राज्यसभा उपसभापति चुनाव: बीजेडी के हाथ में जीत-हार की चाबी, अपना गणित बैठाने में लगी कांग्रेस-बीजेपी
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9 अगस्त को होने वाले राज्यसभा उपसभापति चुनाव के लिए सरकार और विपक्ष के बीच जोर आजमाइश शुरू हो गई है। इस पद को विपक्ष के पाले में जाने से रोकने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाल ली है। इसी क्रम में उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की। चुनाव में नौ सदस्यों वाली बीजेडी के पास ही हार-जीत की चाबी है।
ओडिशा में बीजेडी का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस से है, इसलिए भाजपा और कांग्रेस ने इस चुनाव में बीजेडी को साधने के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। बीजेडी ने अगर मतदान के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने का फैसला किया तो भाजपा का गणित गड़बड़ा जाएगा। बीजेडी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि राज्य में दोनों दल हमारे प्रतिद्वंद्वी हैं। चूंकि सूबे में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही होंगे, ऐसे में किसी एक पक्ष में जाने का फैसला बेहद उलझन भरा होगा।
हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला सीएम पटनायक ही करेंगे। उपसभापति का चुनाव 9 अगस्त को होगा। राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल इस साल जून में पूरा हो गया है। 10 अगस्त को समाप्त होने वाले मानसून सत्र में सभापति ने उपसभापति चुनाव के लिए 9 अगस्त का दिन तय किया है।
तेज हुआ मोदी-शाह का संपर्क अभियान
उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी राजग के नाराज दलों के साथ-साथ दूसरे दलों को साधने में जुट गए हैं। राजग ने इस पद के लिए जदयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह अपना उम्मीदवार बनाया है। वह बुधवार को नामांकन करेंगे। मंगलवार को इस मामले पर सबसे पहले पीएम मोदी और अमित शाह की बैठक हुई। इसके बाद पीएम, शाह और नीतीश ने ओडिशा के सीएम और बीजेडी के मुखिया नवीन पटनायक से अलग-अलग बात की।
शिवसेना देगी राजग को समर्थन
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से अमित शाह की बातचीत के बाद राज्यसभा में शिवसेना संसदीय दल के नेता संजय राउत कहा कि हमने जदयू को समर्थन देने का फैसला किया है क्योंकि उपसभापति का पद गैर-राजनीतिक होता है।
लेंगे।
जीत के प्रति आश्वस्त है भाजपा
भाजपा सूत्रों का दावा है कि इस समय राजग के पक्ष में 126 वोट हैं। यह संख्या उम्मीदवार जिताने के लिए जरूरी मतों से तीन ज्यादा हैं। इनमें बीजेडी, शिवसेना और अकाली दल भी शामिल हैं। हालांकि इन तीनों ही दलों ने, जिनके पास 15 वोट हैं, अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। शिवसेना भाजपा से नाराज चल रही है, जबकि नरेश गुजराल को उम्मीदवार नहीं बनाने से अकाली दल भी असंतुष्ट है। हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि ये दोनों दल राजग उम्मीदवारों को हराने का खतरा नहीं उठाएंगे।
भाजपा-कांग्रेस दोनों ने दिखाई सियासी चतुराई
एक दूसरे को चित करने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने सियासी चतुराई दिखाई है। अपने उम्मीदवार के नाम पर समर्थन न मिलने की संभावना खत्म करने के लिए भाजपा ने जहां अपनी सहयोगी जदयू के सांसद को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने भी अपनी दावेदारी छोड़ते हुए एनसीपी के नाम पर विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी संभाली है।
नीतीश ने मांगा तेलंगाना के सीएम से समर्थन
नीतीश कुमार ने मंगलवार को उपसभापति उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल से समर्थन मांगा। उन्होंने टीआरएस प्रमुख राव से हरिवंश सिंह को समर्थन देने का आग्रह किया। तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, राव ने नीतीश से कहा कि वह पार्टी नेताओं से परामर्श के बाद फैसला