MHA: सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने कट्टरपंथी, इंटरनेट की काली दुनिया में हो रही आतंकियों की ऑनलाइन भर्ती
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विस्तार
दुनिया भर के कट्टरपंथी संगठन, अपनी तोड़फोड़ की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंटरनेट की 'काली दुनिया' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस काली दुनिया के प्लेटफॉर्म पर काम करने की वजह से आतंकी संगठन, अब सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इन कट्टरपंथी संगठनों तक पहुंचना, सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए आसान नहीं है। इन संगठनों द्वारा मेटावर्स, डार्कनेट और वाइबर सहित दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आतंकियों की ऑनलाइन भर्ती की जा रही है। उक्त प्लेटफार्म के जरिए कट्टरपंथी संगठन, भोले-भाले/उदास/अलग-थलग युवाओं को लक्षित कर रहे हैं। भारत की संप्रभुता व अखंडता को प्रभावित करने वाले सांप्रदायिक और भारत विरोधी प्रचार में शामिल वेबसाइटों/खातों की पहचान की गई है। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को केस भेजा जाता है। एमईआईटीवाई ने 9845 यूआरएल ब्लॉक कर दिए हैं। एनआईए द्वारा ऑनलाइन कट्टरपंथ से संबंधित 67 मामलों की जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में अब तक जांच एजेंसी 'एनआईए' ने 325 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इंटरपोल ने मेटावर्स पर जारी किया श्वेतपत्र ...
बता दें कि फ्रांस के ल्योन में 19वें इंटरपोल प्रमुखों के एनसीबी सम्मेलन के पूर्ण सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सहित सभी प्रतिनिधिमंडलों ने इस बात पर जोर दिया था कि ऑनलाइन कट्टरपंथ, वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और बहु-सार्वजनिक सहयोग की आवश्यकता है। पहलूबद्ध रणनीति, जो चरमपंथी सामग्री की आपूर्ति और मांग, दोनों को संबोधित करती है। भारत के लिए सीबीआई, ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने के लिए इंटरपोल के साथ लगातार जुड़ी हुई है। 18-21 अक्टूबर, 2022 तक नई दिल्ली में आयोजित 90वीं इंटरपोल महासभा के दौरान, इंटरपोल ने पहली बार मेटावर्स का जिक्र किया था। इसके बाद, जनवरी 2024 में, इंटरपोल ने मेटावर्स को लेकर कानून प्रवर्तन परिप्रेक्ष्य पर एक श्वेतपत्र जारी किया था। उसमें कट्टरपंथ के मुद्दे की पहचान की गई। साथ ही यह भी नोट किया गया कि आतंकवादी ऑनलाइन भर्ती, कट्टरपंथ, प्रशिक्षण और व्यक्तियों की शिक्षा के लिए मेटावर्स का फायदा उठा सकते हैं।
सिग्नल व टेलीग्राम जैसे सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन ...
इस संबंध में, समग्र और समन्वित तरीके से कट्टरपंथ से जुड़े कई जोखिम कारकों को सामूहिक रूप से पहचानने, काउंटर करने और कट्टरपंथ से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र एवं रणनीति स्थापित करने के लिए कट्टरपंथी संगठनों पर इनपुट सहित अन्य जानकारी साझा करने के लिए सभी हितधारकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। समान विचारधारा वाले तत्वों से जुड़ने के लिए कट्टरपंथी संगठनों द्वारा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ व्हाट्सएप के अलावा सिग्नल, टेलीग्राम, वाइबर और डार्क वेब जैसे अधिक सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है। व्यक्तियों को ऑनलाइन कट्टरपंथी बनाया जा रहा है।
नियमित आधार पर हो रही साइबर गश्त ...
चूंकि साइबर प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में किया जा रहा है, इसलिए साइबर स्पेस की लगातार निगरानी की जा रही है। ऐसी सामग्री और संस्थाओं की पहचान और निगरानी करने के लिए नियमित आधार पर साइबर गश्त की जाती है। भोले-भाले/उदास/अलग-थलग युवाओं को लक्षित करने वाले कट्टपंथी संगठनों पर नजर रहती है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले सांप्रदायिक और भारत विरोधी प्रचार में शामिल वेबसाइटों/खातों की पहचान की जा रही है। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को भेजा जा रहा है। यह मंत्रालय, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत निर्देश जारी करता है। इसके जरिए सरकार को विशिष्ट परिस्थितियों में सार्वजनिक पहुंच से जानकारी को अवरुद्ध करने का अधिकार मिल जाता है।
एक्ट के तहत ये सब शामिल है ...
भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और सार्वजनिक व्यवस्था, अगर इनके लिए कोई खतरा पैदा करता है तो सूचना प्रौद्योगिकी में प्रदान की गई उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद उपरोक्त से संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध के लिए उकसावे को रोकने के लिए मंत्रालय (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया और सुरक्षा) नियम, 2009 के तहत दिशा निर्देश जारी कर सकता है। इसके अलावा, आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3) (बी) के तहत, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय को भी 'टेक डाउन नोटिस' जारी करने के लिए एक एजेंसी के रूप में अधिकृत/नामित किया गया है।
336 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल ...
गैरकानूनी सामग्री को हटाने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र भी मध्यस्थ/मंच की भूमिका निभाता है। वर्तमान में, राज्य पुलिस के अलावा, एनआईए ऑनलाइन कट्टरपंथ से संबंधित 67 मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में अब तक 325 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, 336 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है। 63 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। एमईआईटीवाई ने अक्टूबर, 2024 तक 9845 यूआरएल (जिसमें कट्टरपंथी सामग्री भी शामिल है) को ब्लॉक करने के निर्देश जारी किए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद सत्र के दौरान यह जानकारी दी है।