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जेल से बाहर पुरोहित, इन आरोपियों को भी मिल चुकी है रिहाई

Thu, 24 Aug 2017 03:37 PM IST
amarujala.com- Presented by: मोहित
amarujala.com- Presented by: मोहित Updated Thu, 24 Aug 2017 03:37 PM IST
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Purohit walks out of jail here is some cases of Hindutva terror
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आतंकवाद से जुड़े ऐसे पांच मामलों की जांच कर रही है, जिसमें तथाकथित रूप से हिंदू आतंकवाद का नाम लिया जा रहा है। दरअसल, मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में लगभग 9 साल जेल में गुजारने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित रिहा हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुरोहित को जमानत पर रिहा कर दिया है।
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हालांकि उनकी रिहाई पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने आरोप लगाए हैं कि भारतीय जनता पार्टी के हिंदूत्व के एजेंडे का फायदा पुरोहित को मिला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि भाजपा आएसएस  के उन तमाम आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है जो बम धमाकों में शामिल रहे हैं।

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आइए आपको उन मामलों के बारे में बताएं, जिनकी जांच एनआईए कर रही हैः 

1. मालेगांव ब्लास्ट केस (2006)

29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
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पढ़ें- रिहाई के बाद कर्नल जाएंगे अपने घर, खाएंगे मां के हाथ का खाना

2. समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट

2005 के समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादात्तर पाकिस्तानी नागरिक थे। यह ट्रेन  दिल्ली से लाहौर जा रही थी। इस मामले में एनआई ने आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। जिसमें से एक की मौत हो चुकी है।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी मिल चुकी है रिहाई

Purohit walks out of jail here is some cases of Hindutva terror
3.मक्का मस्जिद विस्फोट

साल 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट हुआ था जिसमें बेहद ताकतवर आइईडी ब्लास्ट किया गया था जिसमें 14 लोग मारे गए थे। पहले इस केस की जांच हैदराबाद  पुलिस कर रही थी लेकिन बाद में सीबीआई ने इसकी जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। जिसके बाद स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। 

4. अजमेर शरीफ दरगाह विस्फोट

राजस्‍थान के अजमेर शरीफ दरगाह पर विस्फोट को दस साल होने को हैं और कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा भी सुना दी है। हालांकि मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए असीमानंद को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अजमेर के दरगाह शरीफ में 11 अक्टूबर 2007 को यह घटना अंजाम दी गई, उस वक्त वहां काफी संख्या में जायरीन मौजूद थे। दरगाह में दो ‌टाइमर बम प्लांट किए गए थे जिसमें से एक में विस्फोट हुआ। घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हुए थे। 

पढ़ें- मालेगांव ब्लास्ट केस में पहली बार आया था 'हिंदू आतंकवाद' का नाम    

5. सुनील जोशी की हत्या 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे सुनील जोशी की हत्या के मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी आठों आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है।मध्यप्रदेश की देवास कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था। गौरतलब है कि सुनील जोशी की 2007 में देवास में हत्या कर दी गई थी।इस केस में मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 में गिरफ्तार किया गया था।
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