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Ram Mandir Donations: राम मंदिर चंदा चोरी पर RSS प्रमुख मोहन भागवत से पूछा सवाल, मिला यह जवाब

Fri, 03 Jul 2026 08:57 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नागपुर
पीटीआई, नागपुर Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 03 Jul 2026 08:57 PM IST
सार

राम मंदिर में हुई चंदा चोरी पर शुक्रवार को पत्रकारों ने जब आरएसएस प्रमुख से सवाल किया तो उन्होंने इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया। हालांकि इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों को राम-राम कहकर संबोधित किया।

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RSS chief Mohan Bhagwat sidestepped question regarding theft of Ram Mandir donations
मोहन भागवत - फोटो : amarujala.com

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को नागपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे। यहां कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जब वह वापस जाने लगे तो पत्रकारों ने उनसे राम मंदिर के चंदा चोरी से जुड़े सवाल पूछे। इस दौरान भागवत ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने इस सवाल के जवाब में बस राम-राम कहा और वहां से चले गए। हालांकि कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि विदेश के लोग जब नागपुर आते हैं और हमारा काम देखते है तो वह अपने देश के लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए हमें आमंत्रित करते हैं।   

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कितने महाद्वीपों से मिला प्रस्ताव?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के पांच महाद्वीपों से लोग संघ का काम देखने के लिए आए हैं। इन लोगों ने इच्छा जताई है कि RSS के स्वयंसेवक उनके देशों में जाकर लोगों को स्वयंसेवक बनने का प्रशिक्षण दें। नागपुर में 'डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालिवाहन' नामक यूट्यूब वीडियो के सार्वजनिक प्रसारण कार्यक्रम में भागवत ने कहा, "विदेशों से लोग समय-समय पर RSS का काम देखने आते हैं। वे पूछते हैं कि क्या हमारे स्वयंसेवक उनके देशों में जाकर वहां के लोगों को प्रशिक्षण दे सकते हैं।" इस कार्यक्रम में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर RSS प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो भी जारी किए गए।
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दुनिया भारत से क्या उम्मीद कर रही है?
भागवत ने कहा कि दुनिया को भरोसा है कि भारत सही रास्ता दिखा सकता है। लेकिन ऐसा तभी होगा, जब भारत खुद मजबूत और समृद्ध बने। उन्होंने कहा कि इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए RSS अपने शताब्दी वर्ष में संगठन का और विस्तार करना चाहता है। उनके मुताबिक, पहले की तुलना में अब समाज में संघ के प्रति स्वीकार्यता और सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि RSS की सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐसे लोगों को तैयार करना है, जो समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कर सकें।
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RSS किसे नियंत्रित नहीं करता?
भागवत ने उस धारणा को भी खारिज किया कि RSS पर्दे के पीछे से अलग-अलग संगठनों को नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज के कई क्षेत्रों में काम किया था और उनका मानना था कि हर क्षेत्र में काम करने के लिए समर्पित लोगों की जरूरत होती है। भागवत ने कहा कि RSS की शाखा एक ऐसी जगह है, जहां स्वयंसेवक हर परिस्थिति में अनुशासन, सेवा और संगठन के मूल्यों के साथ जीना सीखते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना है।


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हेडगेवार और 'हिंदू राष्ट्र' पर क्या बोले भागवत?
भागवत ने कहा कि डॉ. हेडगेवार केवल भाषण नहीं देते थे, बल्कि अपने जीवन से उदाहरण पेश करते थे। उन्होंने कहा कि जो लोग 'हिंदू राष्ट्र' का हिस्सा हैं, उन्हें अपनी शक्ति को संगठित कर देश के धर्म की रक्षा करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा केवल उसके अनुसार आचरण करने से ही संभव है।

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