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विपक्ष का मुंह बंद करने की मोहन भागवत की मुहिम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Aug 2018 05:07 AM IST
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Mohan Bhagwat at Nagpur RSS Event
- फोटो : PTI
जरा कल्पना कीजिए - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और देश-काल के प्रति उसके नजरिए के बारे में सवाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पूछें और जवाब दें सरसंघचालक मोहन भागवत। यह कल्पना हकीकत में बदल सकती है यदि भागवत से संवाद का आमंत्रण राहुल गांधी स्वीकार कर लें। ऐसा ही निमंत्रण मायावती, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार, सीताराम येचुरी जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं को भेजा जा रहा है।
अपने 93 साल के इतिहास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहली बार देश और ताजा मुद्दों पर अपने नजरिए के बारे में एक बहस का आयोजन कर रहा है। दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 से 19 सितंबर तक होने वाले इस आयोजन में समाज के विभिन्न तबकों से लगभग 400 लोगों को आमंत्रित किया जाएगा जिनकी जिज्ञासाओं को खुद संघ प्रमुख शांत करेंगे।
पिछले कुछ समय से राहुल गांधी न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर लगातार हमले करते रहे हैं बल्कि संघ पर भी। वे कहते रहे हैं कि देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है - पहली जो देश और समाज को एक रखना चाहती है और दूसरी जो देश और समाज को बांटना चाहती है। दो दिन पहले ही लंदन में एक समारोह में बोलते हुए राहुल ने संघ की तुलना अरब देशों में फैले मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी।
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यही वजह है कि सामान्यतया मीडिया से दूर रहने वाला संघ अब अपने बारे में सभी भ्रांतियां दूर कर देना चाहता है। इसीलिए उसने तीन दिन तक चलने वाले इस संवाद में समाज के हर तबके के लोगों को आमंत्रित किया है। इसमें लेखक होंगे, प्रोफेसर भी, इतिहासकार होंगे और संगीतकार भी, मीडिया के लोग होंगे तो वकील भी, डॉक्टर होंगे तो उद्योगपति भी।
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अपने 93 साल के इतिहास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहली बार देश और ताजा मुद्दों पर अपने नजरिए के बारे में एक बहस का आयोजन कर रहा है। दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 से 19 सितंबर तक होने वाले इस आयोजन में समाज के विभिन्न तबकों से लगभग 400 लोगों को आमंत्रित किया जाएगा जिनकी जिज्ञासाओं को खुद संघ प्रमुख शांत करेंगे।
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पिछले कुछ समय से राहुल गांधी न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर लगातार हमले करते रहे हैं बल्कि संघ पर भी। वे कहते रहे हैं कि देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है - पहली जो देश और समाज को एक रखना चाहती है और दूसरी जो देश और समाज को बांटना चाहती है। दो दिन पहले ही लंदन में एक समारोह में बोलते हुए राहुल ने संघ की तुलना अरब देशों में फैले मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी।
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यही वजह है कि सामान्यतया मीडिया से दूर रहने वाला संघ अब अपने बारे में सभी भ्रांतियां दूर कर देना चाहता है। इसीलिए उसने तीन दिन तक चलने वाले इस संवाद में समाज के हर तबके के लोगों को आमंत्रित किया है। इसमें लेखक होंगे, प्रोफेसर भी, इतिहासकार होंगे और संगीतकार भी, मीडिया के लोग होंगे तो वकील भी, डॉक्टर होंगे तो उद्योगपति भी।
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क्या है मकसद?
मोहन भागवत
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख का पदभार कुछ ही समय पहले ग्रहण करने वाले अरुण कुमार ने बताया कि सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को भी इस आयोजन में निमंत्रण भेजा जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम बताने से इंकार कर दिया। राहुल गांधी हाल में प्रधानमंत्री मोदी और संघ को खुली बहस की चुनौती देते रहे हैं।
लेकिन संघ के सूत्रों का दावा है कि उसने अपने सभी आनुषांगिक संगठनों से उन लोगों की सूची मांगी है जिन्हें वे इस आयोजन में बुलाना चाहते हैं। सिर्फ प्रचार विभाग ने 150 से ज्यादा लोगों की सूची भेजी है। जल्द ही संघ के वरिष्ठ अधिकारी इनमें से चार सौ लोगों के नाम छांटकर उन्हें इस संवाद के लिए आमंत्रित करेंगे।
क्या है मकसद?
संघ का मानना है कि उसके स्वरूप, उसकी विचारधारा, आनुषांगिक संगठनों और ज्वलंत मुद्दों पर उसके विचारों के बारे में लोगों में बहुत भ्रम है जिसकी मुख्य वजह संवाद की कमी है। संघ का मानना रहा है कि उसका मुख्य काम समाजसेवा है। लेकिन लोग उस पर राजनीति में शामिल होने और सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाते हैं। इनमें ताजा नाम राहुल गांधी का है। इसलिये वस्तुस्थिति साफ की जानी जरूरी है।
लेकिन संघ के सूत्रों का दावा है कि उसने अपने सभी आनुषांगिक संगठनों से उन लोगों की सूची मांगी है जिन्हें वे इस आयोजन में बुलाना चाहते हैं। सिर्फ प्रचार विभाग ने 150 से ज्यादा लोगों की सूची भेजी है। जल्द ही संघ के वरिष्ठ अधिकारी इनमें से चार सौ लोगों के नाम छांटकर उन्हें इस संवाद के लिए आमंत्रित करेंगे।
क्या है मकसद?
संघ का मानना है कि उसके स्वरूप, उसकी विचारधारा, आनुषांगिक संगठनों और ज्वलंत मुद्दों पर उसके विचारों के बारे में लोगों में बहुत भ्रम है जिसकी मुख्य वजह संवाद की कमी है। संघ का मानना रहा है कि उसका मुख्य काम समाजसेवा है। लेकिन लोग उस पर राजनीति में शामिल होने और सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाते हैं। इनमें ताजा नाम राहुल गांधी का है। इसलिये वस्तुस्थिति साफ की जानी जरूरी है।