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'खरगे-सोनिया गांधी ने कभी भेदभाव नहीं किया': फिर किसकी वजह से छोड़ी कांग्रेस? प्रद्युत बोरदोलोई ने किया खुलासा

Sat, 28 Mar 2026 02:04 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर Published by: नवीन पारमुवाल Updated Sat, 28 Mar 2026 02:04 PM IST
सार

असम से दो बार के सांसद रहे प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की बड़ी वजह बताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में उन्हें जानबूझकर दरकिनार किया गया और अपमानित किया गया जिससे वह खुद को पार्टी में अवांछित महसूस करने लगे थे।

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Pradyut Bordoloi explains why he left Congress to join BJP before Assam assembly elections Dispur seat
प्रद्युत बोरदोलोई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

Assam Election 2026: हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए असम से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर उन्हें लगातार अपमानित किया जा रहा था और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही थी। बता दें कि पांच दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहे बोरदोलोई अब भाजपा के टिकट पर दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 
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बोरदोलोई के शनिवार को कहा कि उनके साथ भेदभाव की शुरुआत साल 2022 के संगठनात्मक चुनावों के दौरान हुई थी। उन्होंने बताया कि जब शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने थरूर का समर्थन किया था। बोरदोलोई का दावा है कि थरूर का प्रस्तावक बनने और उनके लिए प्रचार करने की वजह से पार्टी के कुछ नेता उनसे नाराज हो गए। इसके बाद से ही उन्हें पार्टी में हाशिए पर धकेलने की कोशिशें शुरू हो गई थीं।
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खरगे-सोनिया गांधी ने कभी भेदभाव नहीं किया
पूर्व सांसद ने बताया कि मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने उनके साथ कभी भेदभाव नहीं किया, लेकिन पार्टी की दूसरी पंक्ति के नेताओं ने उन्हें जानबूझकर अलग-थलग कर दिया। बोरदोलोई ने कहा कि जब भी वह लोकसभा में अपनी बात रखना चाहते थे, तो उन्हें मौका नहीं दिया जाता था। पार्टी की लिस्ट में उनका नाम सबसे नीचे रखा जाता था ताकि उन्हें बोलने के लिए सिर्फ दो मिनट मिलें या फिर समय ही खत्म हो जाए।
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बोरदोलोई ने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 2025 के पंचायत चुनावों के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था। लोहे की रॉड से उनकी कार पर हमला किया गया। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह भाजपा की साजिश है, लेकिन बाद में पता चला कि यह हमला कांग्रेस के ही एक विधायक के करीबी ने करवाया था। जब उन्होंने इसकी शिकायत आलाकमान से की, तो उनकी बात सुनने के बजाय उसी विधायक को ज्यादा अहमियत दी गई।

उन्होंने आगे कहा कि जब राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी इस मामले में उनका बचाव नहीं किया, तो उन्हें बहुत निराशा हुई। बोरदोलोई ने महसूस किया कि कांग्रेस में अब उनके लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि एक सांसद होने का क्या फायदा जब वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में ढंग से उठा ही न सकें।


भाजपा में शामिल होने को लेकर उन्होंने बताया कि इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनसे संपर्क किया था। बोरदोलोई ने भाजपा के सामने केवल एक ही शर्त रखी कि उन्हें पूरा सम्मान दिया जाए। भाजपा ने उन्हें डिस्पुर से उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने साफ किया कि वह बिना किसी निजी स्वार्थ के पार्टी में आए हैं और अब भाजपा के मजबूत संगठन के साथ मिलकर जनता की सेवा करेंगे।

यह भी पढ़ें: कौन हैं प्रद्युत बोरदोलोई?: असम चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद-MLA रहे नेता भाजपा में गए; सियासी बयानबाजी शुरू
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