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Karnataka: 'आरएसएस को स्कूल-कॉलेज और पार्क में कार्यक्रम की न दी जाए अनुमति', प्रियांक खरगे का सरकार पत्र
Sun, 12 Oct 2025 03:35 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 12 Oct 2025 03:35 PM IST
सार
Karnataka: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकारी जगहों पर आरएसएस के कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की गतिविधियां बच्चों और युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भर रही हैं। उनका कहना है कि ये कार्यक्रम देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हैं, इसलिए इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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प्रियांक खरगे, मंत्री, कर्नाटक
- फोटो : X @PriyankKharge
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विस्तार
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आग्रह किया है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के मैदानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी अपील की है कि सार्वजनिक पार्कों और मुजराई (धार्मिक ट्रस्ट द्वारा संचालित) मंदिरों में भी आरएसएस के कार्यक्रमों को अनुमति न दी जाए।
चार अक्तूबर कोलिखे इस पत्र में प्रियांकखरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्तस्कूलों के साथ-स्था सार्वजनिक पार्कों में अपनी शाखाएं चला रहा है, जहां नारे लगाए जाते हैं और बच्चों व युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह पत्र रविवार को मीडिया के साथ साझा किया।
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कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा भारत की एकता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के खिलाफ है। मंत्री ने लिखा, जब समाज में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकते सिर उठाती हैं, तो हमारा संविधान, जो ईमानदारी, समानता और एकता के सिद्धांतों पर आधारित है, ऐसी ताकतों को रोकने और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने का अधिकार देता है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अनुमति के बिना लाठी लेकर आक्रामक प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जो बच्चों और युवाओं पर मानसिक रूप से बुरा असर डालते हैं। उन्होंने सरकार से से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, देश के बच्चों, युवाओं,जनता और पूरे समाज के हित में मैं विनम्र आग्रह करता हूं कि आरएसएस की ओर से किए जाने वाले सभी कार्यक्रमों, चाहे वह शाखा या बैठक के नाम पर हों, पर प्रतिबंध लगाया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रतिबंध सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, सार्वजनिक खेल के मैदानों, पार्कों, मुजराई विभाग के मंदिरों, पुरातत्व विभाग की देखरेख वाली जगहों और अन्य सभी सरकारी परिसरों पर लागू होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान नागरिकों और राज्य दोनों को यह अधिकार देता है कि वे समाज में विभाजन फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करें और देश के धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।
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चार अक्तूबर कोलिखे इस पत्र में प्रियांकखरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्तस्कूलों के साथ-स्था सार्वजनिक पार्कों में अपनी शाखाएं चला रहा है, जहां नारे लगाए जाते हैं और बच्चों व युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह पत्र रविवार को मीडिया के साथ साझा किया।
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कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा भारत की एकता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के खिलाफ है। मंत्री ने लिखा, जब समाज में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकते सिर उठाती हैं, तो हमारा संविधान, जो ईमानदारी, समानता और एकता के सिद्धांतों पर आधारित है, ऐसी ताकतों को रोकने और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने का अधिकार देता है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अनुमति के बिना लाठी लेकर आक्रामक प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जो बच्चों और युवाओं पर मानसिक रूप से बुरा असर डालते हैं। उन्होंने सरकार से से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, देश के बच्चों, युवाओं,जनता और पूरे समाज के हित में मैं विनम्र आग्रह करता हूं कि आरएसएस की ओर से किए जाने वाले सभी कार्यक्रमों, चाहे वह शाखा या बैठक के नाम पर हों, पर प्रतिबंध लगाया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रतिबंध सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, सार्वजनिक खेल के मैदानों, पार्कों, मुजराई विभाग के मंदिरों, पुरातत्व विभाग की देखरेख वाली जगहों और अन्य सभी सरकारी परिसरों पर लागू होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान नागरिकों और राज्य दोनों को यह अधिकार देता है कि वे समाज में विभाजन फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करें और देश के धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।
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