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पुरी जगन्नाथ मंदिर का खजाना खुला: CCTV की निगरानी में हुई डिजिटल मैपिंग,आभूषणों का 1978 की सूची से हुआ मिलान

Tue, 12 May 2026 11:12 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पुरी
पीटीआई, पुरी Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 12 May 2026 11:12 PM IST
सार

48 साल के इंतजार के बाद पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का मिलान 1978 की सूची से एकदम सटीक पाया गया है। 3D मैपिंग और विशेषज्ञों की मदद से हो रही यह डिजिटल गणना मंदिर की विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। गणना का अगला चरण 19 मई को निर्धारित किया गया है।

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puri jagannath temple ratna bhandar inventory matching 1978 list official news hindi
पुरी जगन्नाथ मंदिर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गणना का काम सुचारू रूप से जारी है। मंगलवार को गणना प्रक्रिया का 11वां दिन था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खजाने में मौजूद आभूषण और कीमती सामान 1978 की सूची से पूरी तरह मेल खाते हैं। यह सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी खबर है।
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श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीम ने मंगलवार शाम 4:27 बजे आंतरिक कक्ष में प्रवेश किया। गणना का काम रात 8:44 बजे तक चला। पाढ़ी खुद 25 मार्च से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। यह गणना 48 साल के लंबे अंतराल के बाद की जा रही है। अब तक कुल 64 घंटे और 18 मिनट तक गणना का काम हो चुका है।
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सुरक्षा और तकनीक का कड़ा पहरा
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरे रत्न भंडार की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। साथ ही हर पल की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। पाढ़ी ने बताया कि भंडार में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन सुरक्षा जांच की जाती है। ओडिशा सरकार की ओर से अनुमोदित मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का सख्ती से पालन हो रहा है।
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डिजिटल मैपिंग और विशेषज्ञों की मदद
भविष्य के दस्तावेजों के लिए सभी कीमती सामानों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इसमें उन्नत 3D मैपिंग का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी भी की जा रही है। काम में सटीकता के लिए रत्न विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें काम पूरा करने की जल्दबाजी नहीं है, बल्कि वे शुद्धता और पारदर्शिता पर ध्यान दे रहे हैं। 1978 में इस काम में 72 दिन लगे थे।

श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था
गणना के दौरान भगवान की दैनिक रस्मों और श्रद्धालुओं के दर्शन में कोई बाधा नहीं आने दी गई है। सुरक्षा कारणों से भक्त वर्तमान में बाहरी बैरिकेड से ही दर्शन कर पा रहे हैं। गणना का अगला चरण 19 मई को निर्धारित किया गया है। इसके बाद 21, 23, 26, 28, 29 और 30 मई को भी काम जारी रहेगा।

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