोई दबाव बन ही नहीं रहा है। उनका कहना है कि सभी विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ता पक्ष के खिलाफ एक प्रत्याशी खड़े करने की पूरी तैयारी में है। इसलिए सीटों के बंटवारे को लेकर जो भी कयासबाजी सियासी गलियारो में चल रही है। वह भाजपा की ओर से प्रचारित की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की गिरफ्तारी के साथ पार्टी की रणनीति को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल राज्यसभा सांसद संजय सिंह विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA की कैंपेन कमिटी के सदस्य भी हैं। अब जब संजय सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो बड़ा सवाल या उठना है कि आखिर उसे कैंपेन कमिटी में आम आदमी पार्टी की ओर से सियासी तौर पर कौन बड़ी सहभागिता निभाएगा। सियासी गलियारों में कहा यही जा रहा है कि अगर संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाता है, तो आम आदमी पार्टी को अपनी इन महत्वपूर्ण कमेटी से लेकर गठबंधन समूह में किसी अन्य बड़े नेता को बड़ा चेहरा बनाकर भी उतारना होगा। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की दशा में अब संजय सिंह के रिप्लेसमेंट के तौर पर वह नया नाम राघव चड्ढा का होगा या किसी अन्य नेता का, इसको लेकर आम आदमी पार्टी को फैसला लेना होगा।