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राफेल सौदे पर बोली कांग्रेस: सामने आई कमीशन और रिश्वतखोरी की सच्चाई, निष्पक्ष जांच हो

Mon, 05 Apr 2021 05:12 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 05 Apr 2021 05:12 PM IST
सार

  • राफेल डील में खुलासे के बाद कांग्रेस ने पूछे पांच सवाल
  • कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की
  • दसॉल्ट ने 10 लाख यूरो देने की बात कबूल की

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Rafale deal: After french report dassault paid Indian middleman in Rafale deal congress attack on modi govt
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

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फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के मामले में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार को घेरा। दिल्ली में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। राफेल विमान सौदे पर सुरजेवाला ने कहा कि 60 हजार करोड़ की सच्चाई सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राफेल विमनों की खरीद में बिचौलियों और कमीशनखोरी को बढ़ावा दिया गया है। सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट ने यह बात स्वीकार की है कि उसने भारत के साथ राफेल विमान डील में एक बिचौलिया को 1.1 मिलियन यूरो गिफ्ट के तौर पर दिए हैं।

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सुरजेवाला ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले पर निष्पक्ष जांच की मांग करती है। उन्होंने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार के पास अब भी वक्त है कि वह इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करें।  
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कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने इस सौदे पर कहा, '10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फ्रांस, पेरिस के अंदर 60 हजार करोड़ रुपए के 36 राफेल जहाज खरीदने की घोषणा की गई। ना कोई टेंडर, खरीद प्रक्रिया और ना ही डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर, बस गए और सबसे बड़े रक्षा सौदे की घोषणा कर आए।'

सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, 'अब स्पष्ट है कि 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक के सबसे बड़े रक्षा सौदे में; सरकारी खजाने को नुकसान, राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़, क्रोनी कैपिटलिज्म की संस्कृति, कमीशन खोरी और बिचौलियों की मौजूदगी की चमत्कारी गाथा अब देश के सामने है।'

सुरजेवाला ने मोदी सरकार से पूछे पांच सवाल 

  1. 1.1 मिलियन यूरो के जो  गिफ्ट दसॉल्ट की ऑडिट रिपोर्ट में मिला। क्या वो राफेल डील के लिए बिचौलिए को कमीशन के तौर पर दिए गए थे? 
  2. जब दो देशों की सरकारों के बीच रक्षा समझौता हो रहा है, तो कैसे किसी बिचौलिये को इसमें शामिल किया जा सकता है? 
  3. क्या इस सबके बाद राफेल डील सवालों के घेरे में नहीं आ गया? 
  4. क्या इस पूरे मामले की जांच नहीं की जानी चाहिए, जिससे खुलासा हो कि डील के लिए किसको और कितने पैसे दिए गए?
  5. क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर जवाब देंगे?

देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में गड़बड़ी
सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस की जांच एजेंसी ने जब कंपनी की जांच की गई तो उसमें कमीशनखोरी के केस सामने आए। ऐसे में कांग्रेस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पर बात करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में भारत और फ्रांस की दोनों सरकार की संलिप्तता बराबर की है। 

कंपनी की ऑडिट में हुआ भ्रष्टाचार का खुलासा
गौरतलब है कि राफेल विमान की खेप भारत में आने शुरू हो गए हैं। लेकिन इसी बीच फ्रांस की एक वेबसाइट ने राफेल नाम से एक आर्टिकल छापे हैं। इसमें दावा किया गया है कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि राफेल लड़ाकू विमान डील में गड़बड़ी का सबसे पहले जानकारी 2016 में फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी AFA को हुई थी। AFA ने जांच में पाया कि विमान बनाने वाली कंपनी दसौल्ट ने एक बिचौलिए को 10 लाख यूरो देने पर सहमति जताई है। हालांकि जिस कंपनी को पैसा दिया गया है उसके दलाल एक अन्य हथियार सौदे में गड़बड़ी का आरोपी है।

बिल भारत की कंपनी के नाम पर हुआ तैयार
रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2018 में फ्रांस की भ्र्ष्टाचार निरोधक एजेंसी ने विमान तैयार करने वाली कंपनी का ऑड़िट किया । जिसमें कंपनी के 2017 के खातों की जाच का दौरान 'क्लाइंट को गिफ्ट' के नाम पर हुए 1 मिलियन यूरो के खर्च की जानकारी हाथ लगी। इस पर AFA ने इस खर्च का बिल मांगा तो दसॉल्ट एविएशन ने  30 मार्च 2017 का बिल उपलब्ध कराया। जिसमें भारत की एक कंपनी के नाम पर पैसा मुहैया कराने का उल्लेख है। पैसों का इस्तेमाल राफेल लड़ाकू विमान के 50 बड़े 'मॉडल' बनाने में हुआ। हालांकि यह मॉडल बन नहीं पाए। यह बिल राफेल लड़ाकू विमान के 50 मॉडल बनाने के लिए दिए ऑर्डर का आधे काम के लिए था।हर एक मॉडल की कीमत करीब 20 हजार यूरो से अधिक थी।
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