Preventive Detention Law: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निवारक निरोध कानून का नियमित मामलों में नहीं किया जा सकता इस्तेमाल
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब उसने पिछले साल अक्टूबर में तेलंगाना में दो व्यक्तियों को हिरासत में लेने के आदेश को रद्द कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निवारक निरोध कानून के तहत शक्तियां असाधारण हैं और इसे नियमित तरीके से प्रयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़ा प्रहार करता है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब उसने पिछले साल अक्टूबर में तेलंगाना में दो व्यक्तियों को हिरासत में लेने के आदेश को रद्द कर दिया था। पुलिस आयुक्त, राचकोंडा कमिश्नरी द्वारा निरोध आदेश पारित किया गया था, इस आधार पर कि ये दोनों व्यक्ति सोने की चेन स्नैचिंग के अपराधों में शामिल थे, जिसमें पीड़ित ज्यादातर महिलाएं थीं।
जस्टिस सी टी रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की अवकाश पीठ ने कहा कि हालांकि प्राधिकरण के अनुसार, बंदी 30 से अधिक मामलों में शामिल थे, लेकिन चेन स्नेचिंग के केवल चार मामलों को नजरबंदी के लिए आधार माना गया, क्योंकि अन्य मामले कमिश्नरी के न्यायिक क्षेत्र के बाहर के बताए गए थे।
शीर्ष अदालत ने यह भी नोट किया कि इन चार मामलों में अपराध कथित तौर पर पिछले साल 6 मई से 26 जुलाई के बीच दो महीने की अवधि के भीतर किए गए थे और इन मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा दोनों बंदियों को जमानत दी गई थी। इस कानून के तहत प्रयोग की जाने वाली शक्तियां असाधारण शक्तियां हैं जो सरकार को एक असाधारण स्थिति में अपने प्रयोग के लिए दी गई हैं क्योंकि यह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़ी चोट करती है, और इस प्रकार नियमित तरीके से प्रयोग नहीं किया जा सकता है।