Politics: यूपी, बिहार और महाराष्ट्र के लिए भाजपा बना रही खास प्लान, समीकरण साधने में जुटे पार्टी के रणनीतिकार
Politics: भाजपा के रणनीतिकारों को पता है कि इंडिया गठबंधन में बसपा और सपा के आने के बाद स्थिति काफी पेचीदा हो जाएगी। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में विपक्षी गठबंधन का वोट 42 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकता है। विपक्षी गठबंधन के सीटों की संख्या बढ़ सकती है।
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2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 303 सीटें मिली थीं। इस बार 350 सीट जीतने का लक्ष्य रखा जा रहा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए भाजपा सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र पर दे रही है। भाजपा के नेता भी मानते हैं कि इन तीनों राज्यों में चुनौती बड़ी हो सकती है। इसे ध्यान में रखकर पार्टी के रणनीतिकार समय रहते सभी समीकरण साधने में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर कहते हैं कि सपा, कांग्रेस, रालोद और इंडिया गठबंधन सीट बंटवारे के बाद पूरी ताकत से चुनाव लड़ गया तो हम उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा झटका दे सकते हैं।
इन तीन राज्यों में 2019 में एनडीए गठबंधन को 168 में 144 सीटें मिली थीं। विपक्ष के पाले में केवल 28 सीटें गई थीं। इनमें सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में लगा था। उत्तर प्रदेश में भाजपा को 10 सीटों का फायदा हुआ था। कांग्रेस को 2014 की तुलना में एक सीट का नुकसान हुआ था। सपा के खाते में पांच सीट आई थी। महाराष्ट्र में कांग्रेस को एक सीट, एनसीपी को 4 सीट पर सफलता मिली थी। एक सीट एआईएमआईएम और एक निर्दलीय के खाते में गई थी। बिहार में विपक्ष के खाते में केवल एक सीट आई थी।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को झटका दे सकता है इंडिया गठबंधन
पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने आए थे। उनके साथ पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव भी थे। अखिलेश की मुख्य चिंता है उत्तर प्रदेश का लोकसभा चुनाव। समाजवादी पार्टी चाहती है कि इसमें कांग्रेस कोई मध्य प्रदेश वाली गलती न दोहराए। सपा को अहमियत दे। दरअसल, अखिलेश यह संभावना भी टटोलने गए थे कि कहीं कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच कोई राजनीतिक खिचड़ी तो नहीं पक रही है। क्योंकि बसपा की प्रमुख मायावती के सामने बसपा के राजनीतिक वजूद को बनाए रखने की चुनौती है। बताते हैं कि मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें समाजवादी पार्टी को महत्व दिए जाने के लिए आश्वस्त किया है। ऐसे घटनाक्रम पर भाजपा नेताओं की भी निगाह हैं। पार्टी के रणनीतिकारों को पता है कि इंडिया गठबंधन में बसपा और सपा के आने के बाद स्थिति काफी पेचीदा हो जाएगी। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में विपक्षी गठबंधन का वोट 42 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकता है। विपक्षी गठबंधन के सीटों की संख्या बढ़ सकती है।
2019 में बसपा, सपा और रालोद ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को 38.89 प्रतिशत वोट और कुल 15 सीटें मिली थी। जिनमें से बसपा के पाले में 10 और सपा के पाले में पांच सीट आई थी। कांग्रेस ने 67 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारा था और सोनिया गांधी को छोड़कर सभी प्रत्याशी चुनाव हार गए थे। इसके समानांतर एनडीए ने 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारा था। भाजपा के 78 और अपना दल के दो प्रत्याशी मैदान में थे। एनडीए के खाते में 50.76 प्रतिशत वोट (भाजपा, 49.56 प्रतिशत वोट और 62 सीट तथा अपना दल को 1.20 प्रतिशत वोट और 02 सीट) मिली थी। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि हमारा जनाधार बढ़ा है। इसलिए इंडिया गठबंधन मिलकर लड़ा तो इस बार भाजपा की सीटों की संख्या 40 के नीचे रह सकती है। बसपा के सूत्र भी कहते हैं कि मायावती ने भले ही 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा की हो, लेकिन बिना किसी दल के साथ तालमेल के 2019 जैसा नतीजा मिल पाना मुश्किल है।
बिहार में क्या 39 सीट जीत पाएगा एनडीए?
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। भाजपा ने 2019 में जद(यू), लोजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 17 सीट पर भाजपा, 17 सीट पर जद(यू) के प्रत्याशी और 06 सीटों पर लोजपा चुनाव लड़ी थी। एनडीए के खाते में 40 में से 39 सीटें (53.25 प्रतिशत वोट) आई थी। दिलचस्प है कि इसमें भाजपा के खाते में 23.58 प्रतिशत और जद(यू) को 21.81 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार राजनीतिक और जातिगत समीकरण 2019 से बदला हुआ है। 2024 में जद(यू) कांग्रेस की मुख्य भूमिका में बने इंडिया गठबंधन का अहम हिस्सा है। राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल भी इंडिया गठबंधन में है। जद(यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने भी भाजपा के सामने अपनी ताकत दिखाने की चुनौती है। बिहार में वैसे भी जातिगत राजनीति प्रभावी रहती है। हालांकि केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को भरोसा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने सभी विरोधियों को पटखनी दे देगी।
कांग्रेस के नेता विपिन चौधरी बिहार को लेकर एक गणना करते हैं। वह कहते हैं कि जद(यू) और राष्ट्रीय जनता दल दोनों के साथ होने पर वोट प्रतिशत काफी बढ़ जाता है। बिहार में कांग्रेस का भी 8 प्रतिशत वोट है। इसलिए 2024 में इंडिया गठबंधन के दल साथ मिलकर चुनाव लड़े तो 2019 में एनडीए को मिली 39 सीटों में से करीब आधी सीटों का घाटा हो सकता है। विपिन कहते हैं कि यही कारण है कि भाजपा बिहार में सबकुछ ठीक करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
महाराष्ट्र: क्या शिंदे और पवार के साथ मिलकर मैदान में उतरेगी भाजपा
भाजपा के अंदरखाने में और महाराष्ट्र के नेताओं में इस सवाल पर बड़ी हलचल है। भाजपा ने सभी 48 सीटों पर सफलता पाने के लिए अपने 24 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने का मन बनाया है। हर नेता के जिम्मे दो लोकसभा सीटें रहने वाली हैं। बताते हैं शरद पवार का साथ छोड़कर उनके भतीजे अजीत पवार का गुट लगातार इस तरह के सवाल को केन्द्र में रखकर अपना राजनीतिक दबाव बढ़ा रहा है। महाराष्ट्र भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि जो भाजपा के साथ आया है, वह रहेगा। हालांकि नीतिगत मामलों में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा निर्णय लेंगे। लेकिन दबी जुबान से यह भी चर्चा है कि भाजपा शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजीत पवार) से तालमेल न बन पाने पर सभी 48 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इसके समानांतर भाजपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव शिवसेना के साथ मिलकर लड़ा था। इनमें से 25 सीट पर भाजपा और 23 पर शिवसेना लड़ी थी। 23 सीट पर भाजपा और 18 पर शिवसेना को (48 सीटों में से 41 सीट) सफलता मिली थी। एनसीपी (शरद पवार) के नेता अनिल देशमुख कहते हैं हमारी नजर अब लोकसभा चुनाव पर टिकी है। संजय राऊत भी यही जवाब देते हैं कि अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। इंडिया गठबंधन जीतेगा और महाराष्ट्र की जनता लोकसभा चुनाव में जवाब देगी।
कांग्रेस नेता का दावा - 2024 के नतीजे चौंकाएंगे
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश के नेता और प्रमुख रणनीतिकार में शामिल सूत्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे चौंकाएंगे। सूत्र का कहना है कि केवल इन तीन राज्यों में लोकसभा की 168 सीटे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष इसमें से करीब 50 प्रतिशत तक की सेंध लगा सकता है। सूत्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इस बार कांग्रेस को उम्मीद है। हम सहयोगियों के साथ मिलकर अच्छी संख्या में सीटें जीतेंगे।