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हसन मुश्रीफ के क्लीन चिट पर सियासी घमासान: भाजपा पर कांग्रेस हमलावर, कहा- वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स हुआ बेनकाब
Sat, 07 Nov 2026 05:11 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 07 Nov 2026 05:11 PM IST
सार
महाराष्ट्र के मंत्री हसन मुश्रीफ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत मिलने पर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने इसे भाजपा की 'वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स' बताया। सचिन सावंत ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और भाजपा नेता किरीट सोमैया की चुप्पी पर सवाल उठाए।
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मुश्रीफ केस पर सियासी बवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस ने शनिवार को महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कार्यवाही बंद करने की ईडी की कोशिश को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि इससे सत्ताधारी पार्टी की वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स का पर्दाफाश हो गया है।
विपक्षी दल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए और विरोधी दलों के नेताओं को परेशान करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
वॉशिंग मशीन से क्या मतलब है?
विपक्ष वॉशिंग मशीन वाली बात का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए करता है कि जिन नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या आयकर विभागजांच कर रही होती हैं। वे जैसे ही भाजपा में शामिल होते हैं या उसके साथ गठबंधन करते हैं। उनके मामले या तो खत्म कर दिए जाते हैं। उनमें देरी की जाती है, या उन्हें "कोल्ड स्टोरेज" (ठंडे बस्ते) में डाल दिया जाता है।
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क्या है पूरा मामला?
मुंबई की एक विशेष 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) अदालत ने मुश्रीफ और उनके बेटों के खिलाफ 2022 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इस मामले से जुड़े मूल अपराधों को रद्द कर दिया गया था।
सचिन सावंत ने क्या कहा?
कांग्रेस सचिव और तेलंगाना के लिए पार्टी के सह-प्रभारी, सचिन सावंत ने एक बयान में कहा कि ईडी के इस कदम से मुश्रीफ और उनके परिवार को राहत मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मंत्री विपक्ष में ही रहते, तो क्या उन्हें भी ऐसी ही राहत मिल पाती?
उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि सोमैया ने ही मुश्रीफ के खिलाफ ईडी और आयकर विभाग में 2,700 पन्नों की शिकायत दर्ज कराई थी। कांग्रेस नेता ने पूछा, 'सोमैया, जिन्होंने मुश्रीफ के खिलाफ 2,700 पन्नों की शिकायत दी थी, वे अब चुप क्यों हैं? उनके आरोपों वाली फाइल कहां गई?'
12 वर्षों में एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय एजेंसियों का लगातार दुरुपयोग किया गया है, ताकि विपक्षी नेताओं की छवि खराब की जा सके, उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान किया जा सके और सत्ताधारी गुट के सामने झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।
सावंत ने दावा किया कि जब मुश्रीफ एनसीपी के हिस्से के रूप में सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन में शामिल हुए, तो उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई धीमी पड़ गई। उन्होंने इसे भाजपा की कथित "वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स" करार दिया। एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए सावंत ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में इन एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों में सजा दिलाने की दर न के बराबर रही है।
उन्होंने कहा कि जिन एजेंसियों का काम भ्रष्टाचार से लड़ना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, उनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। हालांकि, 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुर्गूड पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले को रद्द कर दिया।
जांच को बंद करने का अनुरोध करते हुए, ईडी ने मुंबई की विशेष अदालत को बताया कि पीएमएलए के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (मूल अपराध) का होना एक अनिवार्य शर्त है। इसलिए, हाई कोर्ट के आदेश के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की इस शिकायत में अब कुछ भी शेष नहीं रह गया है।
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विपक्षी दल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए और विरोधी दलों के नेताओं को परेशान करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
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वॉशिंग मशीन से क्या मतलब है?
विपक्ष वॉशिंग मशीन वाली बात का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए करता है कि जिन नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या आयकर विभागजांच कर रही होती हैं। वे जैसे ही भाजपा में शामिल होते हैं या उसके साथ गठबंधन करते हैं। उनके मामले या तो खत्म कर दिए जाते हैं। उनमें देरी की जाती है, या उन्हें "कोल्ड स्टोरेज" (ठंडे बस्ते) में डाल दिया जाता है।
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क्या है पूरा मामला?
मुंबई की एक विशेष 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) अदालत ने मुश्रीफ और उनके बेटों के खिलाफ 2022 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इस मामले से जुड़े मूल अपराधों को रद्द कर दिया गया था।
सचिन सावंत ने क्या कहा?
कांग्रेस सचिव और तेलंगाना के लिए पार्टी के सह-प्रभारी, सचिन सावंत ने एक बयान में कहा कि ईडी के इस कदम से मुश्रीफ और उनके परिवार को राहत मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मंत्री विपक्ष में ही रहते, तो क्या उन्हें भी ऐसी ही राहत मिल पाती?
उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि सोमैया ने ही मुश्रीफ के खिलाफ ईडी और आयकर विभाग में 2,700 पन्नों की शिकायत दर्ज कराई थी। कांग्रेस नेता ने पूछा, 'सोमैया, जिन्होंने मुश्रीफ के खिलाफ 2,700 पन्नों की शिकायत दी थी, वे अब चुप क्यों हैं? उनके आरोपों वाली फाइल कहां गई?'
12 वर्षों में एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय एजेंसियों का लगातार दुरुपयोग किया गया है, ताकि विपक्षी नेताओं की छवि खराब की जा सके, उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान किया जा सके और सत्ताधारी गुट के सामने झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।
सावंत ने दावा किया कि जब मुश्रीफ एनसीपी के हिस्से के रूप में सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन में शामिल हुए, तो उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई धीमी पड़ गई। उन्होंने इसे भाजपा की कथित "वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स" करार दिया। एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए सावंत ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में इन एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों में सजा दिलाने की दर न के बराबर रही है।
उन्होंने कहा कि जिन एजेंसियों का काम भ्रष्टाचार से लड़ना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, उनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। हालांकि, 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुर्गूड पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले को रद्द कर दिया।
जांच को बंद करने का अनुरोध करते हुए, ईडी ने मुंबई की विशेष अदालत को बताया कि पीएमएलए के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (मूल अपराध) का होना एक अनिवार्य शर्त है। इसलिए, हाई कोर्ट के आदेश के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की इस शिकायत में अब कुछ भी शेष नहीं रह गया है।