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Rafale Fighter Jets: फ्रांस से रवाना हुए पांचों राफेल विमानों की यूएई के एयरबेस पर लैंडिंग, बुधवार को भारत पहुंचेंगे

Mon, 27 Jul 2020 10:33 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 27 Jul 2020 10:33 PM IST
सार

  • 7364 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे
  • फ्रांस से भारतीय वायुसेना के पायलट लेकर आ रहे हैं पांचों राफेल लड़ाकू विमान
  • अगले सप्ताह लद्दाख में सीमा पर की जा सकती है पांचों विमानों की तैनाती
  • ये पांच विमान भारत-फ्रांस के बीच हुए 36 विमानों के समझौते की पहली खेप है 

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Rafale Jets News in Hindi: Rafale Fighter Aircraft Will Take Off From Frances Istres Airbase For India Flown By Indian Air Force Pilots
राफेल लड़ाकू विमान - फोटो : Indian Embassy

विस्तार

भारतीय वायुसेना का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। सोमवार को फ्रांस के एयरबेस से पांच राफेल लड़ाकू विमानों ने भारत के लिए उड़ान भर ली। इन विमानों को भारतीय वायुसेना के पायलट उड़ा रहे हैं। भारतीय वायुसेना से मिली ताजा जानकारी के अनुसार पांचों विमान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दाफरा एयरबेस पर पहुंच गए। ये विमान यहां रिफ्यूलिंग के लिए रुके हैं। पांचों विमान 7364 किलोमीटर की दूरी तय कर बुधवार को भारत पहुंचेंगे।

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पांचों राफेल विमान 7364 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि अगले हफ्ते इन पांचों विमानों की तैनाती चीन सीमा विवाद के मद्देनजर की जाएगी। ये पांच विमान भारत और फ्रांस के बीच हुए 36 विमानों के समझौते की पहली खेप है। अबतक वायुसेना के 12 लड़ाकू पायलटों ने फ्रांस में राफेल लड़ाकू जेट पर अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। कुछ और अपने प्रशिक्षण के उन्नत चरण में हैं। 
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यह भी पढ़ें- राफेल की ताकत बढ़ाने के लिए भारत खरीद रहा है खतरनाक हैमर मिसाइल

भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के अनुसार, दोनों देशों को कुल 36 वायुसेना पायलटों को फ्रेंच एविएटर्स द्वारा राफेल लड़ाकू जेट पर प्रशिक्षित किया जाना है। जहां अधिकांश वायुसेना के पायलटों को फ्रांस में प्रशिक्षित किया जाएगा, वहीं कुछ भारत में अभ्यास करेंगे। खास बात ये है कि इन विमानों को भारतीय पायलट ही उड़ाकर ला रहे हैं। पहली खेप में भारत को 10 लड़ाकू विमान डिलीवर किए जाने थे लेकिन विमान तैयार न हो पाने की वजह से फिलहाल पांच विमान भारत पहुंचेंगे।

दो जून को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ले के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि फ्रांस में कोरोना वायरस महामारी के बावजूद भारत को राफेल विमान की डिलीवरी की जाएगी। ये विमान अपने साथ कई शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं।

यह भी पढ़ें- राफेल विमान 10 घंटे की उड़ान के बाद भारत पहुंचेंगे, हवा में दो बार भरा जाएगा ईंधन

चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच राफेल विमान का भारत पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में राफेल विमानों की डिलीवरी में तेजी आने की उम्मीद है। वायुसेना अधिकारियों ने कहा कि राफेल विमानों के आने के बाद वायुसेना की लड़ाकू क्षमताओं में और वृद्धि होगी। बता दें कि भारत ने लगभग 58 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
 

Rafale Jets News in Hindi: Rafale Fighter Aircraft Will Take Off From Frances Istres Airbase For India Flown By Indian Air Force Pilots
राफेल लड़ाकू विमान - फोटो : Dassault Aviation

फ्रांस से भारत की यात्रा के दौरान विमान के मध्य पूर्व पहुंचने पर हवा में ईंधन भरा जाएगा। ये ईंधन फ्रांसीसी वायुसेना के टैंकर विमान भरेंगे। इसके बाद मध्य पूर्व से भारत तक की उड़ान के दौरान बीच में भारतीय आईएल-78 के विमान राफेल में फिर ईंधन भरेंगे। सूत्रों ने बताया कि वैसे तो राफेल 10 घंटे लगातार उड़ान भरकर सीधे भारत आ सकते हैं, मगर पायलटों को बेहद तनाव झेलना पड़ सकता है।

अंबाला एयरफोर्स में तैनात की जाएगी पहली स्क्वाड्रन
इन विमानों की पहली स्क्वाड्रन को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा, जिसे भारतीय वायुसेना का सबसे अहम रणनीतिक बेस माना जाता है। वहीं, दूसरा रणनीतिक बेस पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में होगा। कोरोना महामारी के बावजूद वायुसेना कड़ी मेहनत से जमीनी ढांचे को तैयार कर रही है, ताकि विमानों को यहां से संचालित किया जा सके।

वायुसेना ने राफेल के रखरखाव और तैनाती के लिए दोनों स्टेशनों पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुल 36 राफेल में से 30 लड़ाकू विमान हैं, जबकि छह ट्रेनर विमान हैं। ट्रेनर विमान दो सीटों वाले हैं। उनमें लड़ाकू विमानों जैसी ही खासियतें होंगी।

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