फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rajya Sabha deputy chairman election is a litmus test of Opposition parties and pm narendra modi

राज्यसभा चुनाव से खुलेगी पक्ष और विपक्ष की पोल- नजर आएगा शह और मात का खेल

Wed, 08 Aug 2018 07:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Aug 2018 07:52 PM IST
विज्ञापन
Rajya Sabha deputy chairman election is a litmus test of Opposition parties and pm narendra modi
rajyasabha
लोकसभा चुनाव से पहले राज्यसभा उपसभापति का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमितशाह की जोड़ी  के खिलाफ विपक्षी एकता का सबसे बड़े टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है। इस पद के लिए एनडीए से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह, वहीं, विपक्ष की ओेर से कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद मैदान में हैं।
विज्ञापन


राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए बहुमत के आंकड़े से दूर है जबकि विपक्ष के सभी दलों को मिलाकर बहुमत के लिए पर्याप्त सीटें मौजूद हैं। अब अगर कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद किसी भी कारणवश यह चुनाव हार जाते हैं तो पीएम मोदी के खिलाफ बनी कथित विपक्षी एकता की पोल खुल जाएगी और लोकसभा चुनाव में इस एकता का क्या हश्र होने जा रहा है यह भी पता चल जाएगा। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें:  राज्यसभा उपसभापति पद चुनाव का क्या है गणित? हरिवंश और हरिप्रसाद के बीच मुकाबला
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि हाल ही में सेवानिवृत्त हुए उपसभापति पी जे कुरियन का कार्यकाल पिछले महीने यानी जुलाई में समाप्त हो गया था। 245 सदस्यीय राज्यसभा में इस समय 244 सदस्य हैं जबकि 1 सीट खाली है। मौजूदा 244 सदस्यीय उच्च सदन में उपसभापति चुनाव को जीतने के लिए 123 मतों की जरूरत होगी। ऐसे में एनडीए और यूपीए दोनों पक्ष बहुमत के आंकड़े से दूर हैं।  

सत्ताधारी एनडीए के राज्यसभा में 100 सांसद हैं। इनमें बीजेपी के 73 , शिवसेना के 3, बोडो पीपुल्स फ्रंट के पास 1, जेडीयू के 6,  आरपीआई (ए) के 1, शिरोमणि अकाली दल के 3, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 1, नामांकित सदस्य 4, 3 अन्य और निर्दलीय 6 सदस्य शामिल हैं।  
 
यह भी पढ़ें: बलिया के रहने वाले हरिवंश नारायण का पत्रकार से नेता बनने तक का ऐसा रहा है सफर

विपक्ष के सभी दलों की संख्या को देखते हैं तो ये आंकड़ा 144 पहुंचता है। इनमें कांग्रेस के 50,  बीएसपी के 4, टीएमसी के 13, सीपीआई के 2, सीपीएम के 5, डीएमके के 4, इंडियन मुस्लिम लीग के 1, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस के 1, एनसीपी के 4, आरजेडी के 5, एसपी के 13, टीडीपी के 6, एआईएडीएमके के 13, बीजू जनता दल के 9, इंडियन नेशनल लोकदल के 1, पीडीपी के 2, टीआरएस के 6, वाईएसआर कांग्रेस के 2 और आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य शामिल हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को मैदान में उतारकर विपक्ष की एकता का लिटमस टेस्ट कर रहा है। इस चुनाव के बाद ही विपक्ष की तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन-कौन से दल पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस के साथ खड़े रहते हैं और कौन से नहीं।  

चल रही है जोड़तोड़ की राजनीति

चुनाव के मद्देनजर एनडीए और यूपीए दोनों ही पार्टियों में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। एनडीए अपना कुनबा संभालने के साथ-साथ विपक्ष के दलों से भी समर्थन जुटाने में लगा है। देखने में आ रहा है कि अभी तक एनडीए से जुड़े सभी सहयोगी दल हरिवंश सिंह के समर्थन में पूरी मुस्तैदी से खड़े हैं यही नहीं राजनीति में गहरी पैठ रखने वालों का मानना है कि एनडीए विपक्ष की एकता में सेंध लगाने में भी कामयाब होता दिख रहा है।
 
यह भी पढ़ें: राज्यसभा उपसभापति चुनाव में बीके हरिप्रसाद होंगे कांग्रेस के उम्मीदवार

लेकिन अगर सिर्फ इस चुनाव पर नजर लगाएं तो पाएंगे कि सत्तापक्ष की तुलना में विपक्ष अधिक ताकतकर है, लेकिन जिस तरह से विपक्ष में एकता की कमी देखी जाती रही है यहां भी देखने को मिल रही है। सभी दल कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में खड़े होते नहीं दिख रहे। इसी बीच टीडीपी ने कांग्रेस को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है लेकिन केसीआर की पार्टी टीआरएस और नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी ने जिस तरह से ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना मुश्किल नजर आ रहा है। इसी तरह से एआईएडीएमके भी कांग्रेस के साथ आती दिखाई नहीं दे रही है। 

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य हैं लेकिन जिस तरह से केजरीवाल का दोनों ही पार्टियों से छत्तीस का आंकड़ा रहा है ऐसे में आप किस करवट बैठने जा रही है वह तय करना मुश्किल है। पार्टी नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि उपसभापति चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को समर्थन के लिए हमारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से बात करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें ही इसपर फैसला करना है।

कांग्रेस जुटा रही  है समर्थन  

हालांकि कांग्रेस ने भी विपक्ष दलों से समर्थन के लिए बातचीत शुरू कर दी है। बीके हरिप्रसाद खुद और कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद से लेकर अशोक गहलोत तक विपक्ष दलों से समर्थन जुटाने में लगे हैं। बावजूद इसके बीजेडी, टीआरएस जैसे दल एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।

विपक्षी दलों में इस तरह सेंध लगती रही तो कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद का जीत पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। बीके हरिप्रसाद की हार के साथ विपक्षी एकता की जो बात लगातार की जा रही है, उसकी भी पोल खुल जाएगी।

 

Rajya Sabha deputy chairman election is a litmus test of Opposition parties and pm narendra modi
harivansh narayan - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद
बीके हरिप्रसाद का जन्म 29 जुलाई 1954 को कर्नाटक में हुआ था। 1991 में शादी के बंधन में बंधे प्रसाद की एक बेटी है। उन्होंने अपनी पढ़ाई बंगलूरू से पूरी की है। 1972 में वो कांग्रेस के सदस्य बने। 2006 में वो कांग्रेस के महासचिव बने और अबतक इस पद पर बरकरार हैं।

साल 1990 में वो पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए और वर्तमान वो संसद के इस ऊपरी सदन के सदस्य हैं। वो कांग्रेस की कई अन्य समितियों और सेवा दल के प्रमुख पदों पर रहे हैं। वहीं वो कांग्रेस की सरकार के दौरान भी कई समितियों के प्रमुख पदों पर रहे हैं।

बीजेपी के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह 

बिहार के प्रतिष्ठित अखबार प्रभात खबर के पूर्व संपादक रहे हरिवंश जेडीयू के महासचिव है। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरिवंश ने आज नामांकन कर दिया हैं। हरिवंश ढाई दशक से अधिक समय तक प्रभात खबर के प्रधान संपादक रहे है। बीजेपी हरिवंश को उम्मीदवार बनाकर कई राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। 

यह भी पढ़ें: राज्यसभा उपसभापति चुनाव: बीजेडी के हाथ में जीत-हार की चाबी, अपना गणित बैठाने में लगी कांग्रेस-बीजेपी

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश को जेपी आंदोलन से काफी प्रभावित माने जाते हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई करने वाले हरिवंश ने अपने कैरियर की शुरुआत टाइम्स समूह से की थी।

दिल्ली से लेकर पटना तक मीडिया में नीतीश कुमार की बेहतर छवि बनाने में हरिवंश का बड़ा योगदान है। हरिवंश राजपूत जाति से आते हैं। एनडीए हरिवंश के सहारे बिहार में राजपूत वोट बैंक को अपना ओर खींचने की कोशिश में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed