राम जेठमलानी: 17 साल की उम्र में शुरू की थी प्रैक्टिस, रिफ्यूजी कैंप में काटे थे कई दिन
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने रविवार को अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। देश के सबसे बड़े और मंहगे वकील होने के साथ ही वर्तमान में वह राज्यसभा सांसद भी थे। उन्हें 2016 में राष्ट्रीय जनता दल ने राज्यसभा भेजा था। वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कानून मंत्री कि जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मुंबई लोकसभा सीट से वह दो बार भाजपा सांसद रह चुके हैं। वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
17 साल की उम्र में बने वकील
जेठमलानी एक ऐसे वकील थे जो किसी पहचान के मोहताज नहीं थे। उन्होंने कई बड़े केस लड़े हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में ही कानून की डिग्री हासिल कर ली थी और 18 की उम्र में प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। हालांकि उस समय नियमानुसार 21 साल की उम्र से ही प्रैक्टिस की जा सकती थी लेकिन उन्हें छूट मिली और वह 18 की उम्र में वकील बनकर कराची में पैरवी करने लगे। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो वह परिवार के साथ मुंबई आ गए और यहां उन्होंने एक नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू की।
रिफ्यूजी कैंप में बिताए कई दिन
18 साल की उम्र में उनकी शादी दुर्गा से हुई थी और बाद में उन्होंने रत्ना सहानी से दूसरी शादी की। रत्ना खुद एक वकील थीं और दोनों ने 1952 में शादी की। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। जिसमें से महेश जेठमलानी और स्वर्गीय रानी जेठमलानी भी मशहूर वकील हैं। विभआजन से पहले राम जेठमलानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में वकील और प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थे। विभाजन के बाद जब दंगे हुए तो अपने दोस्त की सलाह पर वह भारत आए थे। उन्होंने कई दिन रिफ्यूजी कैंप में बिताए और उस समय उनकी जेब में केवल एक पैसे का सिक्का था।
भाजपा के टिकट पर बने सांसद
छठवीं और सातवीं लोकसभा में वह भाजपा के टिकट पर मुंबई से सांसद चुने गए। स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में उन्होंने कानून और शहरी विकास मंत्री का कार्यभार संभाला था। हालांकि 2004 में उन्होंने वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। वह बेशक आपराधिक मामलों के वकील थे लेकिन वह भारत के कानूनी समुदाय का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। वह संवैधानिक मामलों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में मौजूद रहे हैं। सात मई 2010 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था।
आपकी उम्रसे ज्यादा मेरी वकालत का अनुभव
अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले राम जेठमलानी कई बार न्यायाधीशों से यह तक कह देते थे कि आपकी उम्र से ज्यादा तो मेरा वकालत का अनुभव है। उनकी इस बात का कोई बुरा नहीं मानता था। उन्होंने कानून के विषय पर कई किताबें लिखी हैं। नलिन गेरा और सुसान एडेलमेन ने उनकी आत्मकथा लिखी है जिनके नाम हैं- राम जेठमलानी: एन अनऑथॉराइज्ड बायोग्राफी और द रीबेल