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बंगाल में बीजेपी का अनसंग हीरो: बांग्ला सीखी, गांव-गांव घूमा और पार्टी के लिए अरसे से जमीन तैयार कर रहा

Sat, 13 Mar 2021 05:05 PM IST
अंशुल तलमले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अंशुल तलमले Updated Sat, 13 Mar 2021 05:05 PM IST
सार

बीजेपी में संगठन मंत्री आमतौर पर बिना चर्चा में आए, पर्दे के पीछे चुपचाप काम करते हैं उसी परंपरा को निभाते हुए शिव प्रकाश भी शांति से राज्य में पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।

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RSS pracharak Shiv Prakash prepared ground for bjp in West Bengal Assembly elections
शिव प्रकाश - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

2019 में हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो गया था कि बंगाल में तृणमूल को सिर्फ बीजेपी ही टक्कर दे सकती है। पिछले 10 साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी सरकार को उखाड़ फेंकेन के लिए बीजेपी ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला हुआ है। पार्टी अध्यक्ष भी समय-समय पर राज्य का दौरा करते रहते थे। एक तरफ पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय बतौर प्रभारी बंगाल में चुनाव की कमान संभाले हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने वाले शख्स से दुनिया अनभिज्ञ है।

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RSS में दशकों तक प्रचारक रहे शिव प्रकाश
जिस बंगाल में कभी बीजेपी अपने वजूद के लिए संघर्ष करती थी, आज वहां उसे सत्ता का दावेदार बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के साथ-साथ इसे शिव प्रकाश संभाल की मेहनत का फल भी कहा जा सकता है। बीजेपी में राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री के तौर पर कामकाज संभाल रहे शिव प्रकाश बीते कई साल से चुपचाप बंगाल में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से 2014 में आम चुनावों के बाद उन्हें बीजेपी का दायित्व सौंपा गया। यानी उनकी पार्टी में आधिकारिक एंट्री 2014 में हुई। पहला दायित्व उन्हें ओडिशा का मिला फिर आलाकमान ने पश्चिम बंगाल भेजने का फैसला लिया। कुछ माह के भीतर ही वह पश्चिम बंगाल के संगठन प्रभारी बना दिए गए।
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मुरादाबाद के रहने वाले हैं शिव प्रकाश
यूपी के रहने वाले शिव प्रकाश मेहनती और जुझारू स्वभाव के हैं। उनकी कर्मठता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य में पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से बांग्ला भी सीख ली, जिसका उन्हें फायदा भी मिला। गांव में रहने वाले समाज के आखिरी व्यक्ति तक पार्टी की विचारधारा पहुंचाते रहे। अपनी बात उन्हें समझाते रहे। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए मुरादाबाद के रहने वाले शिव प्रकाश ने बताया कि 1986 में वह संघ के प्रचारक बने थे। पश्चिम यूपी में प्रांत प्रचारक रहने के बाद उत्तराखंड के क्षेत्र प्रचारक भी रहे थे।
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हर सीट का आंकड़ा अंगुलियों पर
2015 में पश्चिम बंगाल आने के बाद शिव प्रकाश ने बूथ लेवल पर काम किया। गांव-गांव में कार्यकर्ता खड़े किए। 78 हजार बूथों में से ज्यादातर में पार्टी की कमेटियों का गठन किया। इसी का परिणा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल से बीजेपी को अप्रत्याशित सफलता मिली। इतिहास का सर्वोच्च प्रदर्शन करते हुए कमल छाप के 18 प्रत्याशियों ने संसद में जगह बनाई। पार्टी विधानसभा में यही प्रदर्शन के लिए आशान्वित है। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 211 सीटों पर विजय हासिल हुई थी जबिक भाजपा को महज तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस को इस चुनाव में 44 सीटें और माकपा को 26 सीटें मिली थी।

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