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Durand Cup: 134वें डूरंड कप की ट्रॉफी का राष्ट्रपति ने किया अनावरण, बोलीं- फुटबॉल एक खेल नहीं, बल्कि जुनून है
Fri, 04 Jul 2025 10:43 PM IST
पवन पांडेय
एन. अर्जुन, अमर उजाला, कोलकाता/नई दिल्ली
एन. अर्जुन, अमर उजाला, कोलकाता/नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 04 Jul 2025 10:43 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में डूरंड कप टूर्नामेंट 2025 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें हरी झंडी दिखाई। राष्ट्रपति ने कहा कि डूरंड कप जैसे आयोजन न केवल खेल भावना को बढ़ावा देते हैं बल्कि फुटबॉल खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को विकसित करने में भी मदद करते हैं, जिससे उन्हें आगे बढ़ने के लिए एक मंच मिलता है।
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राष्ट्रपति मुर्मू ने डूरंड कप टूर्नामेंट की ट्रॉफियों का किया अनावरण
- फोटो : X @rashtrapatibhvn
विस्तार
विरासत और राष्ट्रीय गौरव से भरे इस ऐतिहासिक क्षण में, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) से 134वें इंडियनऑयल डूरंड कप, एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट, औपचारिक रूप से प्रारंभ करते हुए तीन प्रतिष्ठित डूरंड कप ट्रॉफियों को रवाना किया।
यह लगातार दूसरा वर्ष है जब माननीय राष्ट्रपति ने यह प्रतीकात्मक कार्य किया है, जो डूरंड कप की खेल, सेवा और राष्ट्रभक्ति के संगम के रूप में स्थायी महत्व की पुष्टि करता है। यह समारोह स्वतंत्रता के बाद की उस गौरवशाली परंपरा को भी जारी रखता है, जिसमें देश के सर्वोच्च सेनापति की डूरंड कप से सीधी भागीदारी रही है। आरबीसीसी में आयोजित इस समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह, और ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ तथा डूरंड कप आयोजन समिति (डीसीओसी) के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी उपस्थित थे। इस अवसर पर अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय फुटबॉलर संदेश झिंगन भी मौजूद थे।
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इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, डूरंड कप भारत की फुटबॉल विरासत और सशस्त्र बलों की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि जुनून है। फुटबॉल रणनीति, सहनशक्ति और सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। डूरंड कप जैसे आयोजन खेल की भावना को बढ़ावा देने के साथ-साथ अगली पीढ़ी के फुटबॉल खिलाड़ियों को विकसित करने का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने डूरंड कप की भावना को जीवित रखने और उसे प्रोत्साहित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की।
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President Droupadi Murmu unveiled and flagged off the Trophies of the Durand Cup Tournament 2025 at a function held at Rashtrapati Bhavan. The President said that events like the Durand Cup not only foster the spirit of the game but also help develop the next generation of… pic.twitter.com/1S0qdsZvne
— President of India (@rashtrapatibhvn) July 4, 2025
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यह लगातार दूसरा वर्ष है जब माननीय राष्ट्रपति ने यह प्रतीकात्मक कार्य किया है, जो डूरंड कप की खेल, सेवा और राष्ट्रभक्ति के संगम के रूप में स्थायी महत्व की पुष्टि करता है। यह समारोह स्वतंत्रता के बाद की उस गौरवशाली परंपरा को भी जारी रखता है, जिसमें देश के सर्वोच्च सेनापति की डूरंड कप से सीधी भागीदारी रही है। आरबीसीसी में आयोजित इस समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह, और ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ तथा डूरंड कप आयोजन समिति (डीसीओसी) के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी उपस्थित थे। इस अवसर पर अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय फुटबॉलर संदेश झिंगन भी मौजूद थे।
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इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, डूरंड कप भारत की फुटबॉल विरासत और सशस्त्र बलों की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि जुनून है। फुटबॉल रणनीति, सहनशक्ति और सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। डूरंड कप जैसे आयोजन खेल की भावना को बढ़ावा देने के साथ-साथ अगली पीढ़ी के फुटबॉल खिलाड़ियों को विकसित करने का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने डूरंड कप की भावना को जीवित रखने और उसे प्रोत्साहित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की।
LIVE: President Droupadi Murmu addresses the commencement of the Durand Cup Tournament - 2025 https://t.co/VVFtNTObmy
— President of India (@rashtrapatibhvn) July 4, 2025
राष्ट्रपति मुर्मू ने डूरंड कप टूर्नामेंट की ट्रॉफियों को हरी झंडी दिखाई
- फोटो : X @rashtrapatibhvn
डूरंड कप हमारे सर्वोच्च परंपराओं का प्रतीक- सीडीएस
मुख्य रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने कहा, डूरंड कप हमारे सशस्त्र बलों और देश की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतीक है – साहस, अनुशासन और एकता की विरासत। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता के एक और अध्याय की शुरुआत पर हमें भारत की राष्ट्रपति की उपस्थिति का गौरव प्राप्त हुआ है। यह आयोजन खेल, सेवा और भारतीय भावना के अटूट संबंध को फिर से स्थापित करता है।'
यह भी पढ़ें - PM Modi: पीएम मोदी को त्रिनिदाद-टोबैगो का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला, कहा- यह हमारे विशेष संबंधों की गहराई
भारत की एकता में विविधता का उत्सव- आरसी तिवारी
ईस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी और डीसीओसी के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी ने युवा फुटबॉल प्रतिभाओं के लिए डूरंड कप के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, सशस्त्र बलों की ओर से भारतीय सेना द्वारा आयोजित डूरंड कप एक फुटबॉल टूर्नामेंट से कहीं अधिक है। यह भारत की एकता में
विविधता का उत्सव है, प्रतिस्पर्धा के माध्यम से चरित्र निर्माण का विश्वास है और अनुशासन, टीमवर्क और आत्मबल जैसे समय-सिद्ध मूल्यों के जरिए अगली पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व है।
सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव रहे हैं मना- झिंगन
कई बार राष्ट्रीय टीम की कप्तानी कर चुके संदेश झिंगन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, हम आज केवल एक ट्रॉफी का अनावरण नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस विरासत और सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता और बलिदान के बल पर भारतीय फुटबॉल की यात्रा को आकार दिया है – वह परंपरा है डूरंड कप।
जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं- भवनीश
दिल्ली क्षेत्र के जीओसी और डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी की स्टैंडिंग वर्किंग कमेटी के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने कहा, डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी लंबे समय से भारत में फुटबॉल को प्रोत्साहित करने की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतीक रही है। हम इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों को सफल और जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
मुख्य रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने कहा, डूरंड कप हमारे सशस्त्र बलों और देश की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतीक है – साहस, अनुशासन और एकता की विरासत। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता के एक और अध्याय की शुरुआत पर हमें भारत की राष्ट्रपति की उपस्थिति का गौरव प्राप्त हुआ है। यह आयोजन खेल, सेवा और भारतीय भावना के अटूट संबंध को फिर से स्थापित करता है।'
यह भी पढ़ें - PM Modi: पीएम मोदी को त्रिनिदाद-टोबैगो का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला, कहा- यह हमारे विशेष संबंधों की गहराई
भारत की एकता में विविधता का उत्सव- आरसी तिवारी
ईस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी और डीसीओसी के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी ने युवा फुटबॉल प्रतिभाओं के लिए डूरंड कप के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, सशस्त्र बलों की ओर से भारतीय सेना द्वारा आयोजित डूरंड कप एक फुटबॉल टूर्नामेंट से कहीं अधिक है। यह भारत की एकता में
विविधता का उत्सव है, प्रतिस्पर्धा के माध्यम से चरित्र निर्माण का विश्वास है और अनुशासन, टीमवर्क और आत्मबल जैसे समय-सिद्ध मूल्यों के जरिए अगली पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व है।
सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव रहे हैं मना- झिंगन
कई बार राष्ट्रीय टीम की कप्तानी कर चुके संदेश झिंगन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, हम आज केवल एक ट्रॉफी का अनावरण नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस विरासत और सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता और बलिदान के बल पर भारतीय फुटबॉल की यात्रा को आकार दिया है – वह परंपरा है डूरंड कप।
जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं- भवनीश
दिल्ली क्षेत्र के जीओसी और डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी की स्टैंडिंग वर्किंग कमेटी के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने कहा, डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी लंबे समय से भारत में फुटबॉल को प्रोत्साहित करने की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतीक रही है। हम इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों को सफल और जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को किया संबोधित
- फोटो : X @rashtrapatibhvn
इस बार पांच राज्यों में होगा मुकाबला
डूरंड कप, राष्ट्रपति कप और शिमला ट्रॉफी, ये तीनों प्रतिष्ठित ट्रॉफियां अब इस वर्ष की पांच मेज़बान राज्यों, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर, की बहु-शहर यात्रा पर रवाना होंगी। यह ट्रॉफी टूर जनता में उत्साह और सामुदायिक गौरव को प्रज्वलित करने का उद्देश्य लेकर टूर्नामेंट की 23 जुलाई 2025 से शुरूआत से पहले आयोजित किया जा रहा है। टूर्नामेंट का भव्य फाइनल 23 अगस्त 2025 को निर्धारित है।
यह भी पढ़ें - CJI: 'कॉलेजियम प्रणाली में रखेंगे पूर्ण पारदर्शिता, योग्यता पर नहीं होगा कोई समझौता', सीजेआई गवई का बयान
सपनों की विरासत, वादों का मंच
137 वर्षों से, डूरंड कप केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं रहा – यह भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा प्रतिभाओं के लिए लॉन्चपैड रहा है। भारत के कई दिग्गज फुटबॉलर, जिन्हें आज हर घर जानता है, ने अपने राष्ट्रीय करियर की शुरुआत डूरंड कप की पवित्र ज़मीन से की थी। इस टूर्नामेंट की सच्ची विरासत इसी वादे में निहित है – कि देश के हर कोने के अनजाने खिलाड़ी को खुद को साबित करने, पहचान बनाने और अपने सपनों को पाने का मौका मिले। इस वर्ष पहली बार डूरंड कप पांच राज्यों – पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर – में खेला जा रहा है। ऐसे समय में जब भारतीय फुटबॉल को नए नायकों और नई उम्मीद की तलाश है, डूरंड कप राष्ट्र निर्माण का मंच बना हुआ है – एक प्रतिस्पर्धात्मक अखाड़ा, जहां अकादमियों, सशस्त्र बलों की टीमों और देश के सबसे दूरदराज इलाकों के राज्य क्लबों के होनहार खिलाड़ी आगे आकर देश को प्रेरित करते हैं।
खेल, सेवा और बलिदान का उत्सव
डूरंड कप अनुशासन, एकता और खेल कौशल का प्रतीक है। आज का यह फ्लैग-ऑफ समारोह, जिसमें देश की शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रही, इस बात की पुष्टि करता है कि सशस्त्र बल पूरे भारत में प्रतिभाओं को निखारने और प्रतिस्पर्धी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए कितने समर्पित हैं। जैसे-जैसे ये ट्रॉफियां देश के फुटबॉल हृदय-स्थलों की यात्रा करेंगी, 134वां इंडियनऑयल डूरंड कप न केवल रोमांचक मुकाबले, बल्कि भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं में नए अध्याय जोड़ने का वादा करता है। मशाल जलाई जा चुकी है, मंच तैयार है – अब गांवों और शहरों में हजारों युवा खिलाड़ी इस टूर्नामेंट को केवल दर्शक
की नजर से नहीं, बल्कि सपने देखने वालों और भविष्य के चैंपियनों की नजर से देखेंगे।
डूरंड कप, राष्ट्रपति कप और शिमला ट्रॉफी, ये तीनों प्रतिष्ठित ट्रॉफियां अब इस वर्ष की पांच मेज़बान राज्यों, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर, की बहु-शहर यात्रा पर रवाना होंगी। यह ट्रॉफी टूर जनता में उत्साह और सामुदायिक गौरव को प्रज्वलित करने का उद्देश्य लेकर टूर्नामेंट की 23 जुलाई 2025 से शुरूआत से पहले आयोजित किया जा रहा है। टूर्नामेंट का भव्य फाइनल 23 अगस्त 2025 को निर्धारित है।
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सपनों की विरासत, वादों का मंच
137 वर्षों से, डूरंड कप केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं रहा – यह भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा प्रतिभाओं के लिए लॉन्चपैड रहा है। भारत के कई दिग्गज फुटबॉलर, जिन्हें आज हर घर जानता है, ने अपने राष्ट्रीय करियर की शुरुआत डूरंड कप की पवित्र ज़मीन से की थी। इस टूर्नामेंट की सच्ची विरासत इसी वादे में निहित है – कि देश के हर कोने के अनजाने खिलाड़ी को खुद को साबित करने, पहचान बनाने और अपने सपनों को पाने का मौका मिले। इस वर्ष पहली बार डूरंड कप पांच राज्यों – पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर – में खेला जा रहा है। ऐसे समय में जब भारतीय फुटबॉल को नए नायकों और नई उम्मीद की तलाश है, डूरंड कप राष्ट्र निर्माण का मंच बना हुआ है – एक प्रतिस्पर्धात्मक अखाड़ा, जहां अकादमियों, सशस्त्र बलों की टीमों और देश के सबसे दूरदराज इलाकों के राज्य क्लबों के होनहार खिलाड़ी आगे आकर देश को प्रेरित करते हैं।
खेल, सेवा और बलिदान का उत्सव
डूरंड कप अनुशासन, एकता और खेल कौशल का प्रतीक है। आज का यह फ्लैग-ऑफ समारोह, जिसमें देश की शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रही, इस बात की पुष्टि करता है कि सशस्त्र बल पूरे भारत में प्रतिभाओं को निखारने और प्रतिस्पर्धी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए कितने समर्पित हैं। जैसे-जैसे ये ट्रॉफियां देश के फुटबॉल हृदय-स्थलों की यात्रा करेंगी, 134वां इंडियनऑयल डूरंड कप न केवल रोमांचक मुकाबले, बल्कि भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं में नए अध्याय जोड़ने का वादा करता है। मशाल जलाई जा चुकी है, मंच तैयार है – अब गांवों और शहरों में हजारों युवा खिलाड़ी इस टूर्नामेंट को केवल दर्शक
की नजर से नहीं, बल्कि सपने देखने वालों और भविष्य के चैंपियनों की नजर से देखेंगे।