Odisha: 'व्यावसायिक लाभ के लिए भगवान जगन्नाथ के नाम का दुरुपयोग कर रही हैं ममता', पुरी महंत ने साधा निशाना
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ के नाम का दीघा में नया मंदिर बनाकर व्यावसायिक फायदा उठाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ‘जगन्नाथ धाम’ नाम सिर्फ पुरी के लिए है, दीघा के लिए नहीं।
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पश्चिम बंगाल के दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने ममत बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर भगवान जगन्नाथ के नाम का व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धार्मिक भावना के बिना ही दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ नाम दे दिया, जो उचित नहीं है।
शंकराचार्य ने कहा कि बंगाल के श्रद्धालुओं के कारण पुरी की अर्थव्यवस्था चलती है। होटल, सेवायत और व्यापारी सभी को लाभ होता है। ममता बनर्जी जानती हैं कि बंगाल के श्रद्धालु पुरी आते हैं और पैसा खर्च करते हैं। इसलिए उन्होंने दीघा में नया मंदिर बनवाया ताकि बंगाल का पैसा ओडिशा न आए। 'धाम' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ पुरी जैसे धार्मिक स्थलों के लिए किया जाता है, दीघा के लिए नहीं।
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इस्कॉन पर लगाया धर्मशास्त्रों के उल्लंघन का आरोप
साथ ही एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने इस्कॉन (ISKCON) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वे भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और अन्य पर्व तय तिथियों के अनुसार न मनाकर धर्मशास्त्रों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्कॉन को यह सब बंद करना चाहिए।
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दीघा मंदिर उद्घाटन से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि 30 अप्रैल 2025 को पश्चिम बंगाल सरकार ने दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन किया और उसे ‘जगन्नाथ धाम’ नाम दिया। इसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी और श्रीमंदिर के सेवायतों ने भी इस पर आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि ‘धाम’ का दर्जा सिर्फ पुरी को मिलना चाहिए।