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Bangladesh: बांग्लादेश से मिले सकारात्मक संदेश, क्या तारिक रहमान के पीएम बनने से सुधरेंगे संबंध?

Sun, 15 Feb 2026 05:08 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 15 Feb 2026 05:08 PM IST
सार

बांग्लादेश से हाल के सकारात्मक संकेतों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। माना जा रहा है कि यदि तारिक रहमान सत्ता में आते हैं तो द्विपक्षीय संवाद, व्यापार और सुरक्षा सहयोग में सुधार संभव है।

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Positive messages received from Bangladesh, will relations improve with Tariq Rahman becoming PM?
तारिक रहमान और पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत और बांग्लादेश आपस में संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। तारिक रहमान की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह उन्हें शुभकामना संदेश भेजा, उसे केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है। विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि यह पड़ोसी देश को भेजा गया एक सकारात्मक संदेश था जिसका आशय था कि भारत बांग्लादेश की नई सरकार के साथ कदम से कदम बढ़ाकर चलने को इच्छुक है। बांग्लादेश ने भी इस संदेश को बखूबी समझने का संकेत दिया है। तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने शपथ ग्रहण का न्योता देकर यह संकेत दिया है कि वे भारत के साथ एक बेहतर रिश्ते के साथ अपनी शुरुआत करना चाहेंगे। उनके खास सलाहकार ने भी भारत के साथ बेहतर संबंधों को लेकर उत्सुकता दिखाई है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि दोनों देश परस्पर बेहतर संंबंधों के साथ आगे बढ़ना चाहेंगे।

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की शानदार जीत के बाद तारिक रहमान ने 14 फरवरी को राष्ट्र के नाम दिए अपने पहले संबोधन में ही स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश और उसके लोगों के हित उनकी पार्टी की विदेश नीति की दिशा तय करेंगे। तारिक रहमान जानते हैं कि देश की बदहाल आर्थिक व्यवस्था को ठीक करना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। उन्हें यह भी पता है कि इसमें पड़ोसी देश भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है जो आज भी बांग्लादेश के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। ऐसे में भारत के साथ बेहतर संबंध बांग्लादेश को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।     
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लेकिन विदेश मामलों के जानकार मानते हैें कि तारिक रहमान के लिए यह सब इतना आसान नहीं रहने वाला है। इस राह में तारिक रहमान को तीन तरफ से दबाव झेलना पड़ सकता है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी स्वयं भी पूर्व में भारत विरोधी रुख अपनाने के लिए जानी जाती रही है। स्वयं तारिक रहमान भी भारत के कटु आलोचक रहे हैं। बीएनपी पर भारत की सीमाओं के करीब अपने इलाकों में भारत विरोधी तत्वों को सह देने के आरोप लगते रहे हैं। बीएनपी में अभी भी पुराने नेताओं का दबदबा है जो उनके भारत के साथ बेहतर रिश्तों में अपना दबाव डाल सकते हैं। 
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बांग्लादेश के इन चुनावों में शेख हसीना एक बड़ा मुद्दा थीं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उनकी पार्टी अवामी लीग पर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। बांग्लादेश भारत पर शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए दबाव बनाता रहा है। नई सरकार आने के बाद भी वह यह कोशिश बरकरार रखेगा। लेकिन भारत तमाम कारणों से शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपना नहीं चाहेगा। ऐसे में इस मुद्दे पर बांग्लादेश के कट्टरपंथी तारिक रहमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। ऐसे में तारिक रहमान के लिए चाहकर भी भारत के साथ बेहतर संबंध बनाना आसान नहीं होगा।  


पाकिस्तान ने बांग्लादेश चुनावों में दोहरी रणनीति अपनाई है। वह जमात का खुला समर्थन करती रही तो बीएनपी की जीत की आशंका को देखते हुए पहले ही उसके साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश की थी। पाकिस्तान जिस तरह चीन, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ मिलकर एक गठजोड़ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, यदि यह गठबंधन आकार लेता है तो इससे अप्रत्यक्ष तरीके से भारत पर दबाव बनाने की रणनीति मानी जाएगी।  ऐसे में तारिक रहमान भारत के साथ संबंधों की नई दिशा किस रास्ते पर ले जाना चाहते हैं, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा। 

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