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असम: कछुए को काटकर बेचना चाहता था शख्स, महिला प्रोफेसर की सूझबूझ से बची जान
Mon, 30 Nov 2020 05:38 PM IST
दीप्ति मिश्रा
पीटीआई, गुवाहाटी
पीटीआई, गुवाहाटी
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Mon, 30 Nov 2020 05:38 PM IST
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कछुआ
- फोटो : Social media
असम में एक विलुप्त प्राय दुर्लभ प्रजाति के मछुए को मछली बाजार में बेचने से बचाया गया है।असम में एक प्रोफेसर की बदौलत आईसीयूएन की लाल सूची में दर्ज निलस्सोनिया हुरुम प्रजाति के एक कछुए को मछली बाजार में बेचे जाने से सोमवार को बचा लिया गया।
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एक अधिकारी ने बताया कि असम विश्वविद्यालय में ‘लाइफ साइंस एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स’ विभाग की प्रमुख सरबानी गिरि मछली बाजार गई थी और उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति ‘निलस्सोनिया हुरुम’ प्रजाति का जीवित कछुआ बेच रहा था।
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चार हजार रुपये देकर बचाया कछुआ
एक वन अधिकारी ने बताया कि वह व्यक्ति कछुए को टुकड़ों में बांटकर बेचना चाहता था, लेकिन गिरि ने उसे ऐसा करने से तत्काल रोक दिया और उसे 4,000 रुपये में जिंदा खरीदने का प्रस्ताव रखा। व्यक्ति ने कछुआ गिरि को दे दिया। गिरि ने कछुए को घर लाने के बाद सिलचर में कछार वन प्रभाग को फोन किया ताकि उसे उसके प्राकृतिक आवास में भेजा जा सके।
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वनकर्मियों ने प्रोफेसर का जताया आभार
वनकर्मियों ने प्रोफेसर से कछुआ लिया और उसकी जान बचाने के लिए उन्हें धन्यवाद किया। वन विभाग के अधिकारी कछुए को अपने साथ प्राकृतिक आवास प्रदान करने के लिए ले गए।
दक्षिण एशिया में पाई जाती है यह प्रजाति
कछुए की यह प्रजाति दक्षिण एशिया में पाई जाती है और आईयूसीएन (प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ) ने इस प्रजाति को खतरे के मद्देजनर लाल सूची में रखा है।