फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   President Droupadi Murmu CLEA CASGC 2024 global collaborations for environmental justice suggestion

CASGC 2024: 'न्याय की अवधारणा में पर्यावरण से जुड़ा इंसाफ भी हो'; राष्ट्रमंडल कॉन्फ्रेंस में बोलीं राष्ट्रपति

Sun, 04 Feb 2024 09:30 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 04 Feb 2024 09:30 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कानूनी चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा, सहयोग की भावना से आम चिंताओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने इंसाफ की अवधारणा में पर्यावरणीय न्याय को भी जोड़ने का आह्वान किया।

विज्ञापन
President Droupadi Murmu CLEA CASGC 2024 global collaborations for environmental justice suggestion
राष्ट्रमंडल अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल कॉन्फ्रेंस (सीएएसजीसी) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

राष्ट्रमंडल कानूनी शिक्षा संघ (सीएलईए) - राष्ट्रमंडल अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल कॉन्फ्रेंस (सीएएसजीसी) 2024 के समापन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने राष्ट्रमंडल देशों की विविधता और विरासत का जिक्र करते हुए कहा, ये देश दुनियाभर को सहयोग की भावना से आम चिंताओं को दूर करने का रास्ता दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा, भारत के संविधान की प्रस्तावना 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीति' न्याय की बात करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए न्याय या इंसाफ की अवधारणा के इन पहलुओं के साथ पर्यावरणीय न्याय को भी जोड़ना चाहिए।
विज्ञापन


राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े न्याय या कानूनी मुद्दे अक्सर सीमा से जुड़ी चुनौतियां पैदा करते हैं। इंसाफ दिलाने में सीमा की चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी और स्पष्ट तरीका 'हमारा पर्यावरण' है। इस अवधारणा में दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जब हम न्याय मिलने की बात करते हैं, तो हमें सामाजिक न्याय सहित इसके सभी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
विज्ञापन


तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए राषट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट जजों, कानून और गृह मंत्री जैसे लोगों की मौजूदगी में कहा, प्रौद्योगिकी के कारण देख एक-दूसरे के करीब आए हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार और वाणिज्य का वैश्वीकरण देशों के बीच अंतर-संबंध का एक और उदाहरण है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि जटिल सीमा पार कानूनी चुनौतियों की पहचान करते समय, अलग-अलग देशों को अंतर-संबंध, अंतर-निर्भरता और तकनीकी क्रांति को ध्यान में रखना जरूरी है। राष्ट्रपति के मुताबिक, हमें हमेशा मानवता और मानवीय मूल्य के आधार पर फैसले लेने चाहिए। ये हम सभी के लिए सामान्य हैं।

राष्ट्रमंडल कानूनी शिक्षा संघ (सीएलईए) की पहल का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि सीएलईए ने साझा भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी ली है। इसके तहत देशों की सीमाओं से परे समानता और गरिमा आधारित प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों को रेखांकित किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed