डेल्टा प्लस वैरिएंट: आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक इसे बताया बेहद गंभीर, कही ये बात
आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट काफी तेजी से फैला। उन्होंने आगे कहा कि अगर डेल्टा वैरिएंट को लेकर वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में देखा जाता है तो डेल्टा प्लस को भी इसी श्रेणी में देखा जाना चाहिए।
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देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट के ताजा मामले बढ़ते जा रहे हैं और धीरे-धीरे ये नया वैरिएंट देश के कई राज्यों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर जानकारों का कहना है कि चिंता की बात नहीं है, क्योंकि इस पर भारत में इस्तेमाल की जाने वाली दोनों वैक्सीन असरदार हैं।
हालांकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पूर्व वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा गया है और यह वैरिएंट बहुत तेजी से फैला है। उन्होंने आगे कहा कि अगर डेल्टा वैरिएंट चिंता का विषय है तो डेल्टा प्लस वैरिएंट को भी इसी श्रेणी के तौर पर देखना चाहिए।
When I said #DeltaVariant can go for cell to cell transfer, what does it mean in terms of damage to organs? If it goes into brain, what will happen? It's more likely to produce neurological symptoms as common manifestation: Raman Gangakhedkar, ex-Head Scientist, ICMR pic.twitter.com/2q1Rv1AL7Y
— ANI (@ANI) June 26, 2021
उन्होंने आगे कहा कि जब डेल्टा वैरिएंट कोशिकाओं से कोशिकाओं तक पहुंचता है तो अंगो को नुकसान के संदर्भ में इसका क्या मतलब है? उन्होंने आगे कहा कि अगर ये दिमाग तक पहुंच गया तो इसका क्या मतलब होगा? उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा होता है तो इससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण ज्यादा पैदा होंगे।
आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने आगे कहा कि ये निर्भर करता है कि मैं शरीर के किस अंग की बात कर रहा हूं। उन्होंने आगे कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट उन अंगों को विशेष तौर पर नुकसान पहुंचाएगा, अगर यह सच साबित होता है कि यह मुख्य पैथाफिजियोलॉजिकल परिवर्तन का कारण बन रहा है और अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर रहा है।