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S Jaishankar: विदेश मंत्री बोले- जहां वैश्वीकरण का पुराना मंत्र अब भी प्रचलित, वहां राष्ट्रवाद एक बुरा शब्द

Fri, 02 Aug 2024 06:34 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 02 Aug 2024 06:34 PM IST
सार

S Jaishankar: विदेश मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में दुनिया काफी अधिक राष्ट्रवादी होगी। इसलिए जरूरी है कि भारत वैश्विक घटनाक्रमों का मूल्यांकन करे और इसके लाभों की गणना करे। 

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Role of rising nationalism in shaping world affairs must also be recognized, S Jaishankar says
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : एएनआई

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक मामलों को आकार देने में बढ़ते राष्ट्रवाद की भूमिका को पहचाना जाना चाहिए। दुनिया के उन हिस्सों में जहां वैश्वीकरण का पुराना मंत्र अभी भी प्रचलित है, वहां राष्ट्रवाद एक बुरा शब्द है। लेकिन सच्चाई यह है कि वे उन कई विकसित समाजों में निराशा को दर्शाते हैं, जहां गलत भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक विकल्पों से जीवन की गुणवत्ता खराब हो गई है।

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उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में दुनिया काफी अधिक राष्ट्रवादी होगी। इसलिए जरूरी है कि भारत वैश्विक घटनाक्रमों का मूल्यांकन करे और इसके लाभों की गणना करे। 
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नई दिल्ली में वायु शक्ति अध्ययन केंद्र में सातवें जसजीत सिंह स्मृति व्याख्यान में जयशंकर ने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि जापान के साथ व्यापार बढ़ाने की गुंजाइश है। हमारा 2027 तक पांच ट्रिलियन येन का लक्ष्य है। लक्ष्य के आधे रास्ते पर हैं। भू-अर्थशास्त्र में बदलाव के साथ हमें जापान के साथ और अधिक मेहनत करनी होगी। जापान के लोग समझते हैं कि उन्हें भारत के साथ काम करना है और हमारे हित समान हैं।"
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उन्होंने कहा, अमेरिका के साथ संबंध किसी भी अन्य संबंध से अधिक हैं। यह संबंध बदलती दुनिया के गवाह हैं। हमारे बीच मुद्दे हैं। हमारे बीच मतभेद हैं। लेकिन हम लगातार बाजार की उम्मीदों पर खरा उतर रहे हैं, क्योंकि बाार लगातार हमारे पीछे हैं। 

विदेश मंत्री ने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘ हमने महसूस किया कि हमारे इतिहास, पड़ोसियों के आकार, हमारे पड़ोसियों और हमारे समाजशास्त्र को देखते हुए, इन रिश्तों को संभालना आसान नहीं है।”

जयशंकर ने भारत के कई पड़ोसियों के साथ ‘‘राजनीतिक स्तर पर उतार-चढ़ाव’’ का जिक्र किया और कहा कि ये ‘‘वास्तविकताएं’’ हैं जिन्हें स्वीकार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि आज हमारे पास ज्यादा संसाधन हैं, ज्यादा क्षमताएं हैं, हम भौगोलिक रूप से केंद्र में हैं और हमारा आकार बहुत बड़ा है।’’


जयशंकर ने कहा,‘‘समय-समय पर हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हमारे कुछ पड़ोसियों के यहां ऐसे मौके आए हैं जब हम राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं।’’ विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक परिदृश्य बदल गया है और आगे भी बदलता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की प्राथमिक चिंताएं और चुनौतियां भी उस परिवर्तन को प्रतिबिंबित करती हैं। हम प्रतिस्पर्धा के नए रूपों पर विचार कर रहे हैं जो उच्च स्तर पर पहुंच और अंतर-निर्भरता का लाभ उठाते हैं।’’

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