मालेगांव ब्लास्ट केस में पहली बार आया था 'हिंदू आतंकवाद' का नाम
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9 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
असीमानंद का नाम भी शामिल
जिसके बाद 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के अलावा फरवरी 2007 में हुए समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट का प्रमुख आरोपी असीमानंद का नाम भी शामिल था।
22 मई 2013 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उस वक्त की पहली चार्जशीट में एनआईए ने असीमानंद और पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित का नाम नहीं था।
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धमाकों में 37 लोगों की मौत
तब एनआईए ने मुंबई की विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में कट्टर हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर के नाम लिया था। इन सभी पर साजिश रच कर धमाकों को अंजाम देने के आरोप लगाए गए हैं। इन धमाकों में 37 लोगों की मौत हो गई थी।
इस मामले में प्रमुख आरोपी लोकेश शर्मा समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में भी मुख्य आरोपी है। उसे मालेगांव धमाके में 2013 के शुरू में गिरफ्तार किया गया था। लोकेश ने आतंकी संगठन को धमाकों को अंजाम देने के लिए मदद मुहैया कराई थी। एनआईए के मुताबिक चौधरी भी मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। मालूम हो कि मुंबई पुलिस के आतंक रोधी दस्ते (एटीएस) ने इस मामले में नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था।
असीमानंद के बयान से आया था अहम मोड़
मामला एनआईए के पास पहुंचने पर मालेगांव धमाकों की जांच में तब नया मोड़ आ गया, जब अभिनव भारत संगठन के सदस्य स्वामी असीमानंद ने इकबालिया बयान में कहा था कि ब्लास्ट को हिंदूवादी संगठन ने अंजाम दिया।
साध्वी प्रज्ञा को लगा था कोर्ट से झटका, जमानत याचिका की थी खारिज
28 जून, 2016 को मुंबई में स्पेशल एनआईए अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। पिछले सप्ताह सध्वी की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए आज की तारीख तय की थी। साध्वी प्रज्ञा पर 2008 में मालेगांव में हुए धमाकों में हाथ होने का आरोप था, हालांकि एनआईए ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी।
साथ ही एनआईए ने प्रज्ञा की जमानत याचिका की भी खिलाफत नहीं की थी। जांच एजेंसी एनआईए का तब मानना था कि जांच में कही भी आरोपी साध्वी प्रज्ञा का कोई रोल नजर नहीं आया। प्रज्ञा के अलावा शिव नारायण कलसांगड़ा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा और धान सिंह चौधरी के खिलाफ दर्ज आरोप हटा लिए गए थे।
अप्रैल 2017 में पुरोहित ने खटखटाया था SC का दरवाजा
2008 मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में फंसे कर्नल श्रीकांत पुरोहित ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोप में फंसीं साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी थी, जबकि पुरोहित की याचिका ठुकरा दी।
आपको बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने पुरोहित द्वारा दायर जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था। 28 जनवरी, 2017 को एनआईए की एक स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल प्रसाद पुरोहित की जमानत याचिका नामंजूर कर दी थी जिसके बाद दोनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।
बता दें कि पुरोहित ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। कर्नल पुरोहित ने बगैर चार्जशीट दाखिल किए लंबे समय से जेल में रखे जाने को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि कर्नल पुरोहित को जिन आरोपों के कारण सात साल जेल में गुजारने पड़े उनमें प्रमुख समझौता एक्सप्रेस धमाका है।