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विदेशी अंशदान पर सियासत: रिजिजू बोले- कानून बदलने से किसी संस्था को नुकसान नहीं, संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवाल
Sat, 04 Apr 2026 04:30 PM IST
Himanshu Singh Chandel
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sat, 04 Apr 2026 04:30 PM IST
सार
FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। किरेन रिजिजू ने कहा कि यह बिल ईमानदार संगठनों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, जबकि डीएमके सांसद पी विल्सन ने इसे ईसाई समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। आइए, विस्तार से इस पूरे मामले को जानते हैं।
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केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
केंद्र सरकार के प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को लेकर देश में सियासत गरमा गई है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ईसाई समुदाय को भरोसा दिलाया है कि उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं होगा, वहीं विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय को निशाना बनाने वाला कदम बताया है। इस मुद्दे ने चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है।
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किरेन रिजिजू ने केरल में चर्च नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि यह बिल केवल उन संगठनों के खिलाफ है जो अवैध तरीके से विदेशी फंड का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे और ईमानदार एनजीओ तथा चर्च से जुड़े संस्थानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल बिल को रोक दिया गया है और इस पर आगे चर्चा की जाएगी।
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क्या FCRA बिल से ईसाई संस्थाओं को खतरा है?
विपक्ष ने इस बिल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। डीएमके सांसद पी विल्सन ने आरोप लगाया कि यह बिल ईसाई संस्थाओं और मिशनरियों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि ईस्टर जैसे समय पर इसे लाना समुदाय में डर पैदा करने की कोशिश है। उनके मुताबिक इस बिल के जरिए चर्च, स्कूल और अस्पतालों जैसी संस्थाओं की संपत्ति पर असर पड़ सकता है।
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क्या है FCRA संशोधन बिल 2026?
FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंड के उपयोग को और सख्त निगरानी में लाना है। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विदेशी पैसे का गलत इस्तेमाल रोका जा सकेगा। इस बिल में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जिससे संदिग्ध संगठनों की जांच आसान होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
क्या विपक्ष इसे ड्राकोनियन कानून बता रहा है?
पी विल्सन ने इस बिल को ड्राकोनियन यानी कठोर कानून बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा है जैसे किसी के घर में घुसकर संपत्ति छीन ली जाए। उनका आरोप है कि यह बिल अल्पसंख्यकों की संपत्तियों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठा चुके हैं।
क्या सरकार का उद्देश्य सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाना है?
सरकार का कहना है कि इस बिल का मकसद केवल पारदर्शिता बढ़ाना और गलत फंडिंग को रोकना है। गृह मंत्रालय के अनुसार यह कानून उन संगठनों पर कार्रवाई करेगा जो देश के हितों के खिलाफ विदेशी धन का इस्तेमाल करते हैं। सरकार का दावा है कि यह बिल किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बनाता।
फिलहाल बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। रिजिजू ने कहा है कि चुनाव के बाद इस पर और चर्चा की जाएगी। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी राजनीति दोनों में बड़ा विवाद बन सकता है।