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टॉपर ने मुख्य न्यायाधीश के हाथों पदक लेने से किया था इनकार, अब यूनिवर्सिटी ने सफाई दी

Tue, 20 Aug 2019 02:14 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Tue, 20 Aug 2019 02:14 PM IST
सार

  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की टॉपर सुरभि करवा उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं, जिसमें उन्हें पदक दिया जाना था।
  • मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप निपटाने के तरीके से अंसुष्ट होकर सुरभि ने उनके हाथों पदक नहीं लिया।
  • विश्वविद्यालय ने कहा कि सुरभि की मुख्य न्यायाधीश से पदक नहीं लेने की खबरें गलत हैं।
  • विश्वविद्यालय ने कहा कि इससे संबंधित खबर गलत तथ्यों और सूचना पर आधारित थी।

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Response of University after its Topper refused the award at hands of the CJI 
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई - फोटो : File Photo

विस्तार

राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) की एलएलएम की टॉपर सुरभि करवा उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं, जिसमें उन्हें पदक दिया जाना था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप निपटाने के तरीके से असंतुष्ट होकर सुरभि ने उनके हाथों पदक नहीं लिया। जिसके बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर डॉ. जीएस वाजपेयी ने कहा कि दुर्भाग्य से वह यहां नहीं हैं। हम उन्हें अनुपस्थिति में पदक से सम्मानित कर रहे हैं।    

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इस मामले पर सोमवार को विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया आई, जिसमें उसने कहा है कि सुरभि की मुख्य न्यायाधीश से पदक नहीं लेने की खबरें गलत हैं। विश्वविद्यालय ने उन खबरों को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि एलएलएम की टॉपर ने दीक्षांत समारोह में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि वह मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के हाथों से स्वर्ण पदक नहीं लेना चाहती थी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि टॉपर सुरभि करवा ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव से पदक प्राप्त किया न कि प्रधान न्यायाधीश से। 
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एनएलयू के कुलपति ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "विश्वविद्यालय के रूप में हम इस घटना से दुखी हैं, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से प्रधान न्यायाधीश (रंजन गोगोई) को असुविधा हुई।" 
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विश्वविद्यालय ने कहा कि इससे संबंधित खबर गलत तथ्यों और सूचना पर आधारित थी। एलएलएम टॉपर को कोई पदक प्रधान न्यायाधीश द्वारा नहीं दिया गया न ही ऐसी कोई सूचना करवा सहित किसी छात्र को दी गई थी।  

सीजेआई को मिली थी क्लीनचिट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इसकी जांच तीन सदस्यीय इन-हाउस समिति को सौंपी गई। इस मामले में गोगोई को छह मई को क्लीनचिट दे दी गई थी। जिस महिला ने उनपर आरोप लगाया था वह 2018 में गोगोई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के पद पर थी।



महिला ने दावा किया था कि बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था। आरोप लगाने वाली महिला ने अपने एफिडेविट की कॉपी 22 जजों के पास भेजी थी। जिसके बाद कुछ वेब पोर्टल ने इसी आधार पर मुख्य न्यायाधीश के बारे में खबरें प्रकाशित की थीं।

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