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Report: देश के 46% लोग कृषि से जुड़े, जीडीपी में हिस्सा महज 18 फीसदी... इसके लिए खराब स्थितियां जिम्मेदार

Tue, 26 Nov 2024 05:08 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 26 Nov 2024 05:08 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रमिकों का मौजूदा आवास अक्सर अनौपचारिक होते हैं, जिनमें अवैध या घटिया बस्तियां शामिल होती हैं जो जरूरी सुविधाओं, पैमाने और गुणवत्ता को पूरा करने में विफल रहती हैं। ये खराब स्थितियां श्रमिकों को औद्योगिक समूहों के करीब स्थानांतरित होने से हतोत्साहित करती हैं, जिससे श्रम आपूर्ति की चुनौती बनी रहती है। 
 

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Report 46 percent Indian people involved in agriculture then only 18 percent share in GDP poor conditions
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत को एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। देश का 46 प्रतिशत कार्यबल कृषि में लगा हुआ है, लेकिन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान केवल 18 प्रतिशत का ही है।

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फाउंडेशन फॉर इकनॉमिक डेवलपमेंट रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक पैमाने पर अकुशल लोगों को भी अपने क्षेत्र में शामिल करने में सक्षम है। रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और सेवाओं में नौकरियां कृषि क्षेत्र की तुलना में तीन से छह गुना अधिक उत्पादक हैं और यह कार्यरत लोगों को उच्च उत्पादकता वाली भूमिकाओं में बदलने की क्षेत्र की क्षमता को रेखांकित करती हैं। विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियों के लिए केंद्र के रूप में कार्य करने वाले औद्योगिक क्लस्टर को आसपास के कस्बों और गांवों की तुलना में अधिक लोगों की जरूरत होती है। हालांकि, इन समूहों के पास पर्याप्त श्रमिक आवास की कमी एक प्रमुख बाधा के रूप में उभरी है, जिससे श्रमिकों की कमी और उत्पादकता में गिरावट आ रही है। यह कमी विनिर्माण निर्यात में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को सीमित करने की भारत की क्षमता को भी बाधित करती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रमिकों का मौजूदा आवास अक्सर अनौपचारिक होते हैं, जिनमें अवैध या घटिया बस्तियां शामिल होती हैं जो जरूरी सुविधाओं, पैमाने और गुणवत्ता को पूरा करने में विफल रहती हैं। ये खराब स्थितियां श्रमिकों को औद्योगिक समूहों के करीब स्थानांतरित होने से हतोत्साहित करती हैं, जिससे श्रम आपूर्ति की चुनौती बनी रहती है।
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नियमों से परियोजनाओं में होती है देरी
रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डिंगों के बोझिल नियम लागत बढ़ाते हैं और परियोजनाओं में देरी करते हैं। साथ ही, जीएसटी और वाणिज्यिक संपत्तियों की दरों सहित उच्च परिचालन शुल्क से निवेश बाधित होता है। इस तरह की चुनौतियों का तेजी से समाधान करने की जरूरत है। इसमें सभी क्षेत्रों में श्रमिक आवास को मंजूरी देने, लागत और देरी को कम करने के लिए बिल्डिंग के नियमों को सरल बनाने और श्रमिक आवास को जीएसटी और अन्य वाणिज्यिक संपत्ति शुल्क से छूट देने की जरूरत है।  


श्रमिक आवास में निवेश करना होगा आसान
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इन उपायों से निजी क्षेत्र के लिए श्रमिक आवास में निवेश करना आसान हो जाएगा। प्रस्तावित सिफारिशों के अनुसार, श्रमिकों के लिए आवास निर्माण के लिए रियायती और किराये के वाउचर के रूप में सरकारी वित्तीय सहायता प्रमुख भूमिका निभा सकती है।

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