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अध्ययन: IMA की 46 इकाइयों में से केवल नौ की अध्यक्ष महिलाएं, चिकित्सा संघों में लैंगिक असमानता चिंता का विषय

Sat, 17 Aug 2024 11:43 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 17 Aug 2024 11:43 PM IST
सार

पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में लेखकों ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े चिकित्सा संघों जैसे प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल चिकित्सा और नवजात विज्ञान में भी असमान लिंग प्रतिनिधित्व जारी है, जो पुरुष प्रभुत्व को उजागर करता है।

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Report: Out of 46 associations IMA only nine presidents are women gender inequality matter concern
आईएमए अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन - फोटो : एएनआई

विस्तार

 भारत के सबसे बड़े और सबसे पुराने पेशेवर चिकित्सा संघ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के 46 इकाइयों में से केवल नौ का नेतृत्व वर्तमान में महिलाओं द्वारा किया जाता है। जबकि, 1928 में आईएमए की स्थापना के बाद से 92 व्यक्ति अध्यक्ष रहे हैं, इनमें से केवल एक महिला थी। 

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द जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, नई दिल्ली के शोधकर्ताओं की टीम ने भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संघ (आईपीएचए) और सभी व्यापक चिकित्सा और शल्य चिकित्सा विशिष्टताओं सहित पेशेवर चिकित्सा संघों के वर्तमान और पिछले नेतृत्व का अध्ययन किया। पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में लेखकों ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े चिकित्सा संघों जैसे प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल चिकित्सा और नवजात विज्ञान में भी असमान लिंग प्रतिनिधित्व जारी है, जो पुरुष प्रभुत्व को उजागर करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, उदाहरण के लिए, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम की नेतृत्व समिति में केवल एक महिला है और भारत के 73 वर्षों के इतिहास में फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज में, केवल 15 प्रतिशत पिछले अध्यक्ष महिलाएं थीं।
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आईएमए के उप-अध्यायों को देखते हुए, जो 28 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय समूहों या शाखाओं का हिस्सा हैं, लेखकों ने पाया कि वर्तमान में आईएमए के 32 उप-अध्यायों के अध्यक्ष और सचिव के रूप में कार्यरत 64 व्यक्तियों में से केवल तीन (4.6 प्रतिशत) महिलाएं हैं।
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शोधकर्ताओं ने कहा कि परिणाम वैश्विक अध्ययनों के अनुरूप हैं जो एक 'लीक पाइपलाइन' का खुलासा करते हैं- भले ही पहले से कहीं अधिक महिलाएं चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं, लेकिन बहुत कम महिलाएं नेतृत्व की स्थिति तक पहुंच पाती हैं। उन्होंने आगाह किया कि पेशेवर चिकित्सा संघों के बीच विषम लिंग अनुपात एक बड़ी चिंता का विषय है। कहा कि चिकित्सा संघों में लैंगिक असमानताओं को दूर करने के लिए ठोस प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है।


निष्कर्षों पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, मुझे नहीं लगता कि यह सच है। ये संगठन आईएमए के अधीन नहीं है। वे ऊर्ध्वाधर, विशेष संगठन है। आईएमए तीन स्तरों वाला है और आपको पूरे भारत की स्थानीय शाखाओं, शहरों और कस्बों में महिला अध्यक्ष और सचिव मिलेंगे। उन्होंने कहा, अपने काम की प्रकृति के कारण, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ, जो गृहिणी भी हैं, देश भर में यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं। राज्य स्तर पर आईएमए मुख्यालय में शीर्ष पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व है।

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