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नई शिक्षा नीति पर रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा, युवा शक्ति के जरिए हासिल करेंगे सबसे अधिक लक्ष्य
Wed, 16 Sep 2020 02:15 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 16 Sep 2020 02:15 PM IST
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक हैं। हमारा युवा वह शक्ति है जिसके माध्यम से हम सबसे अधिक लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। इस शक्ति को पहचानते हुए, पीएम मोदी ने सभी क्षेत्रों में युवाओं पर जोर दिया है। राजनाथ ने 'नई शिक्षा नीति-2020' पर आयोजित एक वेबिनार में इस बात का जिक्र किया।
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राजनाथ ने कहा, नई शिक्षा नीति में मातृभाषा और स्थानीय भाषा को महत्व दिया गया है। हमारी मातृभाषा हमारे ‘मन’ और ‘मान’ की भाषा होती है। यह न केवल हमारी अभिव्यक्ति का, बल्कि सीखने का भी सबसे सरल और समर्थ माध्यम होती है।
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We are one of the youngest countries in the world. Our youth is the power through which we can achieve the biggest of targets. Identifying this power, PM Modi has laid emphasis on youth in all fields: Defence Minister Rajnath Singh, during a webinar on ‘New Education Policy-2020' pic.twitter.com/IyHhKHifJT
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 16, 2020
वेबिनार को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा, 'नई शिक्षा नीति-2020' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में, आप सभी के बीच उपस्थित होने पर, मुझे बड़ी खुशी हो रही है। यह आयोजन देश के युवा छात्रों में, समकालीन मुद्दों पर जागरूकता लाने में एक अहम कड़ी साबित होगा। इसके लिए मैं आयोजकों को अपनी ओर से बधाई देता हूं।
पढ़ें उनके संबोधन की मुख्य बातें:-
- हमारे देश में युवाओं की एक बड़ी संख्या है। हम दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक हैं। युवा हमारी वह ताकत हैं, जिनकी मदद से हम बड़ा से बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं।
- हम सबको मालूम है, कि केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ को मंजूरी दे दी है। भारतीय इतिहास में यह पहली नीति है, जिसके निर्माण में देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक, और 676 जिलों की भागीदारी रही है।
- इसका निर्माण, बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और अन्य नागरिकों द्वारा दिए गए 2 लाख से भी अधिक सुझावों को ध्यान में रखकर किया गया है। एक कहावत है कि जिंदगी सुधारनी है, तो व्यवसाय में निवेश करना चाहिए, पर पीढ़ियां सुधारनी हैं, तो शिक्षा में निवेश करना चाहिए।
- मैं समझता हूं कि यह नीति, हमारे देश भर के प्रबुद्ध जनों द्वारा किए गए, वैचारिक निवेश का प्रतिफलन है। यह सही मायनों में एक ‘राष्ट्रीय’ नीति है।
- इस शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, कई अहम बदलाव किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य, विद्यार्थियों का समग्र विकास करते हुए, एक सशक्त, समृद्ध और श्रेष्ठ भारत का निर्माण करना है।
- नई शिक्षा नीति में, प्रारंभिक कक्षाओं से ही शिक्षा के साथ-साथ खेल और व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस नीति में राज्य सरकारों को, अपने मिडिल और हाई स्कूल में, एनसीसी विंग शुरू करने के लिए भी प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है।
- यह नीति किसी भी राष्ट्र के समुचित विकास के लिए आवश्यक सभी तत्त्वों पर समान बल देती है। इस नई शिक्षा नीति के द्वारा हमारा युवा, तकनीकी एवं सैद्धांतिक शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ, नैतिक, सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी मजबूत होगा।
- यह प्राचीन और आधुनिक जीवन मूल्य, चरित्र निर्माण और आत्म बल, सामाजिक और सामुदायिक भावना पैदा करने वाली शिक्षा की नीति है। दूसरे शब्दों में मैं कहूं, तो यह ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘महात्मा गांधी’ और ‘डॉ अंबेडकर’ के सपनों के भारत का निर्माण करने वाली शिक्षा नीति है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह प्राचीन और आधुनिक जीवन मूल्य चरित्र निर्माण, आत्म बल, सामाजिक और सामुदायिक भावना पैदा करने वाली शिक्षा की नीति है। दूसरे शब्दों में मैं कहूं तो यह स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के सपनों के भारत का निर्माण करने वाली शिक्षा नीति है।
पीढ़ियां सुधारनी तो शिक्षा में निवेश करना चाहिए
रक्षा मंत्री ने कहा कि युवाओं को एक कहावत सुनाते हुए कहा कि जिंदगी सुधारनी है तो व्यवसाय में निवेश करना चाहिए पर पीढिय़ां सुधारनी हैं तो शिक्षा में निवेश करना चाहिए। मैं समझता हूं कि यह नीति हमारे देश भर के प्रबुद्ध जनकों द्वारा किए गए वैचारिक निवेश का प्रतिफलन है। यह सही मायनों में एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। इसका लागू होना शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक व दूरदृष्टि वाली शुरुआत है। मेरा विश्वास है कि सभी के सहयोग से पूरी शिक्षा व्यवस्था ऊजार्वान और समर्थ बनेगी। कौशल के आधार पर आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो संकल्प लिया गया है वह इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा प्रभावी ढंग से पूरा होगा। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली ऐसी नीति है जिसमें ढाई लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लाकों और 676 जिलों की भागीदारी रही है। यह बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और अन्य नागरिकों द्वारा दिए गए दो लाख से अधिक सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।