एक्सप्लेनर: विज्ञापन पर विवाद नया नहीं, कृति से पहले आमिर-आलिया से कियारा तक आए निशाने पर, कब-क्यों हुआ बवाल?
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विस्तार
त्योहार भारतीय समाज में परंपरा, आस्था और भावनाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में जब ब्रांड इन्हें नए अंदाज में पेश करते हैं, तो यह लोगों का ध्यान खींचता है, लेकिन कई बार यही कोशिश विवाद की वजह भी बन जाती है। रक्षाबंधन के मौके पर अभिनेत्री कृति सेनन को लेकर जारी एक विज्ञापन भी इसी वजह से चर्चा में है। कृति के पहनावे और पालतू कुत्ते को राखी बांधने वाले इस विज्ञापन पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठे। विवाद इतना बढ़ा कि विज्ञापन को सभी प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया।
ये पहला मौका नहीं है जब किसी विज्ञापन पर विवाद हुआ है। इससे पहले भी कई विज्ञापन विवाद की वजह बन चुके हैं। इनमें से कई तो त्योहार के दौरान ही जारी हुए थे। कृति के विज्ञापन में ऐसा क्या था जिस पर विवाद हुआ? विवाद पर कृति ने क्या कहा? कंपनी ने विवाद के बाद क्या कदम उठाया? इससे पहले कब-कब त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों पर सवाल उठे? विवाद के बाद इन विज्ञापनों का क्या हुआ? आइये जानते हैं...
ताजा मामला क्या है?
एक ज्वेलरी ब्रांड ने रक्षाबंधन के मौके पर अभिनेत्री कृति सेनन को लेकर एक विज्ञापन जारी किया। इसमें कृति सेनन इंडो-वेस्टर्न पहनावे में नजर आईं। उन्होंने ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहनी थी। विज्ञापन में वह अपने भाई के साथ-साथ अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती दिखाई दीं।
विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना शुरू हो गई। कुछ लोगों ने रक्षाबंधन जैसे त्योहार के दौरान कृति के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। वहीं, कुछ लोगों ने कुत्ते को राखी बांधने पर भी आपत्ति जताई। विवाद तब और बढ़ गया, जब भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रणौत ने भी विज्ञापन की आलोचना की। उन्होंने कृति के पहनावे पर सवाल उठाते हुए इसे आपत्तिजनक बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर विज्ञापन को लेकर बहस तेज हो गई।
कृति सेनन ने क्या प्रतिक्रिया दी?
कृति सेनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कहा कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला की नेकलाइन में नहीं, बल्कि उसके दिल में होती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए।
कृति ने कहा कि समय के साथ पारंपरिक पहनावे और एथनिक फैशन में बदलाव आया है, लेकिन अब भी किसी महिला के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों से मापने की कोशिश की जाती है। उनके मुताबिक त्योहार की असली भावना कपड़ों में नहीं, बल्कि उन भावनाओं और परंपराओं के अर्थ में होती है।
उन्होंने रक्षाबंधन को सुरक्षा और आपसी प्रेम का रिश्ता बताते हुए कहा कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। कृति ने यह भी कहा कि उनके लिए उनके कुत्ते परिवार का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें भी इस खुशी में शामिल किया गया।
इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनका समर्थन किया। राहुल ने कृति की स्टोरी को री-शेयर किया और लिखा कि एक महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी मर्जी है। उन्होंने महिलाओं को उनकी आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल करना बंद करने की बात कही।
विज्ञापन बनाने वाली कंपनी ने क्या किया?
विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने विज्ञापन वापस ले लिया। कंपनी ने कहा कि उसका उद्देश्य समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। कंपनी ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों के सम्मान की बात कही और बताया कि इस बार उसने पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा मानते हुए उन्हें इस खुशी में शामिल करने की कोशिश की थी। कंपनी ने कहा कि अगर विज्ञापन से किसी वर्ग की भावनाएं अनजाने में आहत हुई हैं, तो यह उसका उद्देश्य नहीं था और सम्मान के तौर पर उसने विज्ञापन सभी माध्यमों से वापस ले लिया।
यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जब किसी अभिनेता/अभिनेत्री के भारतीय परंपराओं से जुड़े विज्ञापन पर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कई बड़े ब्रांड अपने विज्ञापनों को लेकर विरोध, बहिष्कार की मांग और राजनीतिक आलोचना का सामना कर चुके हैं।
आमिर खान और कियारा आडवाणी से जुड़ा विवाद क्या था?
2022 में एक छोटे वित्तीय बैंक का करीब 50 सेकंड का ‘बदलाव हमसे है’ विज्ञापन भी विवाद में आया। इसमें आमिर खान और कियारा आडवाणी नवविवाहित जोड़े के रूप में नजर आए। आमिर खान ने ऐसे पति की भूमिका निभाई जो पत्नी के घर रहने का फैसला करता है। इसकी वजह यह दिखाई गई कि कियारा आडवाणी के किरदार के पिता दिव्यांग हैं। घर में प्रवेश के समय कियारा का किरदार आमिर खान से पहले घर में प्रवेश करने के लिए कहता है। विज्ञापन में आमिर खान कहते हैं कि बैंकिंग की हर पुरानी परंपरा पर सवाल किया जाता है, ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल सके।
विज्ञापन जारी होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराओं का मजाक उड़ाने वाला बताया। फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत कई प्रमुख लोगों ने भी विज्ञापन की आलोचना की।
सोशल मीडिया पर बैक का बहिष्कार करने का अभियान चला और कुछ लोगों ने बैंक में अपने खाते बंद करने की धमकी भी दी। विरोध बढ़ने के बाद बैंक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से विज्ञापन हटा लिया और सफाई दी कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना उसका उद्देश्य नहीं था।
आलिया भट्ट के किस सावल से हुआ था विवाद?
2021 में एक कपड़ों के ब्रांड के महिला ब्राइडल ब्रांड का विज्ञापन विवादों में आया था। इसमें अभिनेत्री आलिया भट्ट नजर आई थीं। विज्ञापन में आलिया भट्ट को एक हिंदू शादी के मंडप में दिखाया गया था, जहां वह विवाह की रस्मों का इंतजार कर रही थीं। विज्ञापन का फोकस इस बात पर था कि भारत में लड़कियों को अक्सर बोझ या ऐसी जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाता है, जिसे शादी के बाद दूसरे परिवार को सौंप दिया जाता है।
विज्ञापन में आलिया भट्ट कन्यादान की परंपरा पर सवाल उठाती हैं। सवाल यह था कि क्या आधुनिक समय में भी बेटियों को ‘दान’ करने की परंपरा जारी रहनी चाहिए? विज्ञापन का संदेश था कि बेटियां किसी की संपत्ति नहीं हैं और उन्हें दान करने के बजाय उनका सम्मान किया जाना चाहिए। इसी विचार को ‘कन्यामान’ के जरिए सामने रखा गया था।
लेकिन सोशल मीडिया के एक वर्ग ने इसे हिंदू विवाह की परंपराओं पर हमला बताया। इसे ‘वोक’ विज्ञापन कहकर भी आलोचना की गई और बहिष्कार की मांग उठी। विवाद के बीच एक हिंदू संगठन ने नवी मुंबई में कंपनी के स्टोर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विज्ञापन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
'एकत्वम' विज्ञापन पर विवाद
2020 में एक ज्वैलरी ब्रांड का ‘एकत्वम’ अभियान भी बड़े विवाद में रहा। करीब 46 सेकंड के इस विज्ञापन में एक हिंदू महिला को मुस्लिम परिवार में दिखाया गया था। विज्ञापन में उनकी मुस्लिम सास अपनी बहू के लिए हिंदू परंपरा के अनुसार गोद भराई की रस्म आयोजित करती है। यानी कहानी में एक मुस्लिम परिवार को अपनी हिंदू बहू के लिए उसकी परंपरा के अनुसार रस्म करते हुए दिखाया गया था। विज्ञापन के विरोध में एक वर्ग ने इसे ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने वाला बताया। सोशल मीडिया पर इसके बहिष्कार की मांग उठने लगी।
विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने विज्ञापन वापस ले लिया। कंपनी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों, स्थानीय समुदायों और परिवारों के एक साथ आने और मुश्किल समय में एकता की खूबसूरती को दिखाना था। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी विज्ञापन का समर्थन किया और बहिष्कार की मांग करने वालों की आलोचना की थी।
करवा चौथ विज्ञापन पर विवाद
2021 में करवा चौथ पर आए एक विज्ञापन को लेकर भी विवाद हुआ। इस विज्ञापन में एक समलैंगिक जोड़े को साथ में अपना पहला करवा चौथ मनाते हुए दिखाया गया था। विज्ञापन में दो महिलाएं साथ में करवा चौथ का व्रत रखने की तैयारी करती हैं। अंत में दोनों पारंपरिक तरीके से छलनी के जरिए एक-दूसरे को देखती हैं।
मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विज्ञापन पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे आपत्तिजनक बताया और विज्ञापन नहीं हटाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद कंपनी ने अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल से अभियान वापस ले लिया और बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसे लोगों की भावनाओं को अनजाने में ठेस पहुंचने का अफसोस है। बाद में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा था कि बढ़ती सार्वजनिक असहिष्णुता के कारण कंपनी को विज्ञापन हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मंगलसूत्र विज्ञापन पर विवाद
2021 में ‘रॉयल बंगाल मंगलसूत्र’ अभियान को लेकर भी विवाद हुआ। मंगलसूत्र भारत में शादी से जुड़ा एक प्रमुख प्रतीक है, लेकिन इस अभियान में इसे आधुनिक और फैशन-केंद्रित अंदाज में पेश किया गया। अभियान की एक तस्वीर में एक महिला मंगलसूत्र पहने हुए ब्लैक ब्रा में दिखाई दी। उसके साथ एक शर्टलेस पुरुष मॉडल था। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया।
आलोचकों ने आरोप लगाया कि विज्ञापन में मंगलसूत्र जैसे पारंपरिक वैवाहिक प्रतीक का यौनिक चित्रण किया गया है। कुछ लोगों ने इसे अश्लील और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। विवाद बढ़ने पर विज्ञापन वापस ले लिया गया। कंपनी ने कहा था कि अभियान का उद्देश्य समावेशिता और सशक्तिकरण पर बातचीत शुरू करना था। लेकिन कंपनी ने यह भी कहा कि वह इस बात से बेहद दुखी है कि विज्ञापन से समाज के एक वर्ग की भावनाएं आहत हुईं।
दिवाली विज्ञापन में 'दामोदर' नाम पर विवाद
2022 में एक चॉकलेट कंपनी के दिवाली विज्ञापन को लेकर भी विवाद हुआ। कंपनी ने दिवाली गिफ्ट पैक के जरिए एक ऐसी तकनीक पेश की थी, जिसके माध्यम से छोटे दुकानदार और दीया बेचने वाले अपने कारोबार को ऑनलाइन ला सकते थे।
विज्ञापन में एक डॉक्टर एक बुजुर्ग दीया विक्रेता के पास जाते हैं। वे उन्हें चॉकलेट का पैक देते हैं और बताते हैं कि पैकेट पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके वे अपना कारोबार ऑनलाइन ला सकते हैं। विज्ञापन के अंत में डॉक्टर उस बुजुर्ग विक्रेता को ‘दामोदर’ नाम से संबोधित करते हैं। यहीं से विवाद शुरू हुआ, क्योंकि कुछ लोगों ने ‘दामोदर’ नाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता दामोदरदास मोदी के नाम से जोड़कर देखा। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह दावा किया कि विज्ञापन प्रधानमंत्री के परिवार की पृष्ठभूमि पर निशाना साध रहा है।