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Hindi News ›   India News ›   Rajya Sabha Election 2022: Voting will be held on June 10 on 16 seats out of 57 seats

Rajya Sabha Election: डर है कहीं 'ईमान' न डोल जाए, ऐसे में तो 'रिजॉर्ट' भी नहीं कर पाएंगे विधायकों के 'भरोसे' की पहरेदारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 09 Jun 2022 04:12 PM IST
सार

संविधान विशेषज्ञ तथा दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा, जो दिल्ली में राज्यसभा का चुनाव करा चुके हैं, वे बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव में ऐसी संभावना तो बनी रहती है कि कौन किस तरफ झुक जाए। सभी दल अपने-अपने तरीके से जोर लगाते हैं। इस चुनाव में पेन का बहुत महत्व होता है...

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Rajya Sabha Election 2022: Voting will be held on June 10 on 16 seats out of 57 seats
विधायकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का किया गया है आयोजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यसभा चुनाव में अब महज 24 घंटे शेष बचे हैं। दस जून को वोटिंग होगी और परिणाम भी उसी दिन आ जाएगा। हालांकि 57 सीटों में से चुनाव, केवल 16 सीटों पर ही होगा। बाकी बची 41 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। 16 सीटों में से महाराष्ट्र की छह सीट, राजस्थान व कर्नाटक की चार-चार सीट और हरियाणा में दो सीटों पर मतदान होगा। इनमें से कोई भी राज्य ऐसा नहीं है, जहां राजनीतिक पेंच न फंसा हो। इन राज्यों में क्रॉस वोटिंग या स्याही कांड जैसा कुछ भी संभावित है। मौजूदा परिस्थितियों में राजनीतिक दलों को 'विधायकों' के ईमान के डोलने का डर सता रहा है। कुछ सीटों पर तो मुकाबला इतना कड़ा है कि उनकी रिजॉर्ट या होटल पॉलिटिक्स भी विधायकों के भरोसे की पहरेदारी नहीं कर पाएगी।

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राजनीतिक दलों को सता रहा ‘सेंध’ का डर

तकरीबन सभी राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार या समर्थकों को राज्यसभा में पहुंचाने के लिए बाड़ेबंदी कर ली है। इसके बावजूद पार्टियां और उनके प्रत्याशी चिंतित हैं। उन्हें डर है कि दूसरे दल या निर्दलीय उम्मीदवारों ने कहीं उनके विधायकों में सेंध तो नहीं लगा दी है। ये डर तो तब है, जब विधायकों को किसी सुरक्षित जगह यानी रिजॉर्ट में रखा गया है। वहां पर जितने भी विधायक ठहरे हैं, उनके ईमान को लेकर भी पार्टियां आशंकित हैं। भले ही विधायक उनके कहने पर रिर्सोट में ठहरे हैं, लेकिन मतदान के वक्त पता नहीं क्या हो जाए, यह बात राजनीतिक दलों, उनके नेताओं व उम्मीदवारों को खूब परेशान कर रही है।

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चुनाव में पेन और स्याही बिगाड़ सकती है खेल

संविधान विशेषज्ञ तथा दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा, जो दिल्ली में राज्यसभा का चुनाव करा चुके हैं, वे बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव में ऐसी संभावना तो बनी रहती है कि कौन किस तरफ झुक जाए। सभी दल अपने-अपने तरीके से जोर लगाते हैं। इस चुनाव में पेन का बहुत महत्व होता है। जो पेन मतदान के वक्त रखा गया है, सभी विधायकों को वही पेन इस्तेमाल करना होता है। विधायकों को यह भी देखना पड़ता है कि पेन किसी ने बदल तो नहीं दिया है। अगर पेन वही है तो क्या उसकी स्याही तो नहीं बदली गई। ऐसा भी हो सकता है कि किसी राजनीतिक समीकरण के चलते कोई विधायक वोट डालने के बाद उसे सार्वजनिक कर दे। ऐसे में उसका वोट रद्द हो जाता है। अमूमन, ऐसा तभी होता है कि जब कहीं पर नेक टू नेक फाइट हो। यानी एक ही वोट के इधर उधर होने से सारा खेल बिगड़ जाता हो। जो विधायक रिजॉर्ट या होटल में नहीं ठहरे हैं, उनमें से कोई अचानक बीमार होकर मतदान से अनुपस्थित रह सकता है।  

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कांग्रेस पार्टी के 14 विधायक खा गए थे गच्चा

साल 2016 में हरियाणा का राज्यसभा चुनाव चर्चित रहा था। सुभाष चंद्रा, जो अब राजस्थान से राज्यसभा में आने की जुगत भिड़ा रहे हैं, उस दौरान वे हरियाणा से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़े थे। खास बात है कि उस वक्त सुभाष चंद्रा के पास पर्याप्त संख्या में विधायक नहीं थे, लेकिन उन्होंने जीत दर्ज कराई। कांग्रेस और इनेलो ने सुप्रीम कोर्ट के वकील आरके आनंद को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। कांग्रेस पार्टी के 14 विधायकों के वोट गलत पेन इस्तेमाल करने के कारण रद्द हो गए थे। किसी ने बड़ी चालाकी से बैंगनी स्याही वाले पेन की जगह नीली स्याही वाला पेन रख दिया। कांग्रेसी विधायकों ने उसी पेन से वोट कर दिया। बाद में पता चला कि उनके वोट तो रद्द हो गए हैं। इस तरह से सुभाष चंद्रा जीत गए थे।

इस बार दी गई विधायकों को ट्रेनिंग …

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता, जो अब भूपेंद्र हुड्डा खेमे में माने जाते हैं, उका कहना है कि इस बार गलती की गुंजाइश नहीं है। हालांकि उन्होंने पिछले चुनाव की गलती को महज इत्तेफाक बताया है। उनका कहना है कि इस बार स्याही कांड न हो, इसके लिए विधायकों को ट्रेनिंग दी गई है। स्याही के साथ साथ पेन के रंग का भी ध्यान रखा जाएगा। वोट डालने के बाद विधायकों से स्याही और पेन का रंग पूछा जाएगा। हरियाणा के जो विधायक रायपुर के रिजॉर्ट में ठहरे हैं, वे सभी फ्लाइट के जरिए सीधे चंडीगढ़ पहुंचेंगे। कुलदीप बिश्नोई और किरण चौधरी रिजॉर्ट में नहीं गए हैं। उक्त नेता का कहना है कि इस बार तकरीबन सभी राज्यों में दूसरे व तीसरे उम्मीदवार का पेंच फंस रहा है। पहली वरियता वाले सभी उम्मीदवार जीत जाएंगे। क्रॉस वोटिंग, मतदान से अनुपस्थित रहना या अन्य कोई दूसरा तरीका, जिससे वोट रद्द हो जाए, ये सब तरीके दूसरे व तीसरे क्रम वाले उम्मीदवारों के मामले में इस्तेमाल हो सकते हैं।


 

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