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Maharashtra: मनोज जरांगे फिर से शुरू करेंगे अनिश्चितकालीन अनशन, कहा- मराठा समुदाय के लोग साथ आ सकते है
Mon, 16 Dec 2024 09:12 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 16 Dec 2024 09:12 PM IST
सार
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा, मराठा समुदाय से कोई भी व्यक्ति जो अनशन में शामिल होना चाहता है, उसका स्वागत है। किसी पर कोई दबाव नहीं है। आरक्षण कार्यकर्ता ने तर्क दिया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को नागपुर में आयोजित राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान ठोस कदम उठाकर आरक्षण मुद्दे को हल करने की अपनी मंशा दिखानी चाहिए।
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मनोज जरांगे, मराठा आरक्षण कार्यकर्ता
- फोटो : ANI
विस्तार
आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को घोषणा की कि वह नौकरियों और शिक्षा में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण समेत मराठा समुदाय की मांगों को लेकर फिर से अनिश्चितकालीन अनशन की शुरुआत करेंगे और मंगलवार को इसकी तिथि की घोषणा करेंगे। जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में मीडिया से बात करते हुए, जहां उन्होंने मध्य महाराष्ट्र में पिछले आधा दर्जन अनशन किए थे, उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय के लोग उनके अनशन में शामिल हो सकते हैं।
बता दें कि, मनोज जरांगे की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भाजपा के नेतृत्व वाली नई महायुति सरकार 15 दिसंबर को बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के बाद स्थिर हो रही है। जरांगे ने जोर देकर कहा कि यह अनशन मराठा समुदाय के सभी सदस्यों के लिए खुला रहेगा, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में चल रहे व्यापक राज्यव्यापी आरक्षण आंदोलन के तहत अनशन में भाग लेने के लिए कोई बाध्यता नहीं है।
'सरकार अपनी ईमानदारी और समर्पण दिखाए'
उन्होंने जोर देकर कहा, 'सरकार ने मराठा समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पहले ही व्यक्त कर दी है। अब हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वे सत्र के दौरान ठोस कदम उठाकर अपनी ईमानदारी और समर्पण दिखाएं।' उन्होंने सरकार से सेज सोयारे (करीबी रिश्तेदार), हैदराबाद, बॉम्बे और सतारा गजेटियर की तरफ से मराठा को कुनबी घोषित करने की मसौदा अधिसूचना को लागू करने को कहा।
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मनोज जरांगे की क्या है मांग?
मनोज जरांगे एक मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं, जो कुनबी को मराठों के 'ऋषि सोयारे' (जन्म या विवाह से संबंधित) के रूप में मान्यता देती है और उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण प्रदान करती है। कृषि प्रधान कुनबी समुदाय को पहले से ही ओबीसी श्रेणी के तहत कोटा लाभ मिलता है।
संदीप शिंदे समिति के काम में तेजी लाने की भी मांग
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे समिति के काम में तेजी लाने की भी मांग की है, ताकि मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और उन्हें कोटा के लिए पात्र बनाया जा सके। इस साल फरवरी में, राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। हालांकि, जरांगे ओबीसी मद के तहत समुदाय को कोटा देने पर जोर दे रहे हैं।
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बता दें कि, मनोज जरांगे की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भाजपा के नेतृत्व वाली नई महायुति सरकार 15 दिसंबर को बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के बाद स्थिर हो रही है। जरांगे ने जोर देकर कहा कि यह अनशन मराठा समुदाय के सभी सदस्यों के लिए खुला रहेगा, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में चल रहे व्यापक राज्यव्यापी आरक्षण आंदोलन के तहत अनशन में भाग लेने के लिए कोई बाध्यता नहीं है।
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'सरकार अपनी ईमानदारी और समर्पण दिखाए'
उन्होंने जोर देकर कहा, 'सरकार ने मराठा समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पहले ही व्यक्त कर दी है। अब हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वे सत्र के दौरान ठोस कदम उठाकर अपनी ईमानदारी और समर्पण दिखाएं।' उन्होंने सरकार से सेज सोयारे (करीबी रिश्तेदार), हैदराबाद, बॉम्बे और सतारा गजेटियर की तरफ से मराठा को कुनबी घोषित करने की मसौदा अधिसूचना को लागू करने को कहा।
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मनोज जरांगे की क्या है मांग?
मनोज जरांगे एक मसौदा अधिसूचना के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं, जो कुनबी को मराठों के 'ऋषि सोयारे' (जन्म या विवाह से संबंधित) के रूप में मान्यता देती है और उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण प्रदान करती है। कृषि प्रधान कुनबी समुदाय को पहले से ही ओबीसी श्रेणी के तहत कोटा लाभ मिलता है।
संदीप शिंदे समिति के काम में तेजी लाने की भी मांग
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से गठित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे समिति के काम में तेजी लाने की भी मांग की है, ताकि मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और उन्हें कोटा के लिए पात्र बनाया जा सके। इस साल फरवरी में, राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। हालांकि, जरांगे ओबीसी मद के तहत समुदाय को कोटा देने पर जोर दे रहे हैं।