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भारत-पाकिस्तान रिश्ता : बनने से पहले ही न बिगड़ जाए बात, शहबाज शरीफ ने ले लिया यू-टर्न

Sat, 28 Jan 2023 04:21 AM IST
Jeet Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 28 Jan 2023 04:21 AM IST
सार

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद दोनों देशों के नजदीक आने की कोशिशों से ठीक पहले ऐसे विवादों ने रिश्तों में दूरी और तल्खी पैदा की है।

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Preparing to invite Pakistani PM Sharif for the summit
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। - फोटो : ANI

विस्तार

नए वर्ष में भारत-पाक रिश्तों पर सालों से जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के यह मानने से बंधी थी कि भारत से 3 युद्ध में उन्होंने सबक सीखा है। भारत ने भी उदारता दिखाई। वह इसी हफ्ते एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तानी विदेश मंत्री को न्योता भेजने के बाद शरीफ को भी बुलाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन सिंधु जल संधि मामले में पाकिस्तान की मनमानी, रिश्ते सुधारने की नई कवायद पर पानी फेर सकती है।

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केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद दोनों देशों के नजदीक आने की कोशिशों से ठीक पहले ऐसे विवादों ने रिश्तों में दूरी और तल्खी पैदा की है। 2015 में जब दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता की संभावना बनती दिखी तब पठानकोट में आतंकी हमले ने दोनों में दूरी बढ़ा दी। एक वर्ष बाद दक्षेस सम्मेलन में रिश्ते सुधारने की गुंजाइश दिखी, लेकिन ठीक पहले उरी में सैन्य मुख्यालय पर आतंकी हमले ने पानी फेर दिया।
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हर बार पाकिस्तान की चाल
भारत की ओर से संबंध सुधारने की कई बार कोशिश हुई। पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ को न्योता भेजा। अफगानिस्तान से वापसी के क्रम में पाक भी गए। लेकिन पाक ने हमेशा चालें चलीं और संबंध बिगाड़े।

सिंधु संधि पर भारत का रुख सख्त
सरकारी सूत्र ने कहा, भले ही एससीओ सम्मेलन के लिए भारत की ओर से पाकिस्तान के विदेश मंत्री को न्योता गया है, मगर इसका यह मतलब नहीं है कि सिंधु संधि पर हमारे रुख में कोई नरमी आएगी। पाकिस्तान के अनुरोध पर विश्व बैंक की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं में दो स्तरीय समीक्षा या जांच अस्वीकार्य है। यह इस संधि के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। भारत पांच साल से पाकिस्तान की आपत्तियों पर बातचीत चाहता था, अब हम संधि की प्रक्रियाओं के अनुरूप सख्त कदम उठाएंगे।


लोकसभा चुनाव के पहले भी नापाक चाल...
भारत ने 2018 में रिश्ते सुधारने की पहल की। तब बातचीत की संभावना तलाशने के लिए ट्रैक टू डिप्लोमेसी के तहत पूर्व विदेश सचिव विवेक काटजू के नेतृत्व में एक टीम पाक गई। वार्ता में विवादास्पद मुद्दों पर द्विपक्षीय चर्चा की संभावना तलाशने पर सहमति बनी। मगर इसके चंद महीने बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए।

कब-कब क्या क्या हुआ?

  • 2015 में वार्ता से पूर्व पठानकोट में आतंकी हमला
  • सरताज अजीज की हुर्रियत नेताओं से मिलने की जिद2016 में उरी में सैन्य मुख्यालय पर आतंकी हमला
  • -2019 में पुलवामा पर हुआ आतंकवादी हमला


दो साल बाद अजमेर पहुंचे पाकिस्तानी जायरीन
संबंध सुधारने की कड़ी में पाक से जायरीनों का एक जत्था 2 वर्ष बाद सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 811वें उर्स के मौके पर अजमेर पहुंचा। इस बार सिर्फ 240 को ही वीजा दिया गया है।

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