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कोयला घोटाला: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी क्लीन चिट
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 21 May 2017 07:37 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोल ब्लॉक घोटाले में दोषी साबित हो चुके पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सामने सही स्थिति नहीं रखी थी। अदालत ने कहा है कि मनमोहन के पास यह मानने का कोई कारण नहीं था कि मध्य प्रदेश में जिस कंपनी को कोयला खदान आवंटित करने के लिए कहा जा रहा है, उसने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया है।
इस मामले में सुनवाई कर रही विशेष अदालत के जज भरत पाराशर ने कहा कि पूर्व पीएम मान कर चल रहे थे उनकी सरकार के कोयला सचिव गुप्ता ने उन्हें सही जानकारी दी होगी। गुप्ता ने कमल स्पांज स्टील एंड पावर लिमिटेड को मध्य प्रदेश के थेसगोड़ा-बी में रुद्रपुरी कोल ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी। पराशर ने कहा कि गुप्ता ने मनमोहन सिंह के सामने ईमानदारी से तथ्य नहीं रखे। उन्होंने कहा कि पूर्व पीएम के सामने यह मानने की कोई वजह नहीं थी कि कोल ब्लॉक आवंटन के लिए कंपनी की योग्यता की जांच मंत्रालय में नहीं हुई होगी। या आवेदन पूर्ण नहीं होगा।
पीएम के सामने अनुमति के लिए आवेदन भेजते वक्त, इस बात का जिक्र नहीं किया गया था कि मंत्रालय ने इस बात की जांच नहीं की है कि कंपनी कोल ब्लॉक हासिल करने की योग्यता रखती है या नहीं। गौरतलब है कि पीएम के पास कोयला मंत्रालय भी था। एचसी गुप्ता 31 दिसंबर 2005 से लेकर नवंबर 2008 तक कोयला सचिव थे। उन्हें तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और कोयला मंत्रालय में निदेशक के सी समारिया के साथ कंपनियों को गलत ढंग से कोल ब्लॉक आवंटित क राने का दोषी ठहराया गया था।
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इस मामले में सुनवाई कर रही विशेष अदालत के जज भरत पाराशर ने कहा कि पूर्व पीएम मान कर चल रहे थे उनकी सरकार के कोयला सचिव गुप्ता ने उन्हें सही जानकारी दी होगी। गुप्ता ने कमल स्पांज स्टील एंड पावर लिमिटेड को मध्य प्रदेश के थेसगोड़ा-बी में रुद्रपुरी कोल ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी। पराशर ने कहा कि गुप्ता ने मनमोहन सिंह के सामने ईमानदारी से तथ्य नहीं रखे। उन्होंने कहा कि पूर्व पीएम के सामने यह मानने की कोई वजह नहीं थी कि कोल ब्लॉक आवंटन के लिए कंपनी की योग्यता की जांच मंत्रालय में नहीं हुई होगी। या आवेदन पूर्ण नहीं होगा।
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पीएम के सामने अनुमति के लिए आवेदन भेजते वक्त, इस बात का जिक्र नहीं किया गया था कि मंत्रालय ने इस बात की जांच नहीं की है कि कंपनी कोल ब्लॉक हासिल करने की योग्यता रखती है या नहीं। गौरतलब है कि पीएम के पास कोयला मंत्रालय भी था। एचसी गुप्ता 31 दिसंबर 2005 से लेकर नवंबर 2008 तक कोयला सचिव थे। उन्हें तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और कोयला मंत्रालय में निदेशक के सी समारिया के साथ कंपनियों को गलत ढंग से कोल ब्लॉक आवंटित क राने का दोषी ठहराया गया था।
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