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नारी शक्ति वंदन विधेयक: 'कानूनी आरक्षण नहीं, बल्कि दलों के भीतर हो महिलाओं को आरक्षण', अध्ययन में दावा
Wed, 20 Sep 2023 04:04 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 20 Sep 2023 04:04 PM IST
सार
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के ताजा अध्ययन के अनुसार, जिन देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व पुरुषों से ज्यादा है, वहां कोई कानूनी आरक्षण नहीं है बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर महिलाओं को आरक्षण दिया गया है।
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women reservation bill
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
संसद में विशेष सत्र के तीसरे दिन बुधवार को नारीशक्ति वंदन विधेयक, 2023 पर जमकर बहस हो रही है। पक्ष और विपक्ष दोनों महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर एक अध्ययन सामने आया है। अध्ययन के अनुसार, जिन देशों में महिला प्रतिनिधियों का अनुपात अधिक है, वहां कोटा अनिवार्य करने वाला कोई कानून नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर महिलाओं को आरक्षण दिया जाता है।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के एक विश्लेषण के अनुसार, जिन देशों में महिला प्रतिनिधित्व ज्यादा है, वहां महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अध्ययन पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि वहां राजनीतिक दल अपने पार्टी के भीतर महिलाओं को लिए आरक्षण प्रदान करते हैं।
महिलाओं का कहां कितना प्रतिनिधित्व ?
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अध्ययन के अनुसार, स्वीडन (46 प्रतिशत ), नॉर्वे (46 प्रतिशत), दक्षिण अफ्रीका (45 प्रतिशत ), ऑस्ट्रेलिया (38 प्रतिशत), फ्रांस (35 प्रतिशत) और जर्मनी (35 प्रतिशत) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व हैं।
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वहीं बांग्लादेश में 21 फीसदी महिलाएं सांसद हैं,जहां महिलाओं के लिए आरक्षण वाला कानून है। बांग्लादेश संसद की 300 सीटों में से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
अध्ययन का दावा, मतदाताओं की पसंद हो जाएंगी सीमित
अध्ययन में यह भी कहा गया कि संसद में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने से मतदाताओं की पसंद सीमित हो जाएगी। थिंक टैंक के अनुसार, विशेषज्ञ एक विकल्प के रुप में राजनीतिक दलों के भीतर आरक्षण या दोहरे सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों की प्रणाली का सुझाव देते हैं।
भारत में महिला प्रतिनिधियों की स्थिति
17वीं लोकसभा के कुल सदस्यों में से लगभग 15 प्रतिशत महिलाएं हैं। जबकि राज्य की विधानसभाओं में महिलाएं कुल सदस्यों का केवल औसतन नौ प्रतिशत हैं। वहीं, लगभग 13 प्रतिशत राज्यसभा सांसद महिलाएं हैं।
राजनीतिक दलों में महिला सांसदों की स्थिति
राजनीतिक दलों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बीजेडी के 42 प्रतिशत सांसद और टीएमसी के 39 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं। बीजेपी के पास 14 फीसदी और कांग्रेस में 12 फीसदी महिलाएं सांसद हैं। साथ ही, 2019 के लोकसभा चुनावों में, टीएमसी और बीजेडी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। पीआरएस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लोकसभा में 10 या अधिक सांसदों वाली पार्टियों में महिलाओं के जीतने की संभावना पुरुषों की तरह ही थी।
आपको बता दें नारीशक्ति वंदन विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। आरक्षण अगले परिसीमन के बाद प्रभावी होगा । यह आरक्षण 15 साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा।
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पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के एक विश्लेषण के अनुसार, जिन देशों में महिला प्रतिनिधित्व ज्यादा है, वहां महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अध्ययन पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि वहां राजनीतिक दल अपने पार्टी के भीतर महिलाओं को लिए आरक्षण प्रदान करते हैं।
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महिलाओं का कहां कितना प्रतिनिधित्व ?
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अध्ययन के अनुसार, स्वीडन (46 प्रतिशत ), नॉर्वे (46 प्रतिशत), दक्षिण अफ्रीका (45 प्रतिशत ), ऑस्ट्रेलिया (38 प्रतिशत), फ्रांस (35 प्रतिशत) और जर्मनी (35 प्रतिशत) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व हैं।
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वहीं बांग्लादेश में 21 फीसदी महिलाएं सांसद हैं,जहां महिलाओं के लिए आरक्षण वाला कानून है। बांग्लादेश संसद की 300 सीटों में से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
अध्ययन का दावा, मतदाताओं की पसंद हो जाएंगी सीमित
अध्ययन में यह भी कहा गया कि संसद में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने से मतदाताओं की पसंद सीमित हो जाएगी। थिंक टैंक के अनुसार, विशेषज्ञ एक विकल्प के रुप में राजनीतिक दलों के भीतर आरक्षण या दोहरे सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों की प्रणाली का सुझाव देते हैं।
भारत में महिला प्रतिनिधियों की स्थिति
17वीं लोकसभा के कुल सदस्यों में से लगभग 15 प्रतिशत महिलाएं हैं। जबकि राज्य की विधानसभाओं में महिलाएं कुल सदस्यों का केवल औसतन नौ प्रतिशत हैं। वहीं, लगभग 13 प्रतिशत राज्यसभा सांसद महिलाएं हैं।
राजनीतिक दलों में महिला सांसदों की स्थिति
राजनीतिक दलों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बीजेडी के 42 प्रतिशत सांसद और टीएमसी के 39 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं। बीजेपी के पास 14 फीसदी और कांग्रेस में 12 फीसदी महिलाएं सांसद हैं। साथ ही, 2019 के लोकसभा चुनावों में, टीएमसी और बीजेडी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। पीआरएस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लोकसभा में 10 या अधिक सांसदों वाली पार्टियों में महिलाओं के जीतने की संभावना पुरुषों की तरह ही थी।
आपको बता दें नारीशक्ति वंदन विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। आरक्षण अगले परिसीमन के बाद प्रभावी होगा । यह आरक्षण 15 साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा।