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आईआईटी छात्रावासों का पीपीपी मॉडल से होगा रखरखाव, रहना और खाना होगा महंगा

Wed, 02 Oct 2019 05:57 AM IST
गौरव पाण्डेय सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 02 Oct 2019 05:57 AM IST
सार

  • केंद्र सरकार ने किया आईआईटी के छात्रावासों का निजीकरण करने का फैसला
  • हॉस्टल में एसी, सिंगल रूम, खाने आदि के आधार पर नया शुल्क वसूला जाएगा
  • सरकार चाहती है आईआईटी का काम सिर्फ पढ़ाई, रिसर्च आदि पर फोकस रहे

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PPP Model will be used in Hostels of IITs, living and fooding will be costlier
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (फाइल फोटो)

विस्तार

केंद्र सरकार ने आईआईटी के छात्रावासों के निर्माण, उनके रखरखाव और भोजन की व्यवस्था के काम के निजीकरण का फैसला किया है। सरकार के इस कदम से आईआईटी में छात्रों का रहना और खाना महंगा हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हॉस्टल में एसी, सिंगल रूम, खाने आदि के आधार पर नया शुल्क वसूला जाएगा। यानी कोई छात्र एसी कमरे में रहना चाहता है और अपनी इच्छा अनुसार भोजन करना चाहता है तो उसे इसके लिए अलग से पैसा देना होगा।

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दरअसल सरकार चाहती है आईआईटी का काम सिर्फ पढ़ाई, रिसर्च आदि पर फोकस रहे और छात्रावास का रखरखाव, खाना बनवाने व नए हॉस्टल निर्माण का काम निजी हाथों में सौंप दिया जाए। हालांकि इस कदम से छात्रों को पहले से अधिक पैसा चुकाना पड़ सकता है। नई योजना से सामान्य वर्ग के छात्र प्रभावित होंगे जबकि आरक्षित वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्र, हॉस्टल की फीस अन्य छात्रों की तरह ही देंगे पर यह पैसा उन्हें मिलने वाले वजीफे के जरिए सरकार चुकाएगी। 
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अभी तक आईआईटी में पांच लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों के छात्रों को ईडब्ल्यूएस में रखा जाता है। केंद्र सरकार ने यह फैसला सभी 23 आईआईटी में लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कमेटी भी गठित कर दी है। कमेटी पुराने हॉस्टल का रखरखाव थर्ड पार्टी से करवाने के मानकों की सिफारिश करेगी। कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि इसी सत्र से नए नियम लागू हो सकें।

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