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Karnataka: दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा प्रज्वल, दलील- मेल नहीं खाते पीड़िता के बयान

Tue, 30 Sep 2025 10:17 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 30 Sep 2025 10:17 AM IST
सार

Karnataka: पूर्व जेडी(एस) सांसद प्रज्वल रेवना ने दुष्कर्म के मामले में मिली उम्रकैद की सजा के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उसे 2021 में एक फार्महाउस और बंगलूरू स्थित घर में घरेलू सहायिका से दुष्कर्म के आरोप में दोषी ठहराया गया था। प्रज्वल ने कहा कि पीड़िता के बयानों में विरोधाभास है। 

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Prajwal Revanna challenges his conviction in harassment case in Karnataka HC
कर्नाटक हाईकोर्ट। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

जेडी(एस) के पूर्व सांसद ने खुद को दोषसिद्धी के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का में याचिका दायर की है। प्रज्वल को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराया गया था।
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पिछले महीने एक विशेष अदालत ने प्रज्वल को दुष्कर्म मामले में दोषी करार देते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह सजा चार अलग यौन शोषण और दुष्कर्म के मामलों से एक में दी गई थी। कोर्ट ने उस पर कुल 11.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसमें से 11.25 लाख रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए गए थे। 
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सांसदों/विधायकों की सुनवाई के लिए बनी विशेष अदालत के जज गजानन भट ने दो अगस्त को यह सजा सुनाई थी। सजा के बाद से प्रज्वल जेल में है। प्रज्वल को मई 2024 में जर्मनी से लौटने के बाद गिरफ्तार किया गया था। अब उसने कोर्ट के फैसले को कई आधारों पर चुनौती है। उसका कहना है कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास है और अभियोजन पक्ष ने जो सबूत पेश किए हैं, उनमें कई विसंगतियां हैं। 
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ये भी पढ़ें: कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा प्रज्वल रेवन्ना, दुष्कर्म मामले में अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ दायर की अपील


जिसमें में उसे सजा हुई है, वह 48 साल की एक महिला से जुड़ा है। महिला प्रज्वल के परिवार के होलेनरसीपुरा स्थित 'गणिकाडा' फार्महाउस में काम करती थी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि 2021 में उसे दो बार दो बार दुष्कर्म का शिकार बनाया है, एक बार फार्महाउस में औरर दूसरी बार बंगलूरू के घर में। आरोपी ने अपने फोन से इन घटनाओं का वीडियो भी बनाया था। निचली कोर्ट ने अपने फैसले में वीडियो फुटेज, डीएनए जांच, पीड़िता के कपड़ों पर मिले दाग जैसे कई जैविक साक्ष्य जैसे कई अहम सबूतों को आधार बनाया। 

याचिका में प्रज्वल ने कहा है कि पीड़िता की पुलिस में दी गई शिकायत और कोर्ट में दिए गए बयान मेल नहीं खाते। उसने एक और मुद्दा उठाया कि जिस गद्दे पर दाग मिले, वह मई 2024 तक बिना साफ किए रखा गया था, जबकि घटना जनवरी 2021 से जनवरी 2022 के बीच की है। प्रज्वल ने यह भी कहा कि अगर वाकई में घटना हुई होती, तो पीड़िता 2023 में उसी फार्महाउस में हुए गृहप्रवेश के कार्यक्रमों में क्यों जाती?

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