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RSS: 'विश्व गुरु बनने के लिए वेदों-संस्कृत के ज्ञान का पोषण जरूरी', भागवत बोले- समय के साथ बदली हमारी संस्कृति

Sun, 23 Apr 2023 05:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,अहमदाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 23 Apr 2023 05:07 PM IST
सार

संघ प्रमुख गुजरात के साबरकांठा में मुदेती गांव में श्री भगवान याज्ञवल्क्य वेदतत्त्वज्ञान योगाश्रम ट्रस्ट द्वारा आयोजित 'वेद संस्कृत ज्ञान गौरव समरंभ' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने कहा कि भारत वेदों के मूल्यों पर बना है, जिनका पीढ़ी दर पीढ़ी पालन किया जाता रहा है।

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RSS chief Bhagwat says India needs to nurture knowledge of Vedas and Sanskrit to become vishwa guru
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने  वेदों के ज्ञान और संस्कृत की प्राचीन भाषा को जानने और विकसित करने पर जोर दिया। रविवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस चीफ ने कहा कि अगर भारत को 'विश्व गुरु' बनना है तो उसके लिए वेदों के ज्ञान और संस्कृत की प्राचीन भाषा को विकसित करने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति रूढ़िवादी नहीं है, लेकिन यह समय के साथ बदलती रही है। 
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'भारत का लक्ष्य ऐसा देश बनना जो सबकी मदद कर सके'
वे गुजरात के साबरकांठा में मुदेती गांव में श्री भगवान याज्ञवल्क्य वेदतत्त्वज्ञान योगाश्रम ट्रस्ट द्वारा आयोजित 'वेद संस्कृत ज्ञान गौरव समरंभ' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने कहा कि भारत वेदों के मूल्यों पर बना है, जिनका पीढ़ी दर पीढ़ी पालन किया जाता रहा है। ऐसे में आज के भारत को विकसित होना है, लेकिन उसका लक्ष्य अमेरिका, चीन और रूस की तरह महाशक्ति बनना नहीं है बल्कि हमें एक ऐसा देश बनना है जो आज दुनिया को परेशान करने वाली समस्याओं का जवाब दे सके। ऐसा देश जो अपने सही आचरण से दुनिया को शांति, प्रेम और समृद्धि का रास्ता दिखा सके। 
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'विश्वगुरू बनने के लिए वेद, विज्ञान और संस्कृति का ज्ञान जरूरी'
आगे बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो धर्म का प्रचार करने, सभी को एकजुट करने और विश्व गुरु बनने में विश्वास करता है। विश्वगुरु बनने के लिए वेद, विज्ञान और संस्कृति के ज्ञान का पोषण करना जरूरी है। यह सारा ज्ञान संस्कृत में है। इसलिए संस्कृत का प्रभाव होना आवश्यक है। यदि हम अपनी मातृभाषा बोलना जानते हैं ठीक है, तो हम 40 प्रतिशत संस्कृत सीख सकते हैं। संस्कृत भाषा की महत्ता को बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी को संस्कृत और संगीत का ज्ञान है तो वह विज्ञान और गणित की कई अवधारणाओं को आसानी से सीख सकता है।
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वैश्विक मुद्दों पर की चर्चा
इस दौरान उन्होंने वर्तमान वैश्विक हालातों के बारे में वक्तव्य दिया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, श्रीलंका का आर्थिक संकट और चीन-अमेरिका के बीच के तनाव और इन मुद्दों के बीच भारत की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के रुख की तारीफ की। साथ ही कहा कि दोनों देश भारत को अपने पक्ष में चाहते हैं, लेकिन भारत रूस-अमेरिका से कहता है कि आप भी हमारे दोस्त और आप भी हमारे दोस्त हो, और यह तीसरा जो आप दोनों के बीच दब गया है, वह भी हमारा दोस्त है। इसलिए पहले मैं इसकी मदद करुंगा। भारत का कहना है कि आप दोनों में से मैं किसी का पक्ष नहीं लेता। ये लड़ाई का जमाना नहीं है लड़ना बंद करो।


जब भी किसी को जरूरत होगी हम मदद करेंगे- भागवत
भागवत ने आगे कहा कि जब भी किसी को हमारी जरूरत होगी, हमारा देश उसकी मदद करेगा। इसके पीछे हमारे पूर्वजों द्वारा दिया गया निर्देश है। उन्होंने हमें कर्तव्य के रूप में ऐसा करने का निर्देश दिया है। एक देश को अपना कर्तव्य निभाने के लिए एक ऐसी संस्कृति की आवश्यकता होगी जो विश्व की एकता पर आधारित हो। हमारी संस्कृति, हमारा धर्म रूढ़िवादी नहीं है। यह कुछ ऐसा है जो समय के साथ बदलता है। संघ प्रमुख ने आगे कहा है कि धर्म को मानने वाला देश कभी किसी का लाभ नहीं उठाएगा।  परस्पर जीने के लिए हम एक दूसरे का लाभ उठाते हैं, लेकिन वह प्रेम का लेन-देन होता है। 

इसे भी पढ़ें- RSS: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- विश्व में सिर्फ भारत ने श्रीलंका की मदद की, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बोले
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