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रूस-यूक्रेन संकट: भारत के कूटनीतिक कौशल का इम्तिहान, उलझन के ये हैं चार कारण
Fri, 25 Feb 2022 07:42 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 25 Feb 2022 07:42 AM IST
सार
भारत ने रूसी हमले को यूक्रेन के लिए गंभीर संकट बताने के साथ कूटनीतिक तरीके से हल करने की बात कही है। पर, असल में भारत के लिए यह कूटनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्पति व्लादिमिर पुतिन (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
पीएम नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करके अमन की अपील के साथ अपनी चिंताएं बताई हैं। वहीं, यूक्रेन ने भी भारत से मदद की गुहार लगाई है। भारत ने रूसी हमले को यूक्रेन के लिए गंभीर संकट बताने के साथ कूटनीतिक तरीके से हल करने की बात कही है। पर, असल में भारत के लिए यह कूटनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा है। सबकी निगाहें लगी हैं कि भारत कैसे संतुलन बनाएगा। भारत की उलझन के चार कारण...
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पहला: पश्चिमी देश रूस की कार्रवाई को अनदेखा करने और दोहरे मापदंड अपनाने के तौर पर देखते हैं, लेकिन चीन के मामले में भारत इसे क्षेत्रीय अखंडता व संप्रभुता के तौर पर उठाता रहा है।
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दूसरा: भारत के रूस के साथ सामरिक संबंध और सैन्य जरूरतों के लिए निर्भरता बड़ा कारण है। भारत की 60-70 फीसदी सैन्य उपकरणों की आपूर्ति रूस से होती है। चीन के साथ जारी तनाव के बीच यह और जरूरी है।
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तीसरा: भारत के 20,000 से अधिक छात्र व नागरिक यूक्रेन में रहते हैं। काफी रूस की सीमा के नजदीक रहते हैं। ज्यादातर मेडिकल छात्र हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है। उनकी वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं।
चौथा: भारत ने लगातार कहा कि कूटनीतिक स्तर पर मैत्रीपूर्ण तरीके से हल निकालना चाहिए। भारत के सामने संकट यह है कि किसी भी पक्ष पर असहयोगी रुख अपनाने का दोष नहीं लगा सकता। पश्चिमी देश रूस पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुतिन नाटो के विस्तार को कारण बता रहे हैं। भारत के सामने सिद्धांत-नैतिक मूल्यों व व्यवहारवाद संबंधों में से किसी एक को चुनने की चुनौती है।