Privatization: क्या 2000 करोड़ रुपये में बिकेगी सैन्य वाहन बनाने वाली 56,000 करोड़ की कंपनी!
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विस्तार
रक्षा और घरेलू क्षेत्र के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल तैयार करने वाली कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के निजीकरण को लेकर कर्मचारी संगठन ने आवाज उठाई है। कर्मियों का कहना है, केंद्र सरकार सैन्य वाहन बनाने वाली 56,000 करोड़ रुपये की कंपनी को मात्र 2000 करोड़ रुपये में बेचना चाहती है। सरकार की निजीकरण पॉलिसी के खिलाफ श्रमिक, पलक्कड़ में 31 माह से संघर्ष कर रहे हैं। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार के मुताबिक, 41 आयुध कारखानों को सात कंपनियों में तब्दील करने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बाकी बचे उद्योगों का भी अस्तित्व खतरे में है।
श्रीकुमार बताते हैं, सरकार जानबूझकर पब्लिक सेक्टर को खत्म कर रही है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) में डिफेंस से जुड़े उत्पादों का निर्माण होता है। सरकार ने एक धीमी प्रक्रिया के जरिए इस उपक्रम को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर दी। बीईएमएल के कर्मचारी कई वर्षों से इसलिए संघर्षरत हैं, ताकि सरकार इस कंपनी को निजी क्षेत्र को न बेचे। बाकी बचे उपक्रमों पर भी तलवार लटक रही है। अगर उपक्रम घाटे में होता है, तो सरकार उसका ठीकरा कर्मियों के सिर पर फोड़ती है। किसी भी उपक्रम के घाटे में जाने का कारण वहां के कर्मचारी नहीं होते। उस उपक्रम से तो उनका घर चलता है, ऐसे में वे क्यों चाहेंगे कि वह कंपनी या उद्योग बंद हो। इसके लिए सरकार जिम्मेदार होती है। कभी तो समय पर काम नहीं मिलता। कभी कहा जाता है कि ओपन मार्केट में आना पड़ेगा। 41 आयुध कारखानों के साथ भी तो यही हो रहा है। आर्मी जब काम नहीं देगी, तो वे कारखाने कैसे जीवित रहेंगे। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से कहा जाता है कि प्राइवेट कंपनियों से सामान खरीदो। टेंडर में ऐसी शर्तें शामिल करो, ताकि आयुध कारखानें, उस प्रक्रिया में भाग ही न ले सकें।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कहा जाता है कि तुम प्राइवेट कंपनी का मुकाबला नहीं कर सकते। निजीकरण होने के बाद इन उपक्रमों में आउटसोर्स के जरिए सस्ती लेबर मिलती है। नए लड़कों को पांच-छह सौ रुपये में काम पर रख लेते हैं, जब मर्जी निकाल देते हैं। बाकी किसी की तरह की कोई कोई सुविधा नहीं मिलती। ऑर्डिनेंस और दूसरे पब्लिक सेक्टर के उद्योगों को टेंडर प्रक्रिया से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में जब काम ही नहीं होगा, तो वे कारखाने किस तरह से खुद को बचाकर रखेंगे। डेढ़ दशक से कोई नई मशीन नहीं आ रही है। जानबूझकर नई तकनीक से दूरी बनाई जा रही है। जब ये सब होगा तो निजी क्षेत्र का मुकाबला कैसे कर सकते हैं।
ज्वाइंट एक्शन काउंसिल के अंतर्गत ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण के खिलाफ जनवरी, 2021 से विरोध प्रदर्शन शुरू कर रखा है। इस कड़ी में मानव श्रृंखला, कैंडल मार्च और धरने आयोजित किए जा रहे हैं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन की राज्य समिति के सदस्य एसबी राजू के मुताबिक, निजीकरण के खिलाफ महामहिम राष्ट्रपति को कर्मचारियों ने एक लाख हस्ताक्षर भेजे थे। इसमें अपील की गई थी कि बीईएमएल का निजीकरण न किया जाए। केंद्र सरकार, कार्मिकों की सालाना समीक्षा करने की योजना बना रही है। इसके चलते कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लगा है। 50 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट देने की तैयारी है। हालांकि कर्मचारियों ने इस तरह का आदेश जारी करने के प्रस्ताव को केंद्रीय श्रम आयुक्त के समक्ष चुनौती दी है। बीईएमएल, मेट्रो कोच भी बनाती रही है। चीन समेत कई देशों की कम्पनियों को प्रतिस्पर्धा में पछाड़ कर बीईएमएल मुंबई मेट्रो कोरिडोर का ऑर्डर हासिल किया था।