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Pune Porsche Case: पुणे पोर्श मामले के आरोपी पर किशोर की तरह मुकदमा चलेगा, जुवेनाइल बोर्ड का फैसला
Tue, 15 Jul 2025 02:14 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 15 Jul 2025 02:14 PM IST
सार
किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उस पर किशोर की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी लड़के को वयस्क मानने की पुलिस की याचिका खारिज कर दी।
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सांकतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
पुणे पोर्श कार हादसे के मामले में आरोपी पर किशोर की तरह मुकदमा चलेगा। किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) ने मंगलवार को यह आदेश दिया। 17 वर्षी आरोपी ने बीते साल पुणे में तेज रफ्तार कार से दो लोगों को कुचल दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गई थी। यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा था।
लग्जरी कार से मोटरसाइकिल सवार दो युवाओं को टक्कर मारने का आरोप
बीते साल 19 मई को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में आरोपी किशोर ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दो आईटी पेशेवर अनीश अवधिया और उसकी दोस्त अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी। पुणे पुलिस ने पिछले साल आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की मांग की थी, क्योंकि उसने एक जघन्य कृत्य किया था। आरोपी पक्ष की तरफ से सबूतों से छेड़छाड़ करने की भी कोशिश की गई थी। हालांकि 25 जून, 2024 को, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने लड़के को रिहा करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किशोर न्याय बोर्ड द्वारा आरोपी को सुधार गृह भेजने का आदेश अवैध था और किशोरों से संबंधित कानून का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: कांवड़ यात्रा पथ पर दुकानों में अनिवार्य QR कोड मामले में अदालत सख्त, यूपी से 22 तक मांगा जवाब
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किशोर न्याय बोर्ड ने पुलिस की याचिका खारिज की
अब किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उस पर किशोर की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी लड़के को वयस्क मानने की पुलिस की याचिका खारिज कर दी। सड़क हादसे के बाद आरोपी किशोर को तुरंत ही जमानत मिल गई थी। पुलिस ने आरोपी नाबालिग को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त पर तुरंत जमानत दे दी थी, जिसने विवाद खड़ा कर दिया था।
मामले को लेकर खूब हुआ विवाद
पुणे पोर्श मामले का आरोपी पुणे के एक प्रमुख उद्योगपति का बेटा है। आरोपी के परिजनों पर अपने बेटे को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। आरोपी पर नशे की हालत में मोटरसाइकिल सवारों को टक्कर मारने के आरोप लगे। सड़क हादसे के तुरंत बाद आरोपी के परिजनों पर उसे बर्गर खिलाने के आरोप भी लगे ताकि खून में एल्कोहल की मात्रा को छिपाया जा सके। साथ ही जांच में शामिल डॉक्टरों से भी सांठगांठ के आरोप लगे। परिजनों पर आरोप है कि आरोपी की मां ने जांच के लिए गए बेटे के सैंपल से अपना ब्लड सैंपल बदला। इस मामले में आरोपी की मां की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में किशोर न्याय बोर्ड की भी आलोचना हुई क्योंकि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को 300 शब्दों का निबंध लिखकर जमानत देने की शर्त रखी।
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लग्जरी कार से मोटरसाइकिल सवार दो युवाओं को टक्कर मारने का आरोप
बीते साल 19 मई को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में आरोपी किशोर ने अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मोटरसाइकिल सवार दो आईटी पेशेवर अनीश अवधिया और उसकी दोस्त अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी। पुणे पुलिस ने पिछले साल आरोपी पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की मांग की थी, क्योंकि उसने एक जघन्य कृत्य किया था। आरोपी पक्ष की तरफ से सबूतों से छेड़छाड़ करने की भी कोशिश की गई थी। हालांकि 25 जून, 2024 को, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने लड़के को रिहा करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि किशोर न्याय बोर्ड द्वारा आरोपी को सुधार गृह भेजने का आदेश अवैध था और किशोरों से संबंधित कानून का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।
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किशोर न्याय बोर्ड ने पुलिस की याचिका खारिज की
अब किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए उस पर किशोर की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी लड़के को वयस्क मानने की पुलिस की याचिका खारिज कर दी। सड़क हादसे के बाद आरोपी किशोर को तुरंत ही जमानत मिल गई थी। पुलिस ने आरोपी नाबालिग को सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त पर तुरंत जमानत दे दी थी, जिसने विवाद खड़ा कर दिया था।
मामले को लेकर खूब हुआ विवाद
पुणे पोर्श मामले का आरोपी पुणे के एक प्रमुख उद्योगपति का बेटा है। आरोपी के परिजनों पर अपने बेटे को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। आरोपी पर नशे की हालत में मोटरसाइकिल सवारों को टक्कर मारने के आरोप लगे। सड़क हादसे के तुरंत बाद आरोपी के परिजनों पर उसे बर्गर खिलाने के आरोप भी लगे ताकि खून में एल्कोहल की मात्रा को छिपाया जा सके। साथ ही जांच में शामिल डॉक्टरों से भी सांठगांठ के आरोप लगे। परिजनों पर आरोप है कि आरोपी की मां ने जांच के लिए गए बेटे के सैंपल से अपना ब्लड सैंपल बदला। इस मामले में आरोपी की मां की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में किशोर न्याय बोर्ड की भी आलोचना हुई क्योंकि किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी को 300 शब्दों का निबंध लिखकर जमानत देने की शर्त रखी।