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सुप्रीम कोर्ट में स्पीकर का दांव पड़ा उलटा, पायलट खेमे को मिली बिन मांगी मुराद

Fri, 24 Jul 2020 06:27 AM IST
योगेश साहू राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 24 Jul 2020 06:27 AM IST
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Rajasthan Political Crisis, Rajasthan Speakers bet backfired, High Court, Supreme Court, CM Ashok Gehlot, Sachin Pilot, Horse Trading
अशोक गहलोत, सचिन पायलट - फोटो : फाइल

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सीपी जोशी का सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना उलटा पड़ गया है। एक ओर जहां वह राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत से कोई अंतरिम आदेश पारित करवा पाने में सफल नहीं हो सके वहीं दूसरी ओर वह सचिन पायलट व 18 अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही भी जारी नहीं रख सकते।

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जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लग्गने से इनकार कर दिया, जिसमें स्पीकर को 24 जुलाई तक अयोग्यता की कार्यवाही नहीं करने के लिए कहा गया था। साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट को तय तिथि के मुताबिक सचिन पायलट व 18 विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाने के लिए कहा है। लेकिन हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होगा।
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साफ है कि शुक्रवार को हाईकोर्ट का फैसला चाहे 19 विधायकों के पक्ष में आए या स्पीकर/कांग्रेस के पक्ष में, लेकिन स्पीकर की 19 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकती।
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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को कांग्रेस के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस, अपने बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के प्रयास में जुटी थी लेकिन फिलहाल उस पर सुप्रीम ब्रेक लग गया है। वहीं पायलट व 18 विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से 'बिन मांगी मुराद' मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ इस मामले को अपने पास परीक्षण के लिए रख लिया है बल्कि बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान कई ऐसे सवाल भी उठाए जिस पर एक लंबी सुनवाई चलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर जोशी के वकीम कपिल सिब्बल किया कि क्या कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया जा सकता है और क्या पार्टी के विधायकों के लिए व्हिप का पालन करना अनिवार्य है।

जिस पर सिब्बल ने कहा कि व्हिप नहीं नोटिस जारी किया गया था। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामले को और भी बड़ा कर दिया कि क्या पार्टी के विधायक असहमति नहीं जता सकते। क्या लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को लोकतंत्र में पार्टी के भीतर असहमति जताने का हक नहीं है। कुल मिलाकर साफ है कि अब यह मामला काफी व्यापक हो गया है। 


शुक्रवार  को राजस्थान हाईकोर्ट का अगर स्पीकर द्वारा पायलट व 18 विधायकों को भेजे गए अयोग्यता नोटिस को सही करार देता है तो पायलट गुट सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा अवश्य खटखटाएगा। वहीं अगर हाईकोर्ट स्पीकर द्वारा भेजे गए नोटिस को गलत बताता है तो स्पीकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। यानी कुल मिलाकर यह साफ है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबा चलेगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आने तक राजस्थान का सियासी घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है।

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