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तैयारी: बदला कोरोना का टीका, ओमिक्रॉन वैरिएंट से भी बचाएगा,आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति देने का प्रस्ताव मंजूर

Sat, 11 May 2024 02:30 PM IST
शिव शरण शुक्ला परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 11 May 2024 02:30 PM IST
सार

पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने हाल ही में इस नए अपडेट टीके को भारत में बिक्री और वितरण की अनुमति मांगी थी। साथ ही कंपनी ने अमेरिका में चल रहे नैदानिक परीक्षण और प्रीक्लिनिकल अध्ययन की रिपोर्ट भी साझा की, जिसके आधार पर समिति ने निर्णय लिया।

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proposal to allow emergency use of anti-corona vaccine made on new formula in India was approved
वैक्सीन - फोटो : istock

विस्तार

नए फॉर्मूले पर बने कोरोना रोधी टीके को भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति देने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है। यह पहला ऐसा टीका है जो कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन और एक्सबीबी स्वरूप से बचाव करने में सक्षम है। बीते सप्ताह केंद्र सरकार की विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) ने कुछ शर्तों के साथ एडजुवेंटेड 2023-2024 फॉर्मूले पर आधारित इस टीके को अनुमति देने की सिफारिश की है। 

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पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने हाल ही में इस नए अपडेट टीके को भारत में बिक्री और वितरण की अनुमति मांगी थी। साथ ही कंपनी ने अमेरिका में चल रहे नैदानिक परीक्षण और प्रीक्लिनिकल अध्ययन की रिपोर्ट भी साझा की, जिसके आधार पर समिति ने निर्णय लिया। दरअसल कुछ समय पहले अमेरिकी कंपनी नोवा वैक्स के कोरोना टीके को भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिली। इसका उत्पादन भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने किया और पूरी दुनिया में करीब 200 करोड़ खुराक उपलब्ध कराईं। अब इसी नोवा वैक्स टीका को नए फॉर्मूला के जरिए अपडेट किया है जो कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन और एक्सबीबी.1.5 स्वरूप से बचाव में असरदार है। नोवावैक्स के अलावा भारत में एस्ट्राजेनेका कंपनी का कोविशील्ड टीका उपलब्ध कराने का अधिकार सीरम कंपनी के पास है जो इस समय काफी चर्चाओं में है।
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देश में चौथे चरण का अध्ययन करेगी कंपनी
विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीके को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के जरिये होगा। फिलहाल कंपनी से देश में चौथे चरण का अध्ययन कराने के लिए कहा है जिसकी रिपोर्ट तीन माह के भीतर समिति के आगे पेश करनी होगी। बूस्टर यानी एहतियाती खुराक के लिए इस टीका का इस्तेमाल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की आबादी में किया जा सकता है। समिति ने यह भी शर्त रखी है कि जो स्वास्थ्य कर्मचारी यह टीका लगाने वाले हैं उन्हें फैक्टशीट और मार्गदर्शन मिलना बहुत जरूरी है।
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चूहों, बंदरों पर असरदार
सीरम ने अपने प्रस्ताव में प्रीक्लीनिकल अध्ययन का डाटा भी साझा किया है। इसकी समीक्षा में समिति ने पाया कि कोरोना के बीए.2, बीए.5 और एक्सबीबी.1.5 सहित ओमीक्रॉन वेरिएंट को लेकर चूहों और बंदरों पर परीक्षण किया गया। इनमें सामान्य खुराक के साथ-साथ बूस्टर यानी एहतियाती खुराक का परीक्षण भी शामिल है। इस अध्ययन में एक्सबीबी.1.5 स्वरूप के खिलाफ पर्याप्त एंटीबॉडी विकसित होना पाया गया। साथ ही बंदरों में कोरोना के साल 2023 में सामने आए जेएन 1 वेरिएंट को लेकर भी परीक्षण किया गया। इस दौरान ओमिक्रॉन और उसके वंश से जुड़े उप स्वरूपों पर यह टीका असरदार मिला है।

डब्ल्यूएचओ की सूची में भी शामिल
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस अपडेट टीका को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया है।

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