Same Gender Marriage: 'समलैंगिकों के अधिकारों की हो रक्षा,' 'सुप्रीम' फैसले को लेकर वकील करुणा ने कही यह बात
Same Gender Marriage: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार करते हुए अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। हालांकि, कोर्ट ने ऐसे जोड़ो को बच्चा गोद लेने का अधिकार दे दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार करते हुए अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। हालांकि, कोर्ट ने ऐसे जोड़ो को बच्चा गोद लेने का अधिकार दे दिया है। वहीं, शीर्ष कोर्ट के इस फैसले पर वकील करुणा नंदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चार अलग-अलग फैसले थे, लेकिन जो कुछ भी सर्वसम्मति से था, वह यह था कि समलैंगिक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और राज्य सरकार उनकी रक्षा कर सकती है।
वकील नंदी ने कहा, 'चार अलग-अलग फैसले थे। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने एक साथ कानूनी और न्यायिक सिद्धांतों के कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण सेटों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विवाह कोई मौलिक अधिकार नहीं है। हालांकि, विवाह के अधिकार के विभिन्न पहलू अनुच्छेद 21 सहित संविधान में हैं, जो गरिमा का अधिकार है।'
बच्चे को गोद लेने के अधिकार के बारे में पूछे जाने पर नंदी ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति कौल ने समलैंगिक जोड़ों के गोद लेने के अधिकार पर बात की, और यह कुछ ऐसा है जो बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट इससे सहमत नहीं थे। वकील नंदी ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार की समिति यह सुनिश्चित करेगी कि नागरिक संघों को मान्यता दी जाए।
उन्होंने कहा, आज कुछ ऐसे अवसर थे जो मुझे लगता है कि कानून निर्माताओं को दिए गए हैं और केंद्र सरकार ने शादी के संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। हमें उम्मीद है कि उनकी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि नागरिक संघों को मान्यता दी जाए।
उन्होंने आगे कहा, मैं यह भी कहूंगी कि राज्यों में सत्ता में कांग्रेस और अन्य सरकारों के पास चिकित्सा निर्णय लेने के लिए एक साथी के अधिकारों की मान्यता को कानून के दायरे में लाने के कई अवसर हैं, क्योंकि वे स्वास्थ्य पर कानून बना सकते हैं, वे रोजगार को बिना भेदभाव के देख सकते हैं और बहुत कुछ किया जा सकता है। हमने जो भी सुना उसमें सर्वसम्मत यह था कि समलैंगिक नागरिकों के अधिकार हैं। समलैंगिक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और राज्य सरकारें उनकी रक्षा कर सकती हैं।