{"_id":"6994f59e94991be0ee0a8293","slug":"rashtriya-swayamsevak-sangh-advice-to-assam-bjp-unit-for-third-election-win-2026-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: 'विकास को बनाएं मुद्दा', जीत की हैट्रिक के लिए असम भाजपा इकाई को संघ की सलाह","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: 'विकास को बनाएं मुद्दा', जीत की हैट्रिक के लिए असम भाजपा इकाई को संघ की सलाह
Wed, 18 Feb 2026 04:41 AM IST
निर्मल कांत
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 18 Feb 2026 04:41 AM IST
सार
RSS: जीत की हैट्रिक को लेकर आरएसएस ने भाजपा की असम इकाई को सतर्क किया है और सलाह दी है कि विकास को चुनाव का केंद्र बनाना चाहिए, न कि सांप्रदायिक मामलों को। पार्टी को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सीधे संवाद और बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। पढ़ें रिपोर्ट-
विज्ञापन
अरुण कुमार
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
असम में भाजपा को जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संघ ने राज्य इकाई को सांप्रदायिक मामलों को अतिरंजित करने से बचने और बीते दो कार्यकाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास को विधानसभा चुनाव के केंद्र में रखने की सलाह दी है।
संघ ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी तैयारियों और प्रबंधन पर नाखुशी जाहिर करते हुए इन क्षेत्रों में सीधा संवाद शुरू करने की भी जरूरत बताई है। गौरतलब है कि ये सलाह बीते दिनों सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की संघ की अनुषांगिक संगठनों के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद दी गई है। इस बैठक में भाजपा की चुनावी तैयारियों और प्रबंधन पर अनुषांगिक संगठनों का फीड बैक लिया गया। इसमें ये तथ्य उभर कर आए कि लगातार सत्ता के दो कार्यकाल मिलने के बावजूद राज्य में सरकार की उपलब्धियों पर अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव पूरी तरह से हावी हो रहे हैं। संघ का मानना है कि पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम में ये दोनों मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, इन पर निरंतरता में बात होनी चाहिए, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार के दो कार्यकाल की उपलब्धियां ही गौण हो जाएं। वह भी इस स्थिति में जब असम समेत पूरे पूर्वोत्तर ने बीते एक दशक में विकास के नए आयाम गढ़े हैं।
एंटी इन्कम्बेंसी से निपटने की योजना: चूंकि राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बीते दस वर्षों से सत्ता में है, ऐसे में पार्टी के सामने एंटी इन्कम्बेंसी भी बड़ी चुनौती है। इसके लिए ढाई दर्जन जीती हुई सीटों की पहचान की गई है, जहां उम्मीदवार बदले जाने हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा, हिमंत सरकार ने महिला वर्ग को साधने के लिए पहले ही नकद भुगतान योजना चला रखी है।
ये भी पढ़ें: गांधीनगर में शिवाजी महाराज की 21 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, शाह बोले- पीएम मोदी ने साकार किया सपना
एक ही फेज में चुनाव की तैयारी: असम में मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित होंगे। योजना अप्रैल महीने में एक ही फेज में कराने की है। भाजपा की योजना चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पूर्व उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने की है। इस क्रम में पार्टी ने अस्सी से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया है।
शहर केंद्रित प्रचार और प्रबंधन पर जताई चिंता: संघ ने पार्टी का चुनाव प्रचार और प्रबंधन शहरों तक ही केंद्रित हो जाने पर चिंता जताई है। फीडबैक में सामने आया कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सरकार और संगठन का सीधा संवाद का मैकेनिज्म बेहद कमजोर है। इसके अलावा संगठन और सरकार के बीच भी संवाद में कमी महसूस की गई। बैठक में मिले फीडबैक को प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ साझा करते हुए संघ ने राज्य इकाई को कई सलाह दिए हैं।
विज्ञापन
संघ ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी तैयारियों और प्रबंधन पर नाखुशी जाहिर करते हुए इन क्षेत्रों में सीधा संवाद शुरू करने की भी जरूरत बताई है। गौरतलब है कि ये सलाह बीते दिनों सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की संघ की अनुषांगिक संगठनों के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद दी गई है। इस बैठक में भाजपा की चुनावी तैयारियों और प्रबंधन पर अनुषांगिक संगठनों का फीड बैक लिया गया। इसमें ये तथ्य उभर कर आए कि लगातार सत्ता के दो कार्यकाल मिलने के बावजूद राज्य में सरकार की उपलब्धियों पर अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकी बदलाव पूरी तरह से हावी हो रहे हैं। संघ का मानना है कि पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम में ये दोनों मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, इन पर निरंतरता में बात होनी चाहिए, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार के दो कार्यकाल की उपलब्धियां ही गौण हो जाएं। वह भी इस स्थिति में जब असम समेत पूरे पूर्वोत्तर ने बीते एक दशक में विकास के नए आयाम गढ़े हैं।
विज्ञापन
एंटी इन्कम्बेंसी से निपटने की योजना: चूंकि राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बीते दस वर्षों से सत्ता में है, ऐसे में पार्टी के सामने एंटी इन्कम्बेंसी भी बड़ी चुनौती है। इसके लिए ढाई दर्जन जीती हुई सीटों की पहचान की गई है, जहां उम्मीदवार बदले जाने हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा, हिमंत सरकार ने महिला वर्ग को साधने के लिए पहले ही नकद भुगतान योजना चला रखी है।
ये भी पढ़ें: गांधीनगर में शिवाजी महाराज की 21 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, शाह बोले- पीएम मोदी ने साकार किया सपना
एक ही फेज में चुनाव की तैयारी: असम में मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित होंगे। योजना अप्रैल महीने में एक ही फेज में कराने की है। भाजपा की योजना चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पूर्व उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने की है। इस क्रम में पार्टी ने अस्सी से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया है।
शहर केंद्रित प्रचार और प्रबंधन पर जताई चिंता: संघ ने पार्टी का चुनाव प्रचार और प्रबंधन शहरों तक ही केंद्रित हो जाने पर चिंता जताई है। फीडबैक में सामने आया कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सरकार और संगठन का सीधा संवाद का मैकेनिज्म बेहद कमजोर है। इसके अलावा संगठन और सरकार के बीच भी संवाद में कमी महसूस की गई। बैठक में मिले फीडबैक को प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के साथ साझा करते हुए संघ ने राज्य इकाई को कई सलाह दिए हैं।