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महिला आरक्षण: अभी 'राजीव' दांव बाकी है; मेज थपथपाने वाली कांग्रेस चुनाव में पीएम मोदी को नहीं लेने देगी श्रेय

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 25 Sep 2023 07:13 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी ने 25 सितंबर को देश के विभिन्न हिस्सों में 'महिला आरक्षण' की सच्चाई बताने के लिए अपनी 21 महिला नेताओं को मैदान में उतारा। इनके जरिए पार्टी ने अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है।

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Rajiv stake is still pending Congress which thumps the table will not allow PM Modi to take credit in election
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद से पारित। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कांग्रेस पार्टी ने संसद के भीतर, मोदी सरकार द्वारा लाए गए 'महिला आरक्षण' विधेयक का न केवल मेजें थपथपाकर स्वागत किया, बल्कि उसे दोनों सदनों में पारित कराने में भी सरकार का साथ दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना था कि कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण का मुद्दा, 2024 के अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करने की तैयारी कर रखी थी। मोदी सरकार ने एकाएक संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस विधेयक को पारित करा दिया। भाजपा ने अपने एक दांव से ही सारा श्रेय खुद ले लिया। हालांकि, दोनों सदनों में कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण के मुद्दे को नया नहीं बताया। 

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पार्टी का कहना था कि ये तो कांग्रेस का ही मुद्दा है। इसे पहले भी संसद में पेश किया गया, लेकिन उसे दूसरे दलों ने पास नहीं होने दिया। अब कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सियासत में 'राजीव' दांव खेलने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस पार्टी, इतनी आसानी से इस दांव को मोदी सरकार के पक्ष में नहीं जाने देगी। पार्टी ने इसका ट्रेलर जारी कर दिया है। 
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देश की महिलाओं के साथ धोखा
कांग्रेस पार्टी ने 25 सितंबर को देश के विभिन्न हिस्सों में 'महिला आरक्षण' की सच्चाई बताने के लिए अपनी 21 महिला नेताओं को मैदान में उतारा। इनके जरिए पार्टी ने अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। पार्टी, किसी भी सूरत में इस दांव को भाजपा के पाले में नहीं जाने देगी। इसके लिए देशभर में जनसभाएं की जाएंगी। लोगों को बताया जाएगा कि महिला आरक्षण, कांग्रेस पार्टी का मुद्दा रहा है। पार्टी ने कई बार महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया, लेकिन विरोधी दलों ने उसे पास नहीं होने दिया।  
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ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की नेता, सोमवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर खासी मुखर रही। प्रवक्ता शोभा ओझा ने चंडीगढ़ कांग्रेस भवन में कहा, मोदी सरकार का महिला आरक्षण बिल एक जुमला है। अगर मोदी सरकार को महिला आरक्षण देना ही था तो लोकसभा चुनाव के निकट ही यह बिल क्यों लाई। भाजपा तो 2014 से सत्ता में है। इस विधेयक को पहले भी लाया जा सकता था। केंद्र की भाजपा सरकार ने देश की महिलाओं के साथ धोखा किया है। यह बिल और कुछ नहीं, बल्कि देश की ज्वलंत समस्याओं से ध्यान भटकाने का तरीका भर है। भाजपा ने महिला आरक्षण की आड़ में बेरोजगारी, घोटाले और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का काम किया है। 

महिला आरक्षण, ये सपना तो राजीव गांधी का था
कांग्रेसी नेता शोभा ओझा ने कहा, सबसे पहले महिला आरक्षण का सपना स्व: प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देखा था। उन्होंने 1989 में कहा था कि यदि महिलाओं को उनके सभी अधिकार मिलें, जिसमें राजनीतिक भागीदारी भी शामिल थी तो निश्चित तौर पर अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्ति पाई जा सकती है। ये राजीव गांधी की ही सोच थी कि उन्होंने पंचायती राज में महिलाओं को हिस्सेदारी देने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल पेश किया था। वह बिल लोकसभा में पास हो गया था। बतौर शोभा ओझा, वह बिल राज्यसभा में सात वोटों से गिर गया था। 

उस वक्त भाजपा के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी सहित अन्य नेताओं ने इसका विरोध किया था। उस दौर में ऐसा बिल लाने बाबत कोई सोच भी नहीं सकता था, लेकिन राजीव गांधी, महिलाओं को उनके अधिकार देने के लिए इस बिल को लेकर आए थे। उसके बाद नरसिम्हा राव की सरकार के समय इस बिल ने कानून का रूप लिया। इसके बाद लंबे-लंबे घूंघट में रहने वाली महिलाओं ने पंच, सरपंच, मेयर व नगर पालिका अध्यक्ष बनकर अपने गांव एवं वार्ड को संवारना शुरु किया। 

2039 से पहले लागू नहीं होगा महिला आरक्षण
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा, कानपुर के ठग्गू के लड्डू की तरह भाजपा वह पार्टी है, जिसमें ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे हमने ठगा नहीं। अब इस पार्टी के दिन पूरे हो चुके हैं। मोदी सरकार का महिला आरक्षण भी कुछ ऐसा ही है। यह 2039 से पहले लागू नहीं होगा। भाजपा ने देश की ज्वलंत समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए महिला आरक्षण का मुद्दा छेड़ दिया है। यह पार्टी लोगों में गलत बयानी कर रही है। देश में जनगणना होने के बाद ही इस बाबत सोचा जा सकता है। ऐसे में 2039 से पहले महिला आरक्षण लागू होने वाला नहीं है। भाजपा वाकई महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है तो इसे 2024 के लोकसभा चुनाव में ही लागू करे। कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण का समर्थन इसलिए किया है क्योंकि आधी आबादी की इसकी समर्थक है। यह बिल पहले राजीव गांधी लेकर आए थे। उस समय भाजपा ने ही इसका विरोध किया था। सरकार चाहे तो महिला आरक्षण विधेयक तत्काल लागू किया जा सकता है। 


कांग्रेस ने नगर निगम और पंचायतों में आरक्षण लागू किया
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता अल्का लाम्बा ने जयपुर में महिला आरक्षण पर कहा, ये केवल भाजपा की जुमलेबाजी है। केंद्र सरकार, महिलाओं को आरक्षण देने का इनका इरादा नहीं रखती। भले ही मोदी सरकार ने संसद में यह बिल पास करवा लिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को अपना पूरा समर्थन दिया है। सच्चाई यह है कि महिलाओं को उसका लाभ अगले 10 वर्ष बाद ही मिल सकेगा। सबसे पहले महिला आरक्षण की बात कांग्रेस ने की थी। राजीव गांधी ने महिलाओं को उनके अधिकार देने का सपना देखा था। तब भी विपक्ष ने इस बिल के पास होने की राह में बाधा खड़ी की। कांग्रेस पार्टी की सरकार में ही वर्ष 1993 में नगर निगम और पंचायत में आरक्षण लागू किया गया था। तब देश में 15 लाख महिलाओं को इसका लाभ मिला। लोकसभा में भी कांग्रेस पार्टी ही महिला आरक्षण बिल लेकर आई थी। उस वक्त पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं होने के चलते वह बिल पास नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अब महिला आरक्षण बिल लेकर आए हैं, उन्होंने इसे संसद में पास भी करा लिया है तो इसे तुरंत लागू क्यों नहीं करते। लांबा ने कहा, महिला आरक्षण केवल एक चुनावी मुद्दा है। गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बिना आरक्षण के ही आधी आबादी को 40 प्रतिशत सीटें दी थी। अब भाजपा केवल महिला आरक्षण को एक चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है।

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