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विश्व शांति दिवस : स्वामी अग्निवेश के 83वें जन्मदिन के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन

Tue, 21 Sep 2021 09:17 PM IST
Amit Mandal डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Amit Mandal Updated Tue, 21 Sep 2021 09:17 PM IST
सार

सार्वदेशिक सभा के प्रधान प्रो. विट्ठलराव आर्य ने कहा कि स्वामी जी (अग्निवेश) ने अपनी प्रोफेसर की नौकरी को त्यागकर स्वामी दयानन्द के कार्यों के लिए अपने आपको समर्पित कर दिया।

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Prof. Vitthalrao Arya says Swami Agnivesh was the greatest social reformer of the present times
Tribute to Swami Agnivesh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

स्वामी अग्निवेश वर्तमान काल के सबसे बड़े समाज सुधारकों में से एक थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों, गरीबों और बंधुआ मजदूरों की स्वतंत्रता के लिए काम किया। उनके इन प्रयासों से लाखों लोगों को मुक्ति मिली और उनकी जिंदगी से दासता का अंत हुआ। यह कहना है प्रो.विट्ठलराव आर्य का जिन्होंने मंगलवार को स्वामी अग्निेश को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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स्वामी अग्निवेश के 83वें जन्मदिवस पर अग्निलोक आश्रम बहलपा जिला गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में सार्वदेशिक सभा के प्रधान प्रो. विट्ठलराव आर्य ने कहा कि स्वामी जी (अग्निवेश) ने अपनी प्रोफेसर की नौकरी को त्यागकर स्वामी दयानन्द के कार्यों के लिए अपने आपको समर्पित कर दिया। उन्होंने इसे केवल आदर्श के रूप में ही नहीं अपनाया, बल्कि उसे जमीन पर उतारने के लिए अपनी जिंदगी के सबसे महत्त्वपूर्ण वर्ष दान कर दिए। उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश ने अपने विचारों एवं कार्यों से आर्य समाज की पहचान विश्व स्तर पर बनाई।
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इस अवसर पर बेटी बचाओ अभियान की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम आर्या ने कहा कि स्वामी अग्निवेश अपनी पहचान गरीबों, मजदूरों के उद्धार तथा कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज को बुलन्द करके बनाई। इसके लिए वे केवल देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जाने-पहचाने गए। बौद्ध भिक्षु आचार्य ऐशि फुंतशोक ने कहा कि स्वामी अग्निवेश साम्प्रदायिकता के विरोधी तथा शांति के पक्षधर थे। उन्होंने सभी धर्मों के बीच समन्वय कर विश्व स्तर पर शांति स्थापित करने का पूरा प्रयास किया।
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इस कार्यक्रम में उन 83 श्रमिकों को सम्मानित भी किया गया जिसे स्वामी अग्निवेश ने अपनी कोशिशों से मुक्त कराया था। इन श्रमिकों ने भी अपना संस्मरण लोगों के साथ साझा किया और बताया कि अगर स्वामी ने उन्हें मुक्ति न दिलाई होती तो वे आज भी उसी प्रकार की दासता भरी जिंदगी जी रहे होते। इन श्रमिकों ने कहा कि समाज में एक नहीं, सौ स्वामी अग्निवेशों की आवश्यकता है।

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