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महिला आरक्षण विधेयक पास कराने को लेकर राहुल ने लिखा मोदी को खत, आक्रोश रैली की तैयारी

Tue, 17 Jul 2018 02:14 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Jul 2018 02:14 AM IST
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Rahul gandhi letter to pm Modi about Women's Reservation Bill in In the parliament monsoon session

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में प्रधानसंत्री से इसी मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पास करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस विधेयक पर अपना समर्थन देने को कहा है। वहीं महिला कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर वायदाखिलाफी का आरोप लगाते हुए देशभर में महिला आक्रोश रैली निकालने का एलान किया है। 

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सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि महिला आरक्षण विधेयक को 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित किया गय़ा था। लेकिन लोकसभा में बहुमत न होने के चलते इस बिल को पारित नहीं कराया जा सका। तब राज्यसभा में भाजपा ने इस बिल का समर्थन करते हुए विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इसे एतिहासिक क्षण बताया था। लेकिन 8 साल गुजर चुके हैं, और भाजपा ने अपने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में इसे पारित कराने का वायदा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। 
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राहुल ने लिखा कि महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस आज भी अपने वायदे पर कायम है। उन्होंने प्रधानमंत्री को याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कई रैलियों में महिला सशक्तिकरण की बात की है। उन्होंने प्रधाानमंत्री से पूछा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर उनका रुख क्या है और महिला आरक्षण विधेयक को वह किस तरह समर्थन देंगे। राहुल ने कहा कि क्या संसद के आगामी सत्र में इसे पेश नहीं किया जा सकता और अगर इसमें देरी हुई तो अगले आम चुनाव से पहले इसे लागू करना मुश्किल होगा। 
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वहीं अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने प्रधानमंत्री पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर वायदाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस देशभर में सोमवार से महिला आक्रोश रैली निकालने जा रही है, जिसमें वे बताएंगे कि कैसे प्रधानमंत्री ने अपने वायदे से मुंह मोड़ा है। 

उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के इरादे नेक हैं, तो आगामी सेशन में अपने वायदे को पूरा करें। अगर प्रधानमंत्री वन नेशन, वन पोल को लेकर देशव्यापी बहस कर सकते हैं, तो महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने क्यों चुप्पी साधी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महिला सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ जुमलेबाजी करते हैं, वहीं उन्नाव रेप केस और कठुआ रेप कांड जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री चुप्पी साधे रहते हैं।

सुष्मिता देव ने कहा कि भारत की संसद में मात्र 11.8 फीसदी ही महिला सांसद है, जबकि नेपाल में 32.8 फीसदी और बांग्लादेश में 20 फीसदी महिलाएं संसद में प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 


गौरतलब है कि यूपीए सरकार के शासन काल में राज्यसभा में यह विधेयक पारित हुआ था और अभी लोकसभा में पारित होना बाकी है। महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव किया गया है। संसद के दोनों सदनों में महज 96 महिला सदस्य हैं। लोकसभा में 543 सदस्यों में सिर्फ 65 महिला सदस्य हैं और राज्यसभा के 243 सदस्यों में सिर्फ 31 महिला सदस्य हैं।

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